रिटायर्ड IAS अफसर योगेश कुमार अरेस्ट : 12 वर्ष पुराने भर्ती घोटाले में बड़ा एक्शन, 1198 पदों की भर्ती पर फिर उठे सवाल
अखिलेश यादव की सरकार के कार्यकाल में हुई पशुधन प्रसार अधिकारी भर्ती में अनियमितताओं के आरोप, तत्कालीन प्रमुख सचिव की भूमिका की जांच में EOW की कार्रवाई, पूर्व मंत्री राजकिशोर सिंह के खिलाफ अभियोजन स्वीकृति की फाइल शासन में लंबित

लखनऊ, 14 अक्टूबर 2026:
यूपी में करीब 12 साल पुराने पशुधन प्रसार अधिकारी भर्ती घोटाले में आर्थिक अपराध शाखा (EOW) ने बड़ी कार्रवाई की है। जांच एजेंसी ने बुधवार को लखनऊ के गोमती नगर से तत्कालीन प्रमुख सचिव एवं सेवानिवृत्त IAS अधिकारी योगेश कुमार को गिरफ्तार कर लिया। वर्ष 2014 में समाजवादी पार्टी सरकार के कार्यकाल में हुई इस भर्ती में कथित अनियमितताओं को लेकर लंबे समय से जांच चल रही थी।
1198 पदों की भर्ती में गड़बड़ी के आरोप
वर्ष 2014 में प्रदेश के पशुपालन विभाग में पशुधन प्रसार अधिकारी के 1198 पदों पर भर्ती प्रक्रिया शुरू की गई थी। इसके तहत 2 फरवरी 2014 को प्रदेश के 17 मंडलों में परीक्षा आयोजित हुई थी। भर्ती प्रक्रिया पूरी होने के बाद चयन में बड़े पैमाने पर अनियमितताओं के आरोप सामने आए। मामले की जांच में चयन प्रक्रिया के निर्धारित नियमों की अनदेखी किए जाने की बात सामने आई।
जांच के दौरान OMR शीट की जांच एक ही स्थान पर कराए जाने और चयन करने वाली जिला एवं मंडल स्तरीय समितियों के अधिकार समाप्त किए जाने जैसे बिंदु सामने आए। इन व्यवस्थाओं को लेकर सवाल उठे कि क्या इनके जरिए अंकों में हेरफेर और चयन प्रक्रिया को प्रभावित करने की गुंजाइश बनाई गई थी।
भर्ती के समय प्रमुख सचिव थे योगेश कुमार
भर्ती के दौरान योगेश कुमार पशुपालन विभाग के प्रमुख सचिव थे। इसी प्रशासनिक भूमिका के चलते जांच एजेंसी उनकी कथित भूमिका की पड़ताल कर रही थी। जानकारी के मुताबिक वर्ष 2017 में मामले से संबंधित रिपोर्ट सौंपी गई थी। अब EOW ने उनकी गिरफ्तारी कर जांच को अहम मोड़ दिया है।
पूर्व मंत्री के खिलाफ अभियोजन की मंजूरी पर भी नजर
उस समय राजकिशोर सिंह पशुपालन मंत्री थे। भर्ती में कथित अनियमितताओं के मामले में उनके खिलाफ अभियोजन स्वीकृति की फाइल फिलहाल शासन में लंबित बताई जा रही है। ऐसे में अब योगेश कुमार की गिरफ्तारी के बाद मामले में आगे की कार्रवाई पर नजर रहेगी। करीब 12 साल पुराने इस मामले में EOW की कार्रवाई ने भर्ती प्रक्रिया की पारदर्शिता और जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका को एक बार फिर चर्चा में ला दिया है। हालांकि, आरोपों की अंतिम पुष्टि न्यायिक प्रक्रिया के तहत ही होगी।






