लखनऊ, 6 फरवरी 2026
डिजिटल दौर में पली-बढ़ी अल्फा जनरेशन को भारतीय कला, संस्कृति और विरासत से जोड़ने के लिए संस्कृति विभाग की ओर से एक खास पहल की गई। राज्य संग्रहालय, लखनऊ में निजी विद्यालयों की कक्षा एक तक के करीब 700 बच्चों और उनके शिक्षकों के लिए शैक्षिक भ्रमण का आयोजन किया गया। इस दौरान संग्रहालय बच्चों के लिए एक लर्निंग लैब में तब्दील नजर आया।
बता दें कि राजधानी स्थित राज्य संग्रहालय प्रदेश का सबसे पुराना और प्रतिष्ठित बहुउद्देशीय संग्रहालय है, जहां पुरातत्व, प्राकृतिक इतिहास, सजावटी कला, चित्रकला और मुद्राशास्त्र से जुड़ी बहुमूल्य धरोहरें सुरक्षित हैं। आज के शैक्षिक भ्रमण कार्यक्रम का मकसद बच्चों को कम उम्र से ही अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ना और उनमें जिज्ञासा, रचनात्मकता और सीखने की ललक पैदा करना रहा। भ्रमण के दौरान बच्चों को संग्रहालय में मौजूद कलाकृतियों, प्राचीन धरोहरों और भारतीय इतिहास से परिचित कराया गया। उन्हें समझाया गया कि यह विरासत सिर्फ देखने की चीज नहीं, बल्कि जानने और महसूस करने का जरिया है।
खेल के साथ ज्ञान, क्विज ने बढ़ाई रुचि
बच्चों के लिए गतिविधि आधारित एक्टिविटी कार्ड के जरिए रोचक क्विज प्रतियोगिता भी कराई गई। सवाल-जवाब और छोटे-छोटे खेलों के जरिए बच्चों ने भारतीय संस्कृति और इतिहास से जुड़ी बातें आसान ढंग से सीखीं। कार्यक्रम के अंत में सभी बच्चों को सूक्ष्म जलपान, पेंसिल, स्केच पेन और सहभागिता प्रमाण पत्र दिए गए।
बचपन से संस्कार, तभी मजबूत भविष्य
पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि अल्फा जनरेशन को अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ना सरकार की प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि आज के बच्चे तकनीक के साथ सहज हैं, लेकिन उन्हें अपनी विरासत से जोड़ना भी उतना ही जरूरी है। संग्रहालय बच्चों में गर्व, जिम्मेदारी और समाज के प्रति समझ विकसित करने का सशक्त माध्यम बन सकते हैं। शुरुआती उम्र में मिले संस्कार ही आगे चलकर जिम्मेदार नागरिक गढ़ते हैं।
संग्रहालय सिर्फ इमारत नहीं, सीखने का मंच
उत्तर प्रदेश संग्रहालय निदेशालय की निदेशक सृष्टि धवन ने कहा कि बच्चों को कम उम्र में ही भारतीय कला और संस्कृति से जोड़ना समय की जरूरत है। उन्होंने बताया कि संग्रहालय केवल पुरानी चीजें देखने की जगह नहीं, बल्कि सीखने, समझने और सोचने का जीवंत मंच है। ऐसे कार्यक्रम बच्चों की कल्पनाशक्ति और वैज्ञानिक सोच को भी मजबूत करते हैं। आगे भी विद्यार्थियों के लिए इसी तरह के नवाचारी कार्यक्रम लगातार आयोजित किए जाएंगे। कार्यक्रम में सहायक निदेशक मीनाक्षी खेमका सहित संग्रहालय के अधिकारी और कर्मचारी मौजूद रहे, जिन्होंने बच्चों को सरल भाषा में इतिहास और कला की जानकारी दी।






