लखनऊ, 3 मार्च 2026:
यूपी में कृषि क्षेत्र अब परंपरागत ढांचे से निकलकर आधुनिक तकनीक और नवाचार की ओर तेजी से बढ़ रहा है। प्रदेश में इस समय 156 पंजीकृत कृषि स्टार्टअप सक्रिय हैं। ये किसानों को क्रेडिट सुविधा, डिजिटल समाधान और विशेषज्ञ सलाह उपलब्ध करा रहे हैं। इन पहलों ने खेती को लाभकारी और टिकाऊ बनाने की दिशा में ठोस आधार तैयार किया है।
योगी सरकार के कार्यकाल में कृषि को तकनीक आधारित मॉडल से जोड़ने पर विशेष जोर दिया गया है। स्टार्टअप्स के माध्यम से किसानों को समय पर ऋण उपलब्ध हो रहा है। इससे उनकी पारंपरिक साहूकारी व्यवस्था पर निर्भरता कम हुई है। पारदर्शी वित्तीय सेवाओं के साथ-साथ फसल प्रबंधन, बाजार संपर्क और मूल्य संबंधी जानकारी भी अब डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए सुलभ हो गई है।
कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि मोबाइल एप, कॉल सेंटर और ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से मौसम पूर्वानुमान, बीज चयन, उर्वरक उपयोग और रोग नियंत्रण संबंधी जानकारी सीधे किसानों तक पहुंच रही है। इससे न केवल उत्पादन लागत में कमी आने की संभावना है बल्कि उत्पादकता में वृद्धि भी संभव हो रही है। छोटे और सीमांत किसानों को इसका विशेष लाभ मिल रहा है।
प्रदेश सरकार की स्टार्टअप नीति, निवेश प्रोत्साहन योजनाएं और कौशल विकास कार्यक्रमों ने युवाओं को कृषि उद्यमिता की ओर आकर्षित किया है। ग्रामीण क्षेत्रों में स्वरोजगार के अवसर बढ़े हैं और खेती को आधुनिक व्यवसाय के रूप में स्थापित करने की दिशा में सकारात्मक बदलाव दिख रहा है।
सरकार की दीर्घकालिक रणनीति प्रदेश को एग्री इनोवेशन का प्रमुख केंद्र बनाने की है। जानकारों का कहना है कि यदि क्रेडिट, बाजार संपर्क और तकनीकी परामर्श की यह श्रृंखला इसी तरह सुदृढ़ होती रही तो उत्तर प्रदेश देश की कृषि अर्थव्यवस्था में अग्रणी भूमिका निभा सकता है। किसानों की आय बढ़ाने, जोखिम कम करने और गांवों को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में 156 कृषि स्टार्टअप्स की सक्रिय भागीदारी को एक बड़े परिवर्तन की नींव माना जा रहा है।






