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UP में बिछने लगी 2027 की बिसात: माधौगढ़ से ब्राह्मण कार्ड, मायावती का सोशल इंजीनियरिंग दांव

जालौन की माधौगढ़ विधानसभा सीट पर क्षेत्र के व्यापारी आशीष पांडेय को नियुक्त किया गया प्रभारी, बसपा की परंपरा के मुताबिक क्षेत्र प्रभारी बनता रहा है प्रत्याशी

लखनऊ, 25 फरवरी 2026:

यूपी की सियासत में 2027 विधानसभा चुनाव की सरगर्मी तेज होने लगी है। इसी कड़ी में बहुजन समाज पार्टी ने अपनी चुनावी रणनीति को धार देते हुए बुंदेलखंड से बड़ा संकेत दिया है। पार्टी सुप्रीमो मायावती ने जालौन की माधौगढ़ विधानसभा सीट पर ब्राह्मण चेहरे को आगे कर सोशल इंजीनियरिंग का दांव खेला है। पार्टी ने कुरौली क्षेत्र के व्यापारी आशीष पांडेय को प्रभारी नियुक्त किया है। इसे बसपा की परंपरा के मुताबिक संभावित उम्मीदवार के रूप में देखा जा रहा है।

जालौन में हुई संगठनात्मक बैठक और कार्यकर्ता सम्मेलन में बुंदेलखंड प्रभारी लालाराम अहिरवार ने आशीष पांडेय के नाम की आधिकारिक घोषणा की। इस मौके पर पांडेय ने पार्टी नेतृत्व का आभार जताते हुए क्षेत्र में संगठन विस्तार और बूथ स्तर पर तैयारी तेज करने का भरोसा दिलाया। बसपा का फोकस चुनाव से काफी पहले प्रभारियों की घोषणा कर जमीनी पकड़ मजबूत करना और उम्मीदवारों को पर्याप्त समय देना है।

राजनीतिक जानकार मानते हैं कि माधौगढ़ जैसी सीट पर ब्राह्मण चेहरे को आगे कर बसपा दलित-ब्राह्मण समीकरण को फिर से धार देना चाहती है। यही सामाजिक संतुलन 2007 में पार्टी की सत्ता में वापसी की मजबूत नींव बना था। बुंदेलखंड में पिछले कुछ चुनावों में भाजपा का दबदबा रहा है जबकि सपा भी यहां अपनी पकड़ मजबूत करने की कोशिश में है। ऐसे में बसपा का यह कदम मुकाबले को त्रिकोणीय और रोचक बना सकता है।

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पार्टी सूत्रों के मुताबिक होली के बाद कानपुर मंडल की पांच अन्य विधानसभा सीटों पर भी प्रभारियों के नाम सामने आ सकते हैं। रणनीति यह है कि हर क्षेत्र में स्थानीय सामाजिक समीकरण को ध्यान में रखकर चेहरे उतारे जाएं। कहीं ब्राह्मण, कहीं अन्य पिछड़ा वर्ग, तो कहीं दलित नेतृत्व को आगे लाया जाए। अक्टूबर में लखनऊ में हुई महारैली के बाद संगठन में आई सक्रियता को बसपा अब चुनावी तैयारी में बदलना चाहती है।

2027 के लिए बसपा ने बुंदेलखंड से सियासी शतरंज की पहली चाल चल दी है। इसके साथ ही यह चर्चा भी शुरू हो गई कि क्या मायावती का पुराना सोशल इंजीनियरिंग फॉर्मूला नए सियासी हालात में फिर से कमाल दिखा पाएगा? आने वाले महीनों में होने वाली घोषणाएं इस रणनीति की दिशा और असर दोनों को और साफ करेंगी।

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