Uttarakhand

देवभूमि में यूसीसी का पहला जश्न, धामी ने कहा… यह दिन इतिहास में दर्ज होगा

गढ़ी कैंट में हुआ समारोह, समान नागरिक संहिता दिवस पर बोले मुख्यमंत्री, घोषणा से जमीन तक उतरा कानून

देहरादून, 27 जनवरी 2026:

उत्तराखंड में पहली बार समान नागरिक संहिता (यूसीसी) दिवस मनाया गया। हिमालयन कल्चरल सेंटर गढ़ी कैंट में आयोजित कार्यक्रम में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि यह दिन राज्य के इतिहास में एक अहम पड़ाव के तौर पर दर्ज रहेगा। उन्होंने कहा कि समान नागरिक संहिता के लागू होने से समाज में बराबरी, इंसाफ और संवैधानिक मूल्यों को मजबूती मिली है।

कार्यक्रम में यूसीसी तैयार करने वाली समिति के सदस्यों, इसके क्रियान्वयन में जुटे अधिकारियों और पंजीकरण में अहम भूमिका निभाने वाले वीएलसी को सम्मानित किया गया। मुख्यमंत्री ने यूसीसी से जुड़ी फोटो प्रदर्शनी का भी अवलोकन किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि सनातन परंपरा हमेशा से समरसता और समानता की राह दिखाती रही है। गीता के संदेश का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि हमारी संस्कृति किसी से भेदभाव नहीं सिखाती, बल्कि सबको बराबर मानती है।

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संविधान के संकल्प को किया साकार

मुख्यमंत्री ने कहा कि समान नागरिक संहिता संविधान के नीति निदेशक सिद्धांतों में शामिल है। उन्होंने बताया कि 2022 के विधानसभा चुनाव से पहले इसे लागू करने का संकल्प लिया गया था। सत्ता में लौटने के बाद पहले दिन से ही इस दिशा में काम शुरू हुआ। फरवरी 2024 में विधेयक विधानसभा से पारित हुआ, मार्च में राष्ट्रपति की मंजूरी मिली और 27 जनवरी 2025 को इसे राज्य में लागू कर दिया गया।

महिलाओं को मिला नया हौसला

मुख्यमंत्री ने कहा कि अलग-अलग व्यक्तिगत कानूनों की वजह से समाज में असमानता बनी हुई थी। यूसीसी लागू होने से सभी नागरिकों को बराबर अधिकार मिले हैं और महिलाओं के सशक्तिकरण की नई शुरुआत हुई है। उन्होंने कहा कि मुस्लिम महिलाओं को हलाला, बहुविवाह, इद्दत और तीन तलाक जैसी कुरीतियों से निजात मिली है। कानून लागू होने के बाद राज्य में हलाला और बहुविवाह का कोई मामला सामने नहीं आया।

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कानून का मकसद टकराव नहीं, समरसता

मुख्यमंत्री ने साफ कहा कि समान नागरिक संहिता किसी धर्म के खिलाफ नहीं है। इसका मकसद समाज में फैली कुप्रथाओं को खत्म करना है। विवाह, तलाक, उत्तराधिकार और संपत्ति बंटवारे से जुड़े नियम सभी के लिए एक जैसे किए गए हैं। बच्चों के अधिकारों में कोई फर्क नहीं रखा गया है। मृत्यु के बाद संपत्ति पर पत्नी, बच्चों और माता-पिता को बराबर हक दिया गया है। लिव-इन संबंधों के पंजीकरण को युवाओं की सुरक्षा से जोड़ा गया है। इस दौरान जन्म लेने वाले बच्चों को जैविक संतान के समान सभी अधिकार दिए गए हैं।

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घोषणा नहीं, असरदार अमल

मुख्यमंत्री ने कहा कि बीते एक साल में यूसीसी के जरिए सरकारी सेवाओं को आम लोगों तक आसान और पारदर्शी बनाया गया है। पहले जहां औसतन 67 विवाह पंजीकरण होते थे, अब यह संख्या रोजाना 1400 से ज्यादा हो गई है। राज्य में पांच लाख से अधिक आवेदन मिले हैं, जिनमें से अधिकांश का निस्तारण हो चुका है। मुख्यमंत्री ने कहा कि मजबूत फैसले देश को जोड़ते हैं, तोड़ते नहीं। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड में लागू हुई समान नागरिक संहिता देश के दूसरे राज्यों को भी इस दिशा में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करेगी।

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