Lucknow CityUttar Pradesh

पालि साहित्य से वैश्विक शांति का संदेश: अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन में गूंजे समानता व बंधुत्व के स्वर

मेरठ में आयोजित 17वें अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन में देश-विदेश के विद्वानों ने किया मंथन, पालि परंपराओं को बताया सामाजिक समरसता की आधारशिला

लखनऊ/मेरठ, 1 अप्रैल 2026:

पालि दिवस के अवसर पर मेरठ स्थित स्वामी विवेकानन्द सुभारती विश्वविद्यालय में आयोजित 17वें अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन ने ज्ञान, संस्कृति और आध्यात्मिक चिंतन को एक साझा मंच पर जीवंत रूप में प्रस्तुत किया। पालि साहित्य में समानता और बंधुत्व विषय पर केंद्रित इस भव्य आयोजन में देश-विदेश के विद्वानों, शोधकर्ताओं और बौद्ध अध्ययन के विशेषज्ञों ने भाग लेकर गहन विचार-विमर्श किया।

पालि सोसाइटी ऑफ इंडिया और तथागत बुद्ध चेयर के संयुक्त तत्वावधान में अंतर्राष्ट्रीय बौद्ध शोध संस्थान के सहयोग से आयोजित यह सम्मेलन बौद्धिक और सांस्कृतिक संवाद का प्रभावशाली केंद्र बनकर उभरा। कार्यक्रम के मुख्य वक्ता भदंत डॉ. तेजवरो महाथेरो ने अपने उद्बोधन में कहा कि पालि परंपराएं केवल अतीत की धरोहर नहीं हैं बल्कि वे आज भी वैश्विक शांति, समानता और भाईचारे का मजबूत आधार प्रस्तुत करती हैं।

विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. प्रमोद कुमार शर्मा ने पालि साहित्य की समकालीन प्रासंगिकता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि यह साहित्य सामाजिक समरसता को सुदृढ़ करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। वहीं, मुख्य अतिथि रवींद्र पंथ की उपस्थिति ने कार्यक्रम की गरिमा को और बढ़ाया।

ये भी पढ़ें:

WhatsApp Image 2026-04-01 at 4.14.13 PM

सम्मेलन के अकादमिक सत्र में विभिन्न विषयों पर शोध पत्र प्रस्तुत किए गए। इनमें बौद्ध समाजशास्त्र और सामाजिक न्याय, संघ के भीतर सांप्रदायिक सद्भाव, तथा पालि साहित्य में निहित नैतिक मूल्यों पर गंभीर चर्चा हुई। विद्वानों ने इस बात पर जोर दिया कि पालि साहित्य न केवल ऐतिहासिक महत्व रखता है, बल्कि वर्तमान समाज को भी दिशा देने की क्षमता रखता है।

समापन सत्र में वक्ताओं ने एक स्वर में कहा कि पालि साहित्य के माध्यम से समानता और बंधुत्व का संदेश जन-जन तक पहुंचाना आज की आवश्यकता है। विशेषज्ञों ने ऐसे अंतर्राष्ट्रीय मंचों को सांस्कृतिक संवाद और शोध सहयोग के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण बताया।

पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा कि पालि साहित्य हमारी सांस्कृतिक चेतना का आधार है। यह समाज को शांति, समानता और भाईचारे की राह दिखाता है। उन्होंने जोर दिया कि इस समृद्ध ज्ञान परंपरा को नई पीढ़ी तक पहुंचाना हम सभी की जिम्मेदारी है।

READ MORE 

ये भी पढ़ें  लखनऊ : गुरु नानक देव जी के प्रकाश पर्व से पूर्व निकली भव्य नगर कीर्तन यात्रा, दिखा श्रद्धा व भक्ति का संगम

प्रातिक्रिया दे

आपका ईमेल पता प्रकाशित नहीं किया जाएगा. आवश्यक फ़ील्ड चिह्नित हैं *

Back to top button