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इस तारीख को बढ़ सकती हैं राहुल गांधी की मुश्किलें? जानिए क्या है मामला… जिसपर आएगा फैसला

लखनऊ की MP-MLA कोर्ट में राहुल गांधी की कथित ब्रिटिश नागरिकता पर सुनवाई पूरी हो चुकी है और अब 28 जनवरी का फैसला उनकी सियासी राह तय कर सकता है

लखनऊ, 15 जनवरी 2026:

लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष और सांसद राहुल गांधी की मुश्किलें एक बार फिर बढ़ती नजर आ रही है। दरअसल कथित ब्रिटिश नागरिकता से जुड़े मामले में लखनऊ की विशेष MP-MLA कोर्ट ने बुधवार को सुनवाई पूरी की। विशेष न्यायाधीश एवं तृतीय अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट आलोक वर्मा की अदालत ने सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया। अब अदालत इस मामले में 28 जनवरी को अपना फैसला सुनाएगी।अगर निर्णय खिलाफ गया, तो यह मामला उनके लिए नई कानूनी और राजनीतिक चुनौती बन सकता है।

यह मामला पहले रायबरेली की विशेष MP-MLA अदालत में चल रहा था। बाद में इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ के आदेश पर इसे लखनऊ स्थानांतरित किया गया। ट्रांसफर के बाद इस केस को क्रिमिनल मिस केस के रूप में दोबारा दर्ज किया गया और इसे केस संख्या 31/2026 दी गई।

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मामले के याचिकाकर्ता एस विग्नेश शिशिर ने अदालत में स्वयं अपनी पैरवी की। लगातार आठ दिनों तक सुनवाई चली, जिसमें करीब 20 घंटे से अधिक समय तक बहस हुई। इस दौरान याचिकाकर्ता ने सुप्रीम कोर्ट के कई पुराने फैसलों, कानूनी मिसालों और विस्तृत तर्कों के जरिए अपना पक्ष अदालत के सामने रखा।

अदालत ने इस मामले से जुड़े 45 एनेक्सर, एक सीलबंद लिफाफा और करीब 310 पन्नों की विस्तृत पत्रावली को रिकॉर्ड पर लिया है। न्यायालय ने स्पष्ट किया कि इन सभी दस्तावेजों पर अंतिम निर्णय के समय विचार किया जाएगा।

याचिकाकर्ता ने अदालत से मांग की है कि राहुल गांधी के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की विभिन्न धाराओं के साथ आधिकारिक गोपनीयता अधिनियम 1923, पासपोर्ट अधिनियम 1967 और विदेशी अधिनियम 1946 के तहत FIR दर्ज करने का आदेश दिया जाए। उनका दावा है कि राहुल गांधी ब्रिटिश नागरिक हैं और उनकी भारतीय नागरिकता रद्द की जानी चाहिए। याचिकाकर्ता का कहना है कि उन्होंने ब्रिटेन सरकार से जुड़े कुछ ईमेल और दस्तावेज जुटाए हैं, जिन्हें अदालत में सबूत के तौर पर पेश किया गया है।

याचिकाकर्ता के अनुसार, इस मामले से जुड़े साक्ष्य पहले केंद्रीय गृह मंत्रालय और इलाहाबाद हाईकोर्ट के सामने भी रखे जा चुके हैं। उनका कहना है कि भारत सरकार ने इस विषय में ब्रिटेन सरकार से आधिकारिक स्तर पर संपर्क किया है, हालांकि अब तक वहां से कोई औपचारिक जवाब नहीं मिला है। याचिकाकर्ता ने यह भी दावा किया है कि कुछ गोपनीय दस्तावेज जांच के लिए सीबीआई को सौंपे गए हैं।

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