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पुलिस स्मृति दिवस : जानिए क्यों मनाया जाता है यह विशेष दिन

पुलिस स्मृति दिवस पर विशेष, 21 अक्टूबर 1959 में लद्दाख के हाट-स्प्रिंग क्षेत्र में हुई थी घटना, चीन की सेना का आखिरी दम तक किया था सामना, 10 भारतीय जवान हो गए थे शहीद, दिल्ली में बना है राष्ट्रीय पुलिस स्मारक

न्यूज डेस्क, 21 अक्टूबर 2026ः

पुलिस स्मृति दिवस हर साल 21 अक्टूबर को मनाया जाता है। इस दिन उन पुलिसकर्मियों के बलिदान को याद कर श्रद्धांजलि दी जाती है, जिन्होंने देश की सुरक्षा और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए अपने प्राण न्यौछावर कर दिए थे। यह दिन एक ऐतिहासिक घटना से भी जुड़ा हुआ है। इस दिन चीन के सैनिकों ने घात लगाकर भारतीय पुलिसकर्मियों पर हमला कर दिया था, जिसमें 10 शहीद हो गए थे। पुलिसकर्मियों के सम्मान में दिल्ली में राष्ट्रीय पुलिस स्मारक बनवाया गया है। यहां हर साल उनकी याद में कार्यक्रम होते हैं।

67 वर्ष पहले लद्दाख में हुई थी घटना

67 वर्ष पहले 21 अक्टूबर 1959 में केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल की तीसरी बटालियन की एक कम्पनी को भारत-तिब्बत सीमा की सुरक्षा के लिए लद्दाख के अत्यधिक बर्फीले और दुर्गम क्षेत्र हाट-स्प्रिंग में तैनात किया गया था। कम्पनी को टुकड़ियों में बांटकर चौकसी करने को कहा गया। जब बल के 21 जवानों का गश्ती दल क्षेत्र में गश्त कर रहा था। तभी चीन की सेना के एक बड़े दस्ते ने इस टुकड़ी पर घात लगाकर हमला कर दिया।

चीन के सैनिकों के पास थे ऑटोमैटिक हथियार

चीन के सैनिकों के पास मोर्टार और ऑटोमैटिक हथियार थे और वे ऊंचाई पर भी थे। इसका उन्होंने फायदा उठाया। दूसरी ओर भारतीय जवानों के पास सिर्फ .303 राइफलें थीं। यही नहीं उनके पास बर्फ के मैदान में छिपने के लिए कोई कवर भी नहीं था। ऐसे हालात में भारतीय सैनिकों ने हथियार डालने के बजाय आखिरी सांस तक चीन की सेना का डटकर सामना किया। इस भयानक गोलीबारी में 10 जवान शहीद हो गए थे और नौ को चीन के सैनिकों ने बंदी बना लिया था।

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पीएम मोदी ने देश को समर्पित किया था राष्ट्रीय पुलिस स्मारक

पुलिस स्मृति दिवस पर दिल्ली स्थित राष्ट्रीय पुलिस स्मारक में कार्यक्रम आयोजित किया जाता है। पीएम नरेंद्र मोदी ने 2018 में यह स्मारक देश को समर्पित किया था। इसमें परेड, शहीदों के नाम पुकारना और वरिष्ठ सरकारी व पुलिस अधिकारियों द्वारा पुष्पांजलि अर्पित करना शामिल है। इस स्मारक में 30 फीट ऊंची ग्रेनाइट की प्रतिमा है, जिस पर 35,000 से अधिक पुलिस शहीदों के नाम अंकित हैं। यह परिसर 6.3 एकड़ में फैला हुआ है।
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राष्ट्रीय पुलिस संग्रहालय में है पुलिस बलों का इतिहास

स्मारक में एक राष्ट्रीय पुलिस संग्रहालय भी है जो पुलिस बलों के इतिहास, वर्दी और हथियारों को प्रदर्शित करता है। शस्त्रों को उलट दिया जाता है। दो मिनट का मौन रखा जाता है। शहीद हुए सैनिकों के नाम पढ़े जाते हैं और तीन बार तोपों की सलामी दी जाती है। इस दिन राज्य पुलिस मुख्यालय, जिला इकाइयां और केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल भी परेड आयोजित करते हैं। रक्तदान शिविर, वृक्षारोपण और पुलिसकर्मियों के परिवारों को सहायता प्रदान करने वाले कार्यक्रम भी आयोजित होते हैं। सभी पुलिस इकाइयां शहीद हुए वीर जवानों को श्रद्धासुमन अर्पित कर उन्हें याद करती हैं।

ड्यूटी के दौरान हजारों जवान हो चुके शहीद

आजादी से लेकर अब तक हजारों पुलिसकर्मी अपना बलिदान दे चुके हैं। ड्यूटी पर काम करते हुए हजारों पुलिसकर्मी शहीद हुए हैं। नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) के अनुसार 2020 से 2024 के बीच पांच सालों में ड्यूटी के दौरान 1,895 पुलिसकर्मी शहीद हुए हैं। सबसे ज्यादा 526 जवान 2020 में शहीद हुए थे। इसके बाद 2021 में 427 जवान शहीद हुए थे। वहीं, अगर राज्यों के हिसाब से देखा जाए तो 2024 में यूपी में सबसे ज्यादा 41 पुलिसकर्मी शहीद हुए थे। इसके बाद छत्तीसगढ़ और तमिलनाडु में 32-32, हरियाणा में 25, बिहार में 24 और पंजाब में 23 पुलिसकर्मी शहीद हुए थे।

संकेतात्मक फोटो
संकेतात्मक फोटो

यह दिन पुलिस शहीद दिवस के रूप में भी मनाया जाता

भारत के सभी पुलिस बलों में इस दिन को पुलिस शहीद दिवस के रूप में भी मनाया जाता है। यह दिन केवल 1959 की घटना तक ही सीमित नहीं है। यह लोगों को सीमा सुरक्षा से लेकर कानून व्यवस्था और आंतरिक सुरक्षा तक पुलिसकर्मियों द्वारा प्रतिदिन सामना किए जाने वाले खतरों की याद दिलाता है। आंकड़े इस बलिदान की महानता को दर्शाते हैं। स्वतंत्रता के बाद से लगभग 35,000 पुलिसकर्मियों ने देश और जनता की रक्षा करते हुए अपनी जान गंवाई है। यह दिन जनता को पुलिस बल और उनके परिवारों का सम्मान करने के लिए भी प्रेरित करता है।

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Anurag Chaturvedi

अनुराग चतुर्वेदी पिछले कई वर्षों से पत्रकारिता, लेखन और संपादन के क्षेत्र में निरंतर सक्रिय हैं। उन्होंने विभिन्न प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हुए खबरों को निष्पक्षता और गहराई के साथ जनता के सामने रखा है।

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