लखनऊ, 30 मार्च 2026:
शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) की अनिवार्यता के विरोध में उत्तर प्रदेश के सरकारी शिक्षक अब आरपार की लड़ाई के मूड में नजर आ रहे हैं। 4 अप्रैल को नई दिल्ली में प्रस्तावित टीचर्स फेडरेशन ऑफ इंडिया की महारैली को सफल बनाने के लिए सोमवार को लखनऊ के शिक्षक भवन रिसालदार पार्क में एक उच्च स्तरीय बैठक आयोजित की गई। इस बैठक में आंदोलन की रणनीति तय की गई और जिलेभर के शिक्षकों से बड़ी संख्या में दिल्ली पहुंचने का आह्वान किया गया।
बैठक में मुख्य अतिथि एवं पर्यवेक्षक सुधांशु मोहन ने कहा कि सरकार द्वारा थोपी गई टीईटी अनिवार्यता अनुभवी शिक्षकों के स्वाभिमान पर सीधा प्रहार है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि दशकों से शिक्षा का दीप जलाने वाले शिक्षकों को अब पात्रता की कसौटी पर कसना अन्यायपूर्ण है। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि शिक्षक इस काले कानून को वापस कराकर ही दम लेंगे और 4 अप्रैल को दिल्ली की सड़कों पर अपनी एकजुटता का प्रदर्शन करेंगे।

जिला कोषाध्यक्ष फहीम बेग ने भी आंदोलन को निर्णायक बताते हुए कहा कि जब तक शिक्षकों की मांगें पूरी नहीं होतीं तब तक यह संघर्ष जारी रहेगा। जिला मंत्री वीरेंद्र सिंह ने टीईटी अनिवार्यता को शिक्षकों के भविष्य के साथ खिलवाड़ बताते हुए कहा कि यह एक सोची-समझी साजिश है। इसे शिक्षक एकजुट होकर विफल करेंगे। उन्होंने जोर देकर कहा कि शिक्षकों का अनुभव और वरिष्ठता ही उनकी वास्तविक पात्रता है न कि कागजी परीक्षाएं।
बैठक में सभी ब्लॉक स्तर के पदाधिकारियों ने एक स्वर में संकल्प लिया कि जिले के हर कोने से शिक्षक दिल्ली कूच करेंगे। अंत में पदाधिकारियों और शिक्षकों ने आंदोलन को सफल बनाने की शपथ ली। इस दौरान मलिहाबाद अध्यक्ष अवधेश कुमार, काकोरी अध्यक्ष अजय कुमार, प्रदीप सिंह, गोसाईगंज अध्यक्ष योगेंद्र सिंह यादव, नगर अध्यक्ष संदीप सिंह, मंत्री अभय प्रकाश, मोहनलालगंज अध्यक्ष आलोक शुक्ला, चिनहट अध्यक्ष विजय कुमार, गोसाईगंज मंत्री अतीश कुमार, मोहनलालगंज मंत्री राम शंकर शुक्ला, सरोजनीनगर मंत्री धीरेंद्र कुमार, काकोरी मंत्री महेंद्र कुमार सहित तमाम शिक्षक उपस्थित रहे।






