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बोली से आउट हो सकते हैं पाकिस्तानी क्रिकेटर्स…. ‘हंड्रेड लीग’ में चार फ्रेंचाइजी करेंगी किनारा

आईपीएल मालिकों की हिस्सेदारी वाली टीमों के फैसले की चर्चा तेज, क्रिकेट जगत में बहस शुरू

स्पोर्ट्स डेस्क, 20 फरवरी 2026:

इंग्लैंड की चर्चित फ्रेंचाइजी क्रिकेट लीग द हंड्रेड को लेकर नई रिपोर्ट सामने आने के बाद क्रिकेट जगत में हलचल बढ़ गई है। खबर है कि जिन टीमों में इंडियन प्रीमियर लीग के मालिकों की हिस्सेदारी है, वे आगामी नीलामी में पाकिस्तानी खिलाड़ियों पर बोली नहीं लगाने का फैसला कर सकती हैं।

रिपोर्ट में सामने आया अलिखित नियम

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक एक खिलाड़ी एजेंट के हवाले से बताया गया है कि यह किसी आधिकारिक नियम का हिस्सा नहीं है, बल्कि एक तरह की मौन सहमति है। यानी ऐसा कोई लिखित प्रतिबंध नहीं है, लेकिन व्यवहार में कुछ टीमें पाकिस्तानी खिलाड़ियों से दूरी बना सकती हैं।

आईपीएल निवेश से जुड़ा मामला

दुनिया की कई टी20 लीगों में पहले भी देखा गया है कि जहां आईपीएल फ्रेंचाइजी मालिकों की सीधी भागीदारी होती है, वहां पाकिस्तानी खिलाड़ियों की मौजूदगी कम या न के बराबर रहती है। आईपीएल में भी 2008 के पहले सीजन के बाद कोई पाकिस्तानी खिलाड़ी नहीं खेल पाया है। दक्षिण अफ्रीका की एसए20 और यूएई की आईएलटी20 लीग में भी आईपीएल समूहों की टीमों में पाकिस्तानी खिलाड़ियों को मौका नहीं मिला। अब द हंड्रेड की आठ में से चार टीमों में भी आईपीएल निवेश प्रभावी हो चुका है।

किन टीमों के नाम आए सामने

रिपोर्ट में जिन फ्रेंचाइजियों का जिक्र किया गया है, उनमें मैनचेस्टर सुपर जाएंट्स, साउदर्न ब्रेव, एमआई लंदन और सनराइजर्स लीड्स शामिल बताए जा रहे हैं। माना जा रहा है कि ये टीमें पाकिस्तानी खिलाड़ियों पर बोली लगाने से बच सकती हैं।

नियमों और समान अवसर पर उठे सवाल

इंग्लैंड एंड वेल्स क्रिकेट बोर्ड ने साफ कहा है कि द हंड्रेड दुनिया भर के खिलाड़ियों के लिए खुला मंच है और सभी टीमों से वैश्विक प्रतिनिधित्व की उम्मीद की जाती है। क्रिकेट संगठनों ने भी समान अवसर और भेदभाव विरोधी नीतियों पर जोर दिया है। वहीं वर्ल्ड क्रिकेटर्स एसोसिएशन का कहना है कि हर खिलाड़ी को निष्पक्ष मौका मिलना चाहिए और किसी भी फैसले में समानता और सम्मान के सिद्धांतों का पालन जरूरी है।

आगे नीलामी पर टिकी नजर

इस बार नीलामी के लिए करीब 18 देशों के लगभग एक हजार खिलाड़ियों ने पंजीकरण कराया है। अगर रिपोर्ट सही साबित होती है तो यह मामला सिर्फ खेल तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में निवेश, राजनीति और अवसरों की बराबरी को लेकर नई बहस छेड़ सकता है। अब सबकी नजर आगामी नीलामी पर है, जहां तस्वीर पूरी तरह साफ होगी।

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