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6 बार गिरफ्तारी, बम से हमला और फिर सर्वोच्च सत्ता… जानिए ईरान के सुप्रीम लीडर खामेनेई का सफर

ईरान के मशहद शहर में एक साधारण मौलवी परिवार में हुआ जन्म, महज 11 वर्ष की उम्र में मौलवी की उपाधि प्राप्त की, 1960 के दशक में ईरान के शाह की तानाशाही के खिलाफ खुलकर विरोध किया, 1979 की इस्लामी क्रांति के बाद वे नई सरकार के मजबूत स्तंभों में उभरे

न्यूज डेस्क, 1 मार्च 2026:

लंबे समय तक ईरानी सत्ता के सर्वाधिक प्रभावशाली नेता और शिया राजनीति के प्रमुख चेहरे अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत हो चुकी है। 86 वर्षीय खामेनेई के निधन ने मध्य पूर्व के राजनीतिक संतुलन को हिला दिया है। पिछले 37 सालों से ईरान की सर्वोच्च सत्ता पर काबिज खामेनेई की मौत के साथ ही एक युग का अंत माना जा रहा है।

अयातुल्ला अली खामेनेई का जन्म 19 अप्रैल 1939 को ईरान के मशहद शहर में एक साधारण मौलवी परिवार में हुआ था। उन्होंने बचपन से ही मजहबी शिक्षा ग्रहण करनी शुरू कर दी और 1950 के दशक में वे कुम आए, जहां महज 11 वर्ष की उम्र में उन्होंने मौलवी की उपाधि प्राप्त की। कुम में ही उनकी मुलाकात इस्लामी क्रांति के जनक अयातुल्ला रुहुल्लाह खुमैनी से हुई जिनका प्रभाव उनके जीवन और विचारों पर हमेशा के लिए छा गया।

1960 के दशक में ईरान के शाह की तानाशाही के खिलाफ खामेनेई ने खुलकर विरोध किया, जिसकी वजह से उन्हें छह बार गिरफ्तार और कैद भी होना पड़ा। 1979 की इस्लामी क्रांति के बाद वे नई सरकार के मजबूत स्तंभों में उभरे और 1981 में एक बम हमले में गंभीर रूप से घायल हुए जिससे उनका दाहिना हाथ हमेशा के लिए पैरालाइज हो गया। इसके बाद उन्हें उप-रक्षा मंत्री बनाया गया। इसी दौरान उन्होंने इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर (IRGC) की स्थापना की जो आज ईरान की सबसे शक्तिशाली सैन्य संस्था है।

Khamenei's Secret Meeting Becomes His Last Act

1981 में ही खामेनेई को ईरान का राष्ट्रपति बनाया गया, और उन्होंने लगभग आठ वर्षों तक इस पद पर रहकर देश को इराक-इरान युद्ध जैसे कठिन दौर से निकाला। 1989 में अयातुल्ला रुहुल्लाह खुमैनी के निधन के बाद उन्हें ईरान का नया सुप्रीम लीडर घोषित किया गया। इसके बाद उन्होंने ईरान के परमाणु कार्यक्रम को तीव्रता से आगे बढ़ाया। इससे अमेरिका और इजरायल के साथ संबंध और अधिक तनावपूर्ण हो गए।

खामेनेई की कट्टर नीतियों और दृढ़ नेतृत्व ने उन्हें घरेलू और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विवादास्पद लेकिन अत्यंत प्रभावशाली व्यक्तित्व बनाया। उनके निधन के बाद अब सबसे बड़ा प्रश्न यह है कि सुप्रीम लीडर कौन होगा। ईरानी मीडिया और राजनीतिक गलियारों में उनके बेटे मोजतबा खामेनेई और संस्थापक खुमैनी के पोते हसन खुमैनी के नाम प्रमुख चर्चा में हैं।

ईरान के नए सुप्रीम लीडर का चयन विशेषज्ञों की परिषद के जरिए किया जाएगा, जिसमें IRGC का निर्णायक प्रभाव माना जाता है। खामेनेई की मौत से उत्पन्न ऐतिहासिक वैक्यूम और भविष्य की नीति दिशा पर अब वैश्विक नजरें टिकी हैं।

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