लखनऊ, 9 अप्रैल 2026:
यूपी में लगातार बढ़ते सड़क हादसों को लेकर पुलिस मुख्यालय ने सख्त रुख अपनाया है। जीरो फेटलिटी डिस्ट्रिक्ट (जेडएफडी) योजना के क्रियान्वयन में लापरवाही बरतने पर प्रदेश के छह थाना प्रभारियों को लाइन हाजिर कर दिया गया है। इसके साथ ही दो सीओ ट्रैफिक के खिलाफ जांच के आदेश दिए गए हैं।
डीजीपी राजीव कृष्ण के निर्देश पर की गई इस कार्रवाई से पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया है। मुख्यालय द्वारा चयनित 487 थानों की समीक्षा में पाया गया कि 46 थानों में सड़क हादसों की संख्या बढ़ी है। इनमें छह थाने ऐसे रहे जहां दुर्घटनाएं तेजी से बढ़ीं।
कार्रवाई के तहत वाराणसी के चोलापुर थाना प्रभारी दीपक कुमार, गोरखपुर के कैम्पियरगंज थाना प्रभारी जितेंद्र सिंह, कन्नौज के छिबरामऊ थाना प्रभारी विष्णुकांत तिवारी, बाराबंकी के रामसनेहीघाट थाना प्रभारी जगदीश प्रसाद शुक्ला, अलीगढ़ के जवां थाना प्रभारी धीरज यादव और जौनपुर के सिकरारा थाना प्रभारी उदय प्रताप सिंह को लाइन हाजिर किया गया है।
वहीं, बाराबंकी के सीओ ट्रैफिक आलोक कुमार पाठक और जौनपुर के सीओ ट्रैफिक गिरेंद्र कुमार सिंह के खिलाफ लापरवाही के आरोप में जांच के आदेश दिए गए हैं। डीजीपी ने सभी पुलिस कमिश्नर, एडीजी जोन, आईजी रेंज और जिलों के पुलिस कप्तानों के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग कर कानून-व्यवस्था और ट्रैफिक प्रबंधन की समीक्षा की। उन्होंने आगामी पर्वों को देखते हुए सुरक्षा व्यवस्था चाक-चौबंद रखने के निर्देश दिए।
डीजीपी ने स्पष्ट किया कि सामान्य अपराधों की विवेचना 60 दिन और गंभीर मामलों की 90 दिन में पूरी कर अदालत में आरोपपत्र दाखिल किया जाए। इसके साथ ही न्यायालय परिसरों की सुरक्षा, प्रवेश द्वारों पर कड़ी जांच, सीसीटीवी निगरानी और आपातकालीन प्रतिक्रिया तंत्र को मजबूत करने पर जोर दिया।
उन्होंने ‘ई-साक्ष्य’ प्रणाली के प्रभावी उपयोग के लिए सभी विवेचकों को प्रशिक्षण देने के निर्देश भी दिए। लखनऊ कमिश्नरेट के डीसीपी साउथ अमित कुमार आनंद ने इस दौरान ई-साक्ष्य के तकनीकी पहलुओं पर प्रस्तुतीकरण दिया। डीजीपी ने कहा कि जन शिकायतों के निस्तारण में सुधार हुआ है लेकिन कुछ जिलों में अभी और सुधार की जरूरत है।






