Uttarakhand

सचिव ने किसानों से की बात, बोले- हिमालयी क्षेत्र में रेनबो ट्राउट फार्मिंग की अपार संभावनाएं

देश भर में 34 मत्स्य पालन समूह अधिसूचित, पिथौरागढ़ कोल्ड वाटर फिशरीज के रूप में उभरा, हिमालयी राज्य आईटीबीपी व अन्य सशस्त्र बलों को ट्राउट की आपूर्ति करने के लिए समझौता ज्ञापन की संभावनाएं तलाशें

देहरादून, 20 अक्तूबर 2026ः

उत्तराखंड के पिथौरागढ़ स्थित कलेक्टरेट में केंद्रीय मत्स्य पालन विभाग के सचिव डॉ. अभिलक्ष लिखी ने पिथौरागढ़ शीतजल मत्स्य पालन समूह को लेकर समीक्षा बैठक की। सचिव ने भारत के हिमालयी क्षेत्र में शीतजल मात्स्यिकी के महत्व का उल्लेख किया, जहां रेनबो ट्राउट फार्मिंग के लिए अद्वितीय और अनुकूल परिस्थितियां हैं। केंद्र सरकार ने देश भर में 34 मत्स्य पालन समूह अधिसूचित किए हैं और पिथौरागढ़ में कोल्ड वाटर फिशरीज क्लस्टर (शीतजल मात्स्यिकी समूह) अधिसूचित किया गया है। सचिव ने ट्राउट मत्स्य पालकों के साथ बातचीत भी की।

मत्स्य पालन क्षेत्र की बताईं उपलब्धियां

बैठक में पिथौरागढ़ के जिला मजिस्ट्रेट आशीष कुमार भटगांई ने जिले के मत्स्य पालन क्षेत्र की उपलब्धियों और पहल पर प्रस्तुति दी। उन्होंने बाजार संपर्क मजबूत बनाने, ट्राउट के मूल्य संवर्धन को बढ़ावा देने और मत्स्य पालकों के लिए बेहतर मूल्य सुनिश्चित करने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने आश्वासन दिया कि जिला प्रशासन इन चुनौतियों का समाधान करने और इस क्षेत्र को और मजबूत बनाने के लिए मत्स्य पालन विभाग के साथ समन्वय से काम करेगा। राष्ट्रीय मत्स्य विकास बोर्ड के मुख्य कार्यकारी डॉ. बीके बेहेरा ने शीतजल मत्स्य पालन समूह कार्यक्रम पर एक विस्तृत प्रस्तुति में उत्पादन पूर्व और उत्पादन बाद के अंतर को रेखांकित करते हुए अगले पांच वर्षों की भविष्य योजना की रूपरेखा प्रस्तुत की।

शीतजल मात्स्यिकी में प्रौद्योगिकी के उपयोग का बताया महत्व

केंद्रीय मत्स्य पालन विभाग की संयुक्त सचिव गुंजन कृष्णा ने शीतजल मात्स्यिकी में प्रौद्योगिकी के उपयोग के महत्व का उल्लेख किया। उन्होंने मूल्य श्रृंखला अवसंरचना मजबूत करने की भी आवश्यकता बताई। केंद्रीय मत्स्य पालन सचिव ने अन्य हिमालयी राज्यों को सुझाव दिया कि वे केंद्रीय मत्स्य पालन विभाग के समन्वय से आईटीबीपी और अन्य सशस्त्र बलों को ट्राउट की आपूर्ति करने के लिए समझौता ज्ञापन की संभावनाएं तलाशें। आईटीबीपी के अपर महानिदेशक संजय कुमार गुंज्याल ने बताया कि सिक्किम और अरुणाचल प्रदेश जैसे उत्तर-पूर्वी राज्यों में आईटीबीपी को ट्राउट मछली की काफी आवश्यकता है।

ये भी पढ़ें:

ट्राउट किसानों ने उठाए कई प्रमुख मुद्दे

सचिव ने पिथौरागढ़ शीतजल मत्स्य पालन समूह पर बैठक के दौरान ट्राउट मत्स्य पालकों के साथ बातचीत की। ट्राउट किसानों ने उनके समक्ष ट्राउट मछली के लिए बेहतर मूल्य, प्रशिक्षण व क्षमता विकास और उचित दरों पर गुणवत्तापूर्ण चारे की उपलब्धता संबंधी प्रमुख मुद्दे उठाए। एक महिला मछली पालक रेखा जोशी ने अपनी सफलता की कहानी साझा करते हुए बताया कि उन्होंने उच्च कीमत के मछली उत्पाद जैसे फिश बॉल्स, फिश फिंगर्स और फिश मोमोज बनाना शुरू किया है, जिससे लगभग 5,000 रुपये की दैनिक बिक्री होती है। मुनस्यारी के एक अन्य ट्राउट किसान ने कहा कि चारे और उच्च परिवहन लागत को देखते हुए भारत-तिब्बत सीमा पुलिस को आपूर्ति की जाने वाली ट्राउट की दरें काफी कम हैं।

Advertisement

हिमालयी राज्यों में ट्राउट फार्मिंग मजबूत करने पर चर्चा

डॉ. अभिलक्ष लिखी ने सभी हिमालयी राज्यों में ट्राउट फार्मिंग मजबूत बनाने की भविष्य योजना पर चर्चा की। विचार-विमर्श ट्राउट बीज की उपलब्धता, चारे की आपूर्ति, उत्पादकता और शीत भंडारण अवसंरचना से संबंधित चुनौतियों का समाधान करने के साथ ही वैज्ञानिक सहायता, बाजार संपर्कों और मात्स्यिकी मूल्य श्रृंखला मजबूत करने पर केंद्रित रही। उन्होंने राष्ट्रीय मत्स्य विकास बोर्ड को उचित तत्परता के साथ उत्पादन पूर्व, उत्पादन के दौरान और उत्पादन बाद की भविष्य आवश्यकताएं वाली विभिन्न परियोजनाओं की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट प्रस्तुत करने का भी सुझाव दिया।

उद्यमियों की अधिक भागीदारी की आवश्यकता पर जोर

उन्होंने शीतजल मत्स्य पालन समूह में स्टार्टअप्स और उद्यमियों की अधिक भागीदारी प्रोत्साहित करने की आवश्यकता पर भी बल दिया। उन्होंने ट्राउट के परिवहन और निर्यात को सुगम बनाने के लिए हवाई अड्डों और रेलवे स्टेशनों के पास शीत भंडारण केंद्र स्थापित करने सहित शीत भंडारण अवसंरचना मजबूत बनाने के महत्व की चर्चा की। उन्होंने शीतजल मात्स्यिकी समूह को सुदृढ़ बनाने के लिए सरकार के समग्र दृष्टिकोण और सहकारी-नेतृत्व वाले मॉडल के समर्थन से व अन्य हिमालयी राज्यों से ट्राउट की खरीद बढ़ाने के लिए आईटीबीपी सहित अन्य सशस्त्र बलों के साथ सहयोग की आवश्यकता पर भी जोर दिया।

घरेलू व अंतर्राष्ट्रीय बाजारों तक पहुंच बढ़ाने की कही बात

समुद्री उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (एमपीईडीए) के अध्यक्ष पी. जवाहर ने ट्राउट किसानों के तकनीकी कौशल मजबूत करने और निर्यात तैयारी में सुधार के लिए उनके प्रशिक्षण व क्षमता विकास के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने उत्पाद गुणवत्ता, प्रतिस्पर्धात्मकता व घरेलू और अंतर्राष्ट्रीय बाजारों तक पहुंच बढ़ाने के लिए उत्पाद बाद प्रबंधन, गुणवत्ता आश्वासन, प्रसंस्करण और मूल्य संवर्धन में सर्वोत्तम प्रथाओं को बढ़ावा देने की आवश्यकता का उल्लेख किया। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के उप महानिदेशक (मत्स्य विज्ञान) डॉ. जेके जेना ने ट्राउट मछली क्लस्टर के विकास के लिए आईसीएआर के अनुसंधान और तकनीकी सहायता को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि इसमें वैज्ञानिक जलीय कृषि प्रथाओं को बढ़ावा देने, तकनीकी क्षमता सुदृढ़ बनाने और शीतजल मात्स्यिकी के सतत विकास पर ध्यान केंद्रित किया जा रहा है।

ये भी पढ़ें  चारधाम यात्रा 2026 में बडा बदलाव... मंदिर परिसरों में मोबाइल और कैमरे पर पूरी तरह रोक, दिए गए ये सख्त निर्देश

Anurag Chaturvedi

अनुराग चतुर्वेदी पिछले कई वर्षों से पत्रकारिता, लेखन और संपादन के क्षेत्र में निरंतर सक्रिय हैं। उन्होंने विभिन्न प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हुए खबरों को निष्पक्षता और गहराई के साथ जनता के सामने रखा है।

प्रातिक्रिया दे

आपका ईमेल पता प्रकाशित नहीं किया जाएगा. आवश्यक फ़ील्ड चिह्नित हैं *

Back to top button
Secret Link