अयोध्या, 19 मार्च 2026:
नव संवत्सर (विक्रम संवत 2083) के शुभारंभ व चैत्र नवरात्रि के पहले दिन राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने अयोध्या के राम जन्मभूमि मंदिर के द्वितीय तल पर राम यंत्र की स्थापना की। उन्होंने रामलला व दुर्गा माता के दर्शन-पूजन किए। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि प्रभु श्रीराम को नमन करना और भारत माता का वंदन करना एक जैसा है। वहीं सीएम योगी आदित्यनाथ ने कार्यक्रम को राम जन्मभूमि के यज्ञ की पूर्णाहुति बताया और विपक्ष पर भी निशाना साधा।
राष्ट्रपति सुबह महर्षि वाल्मीकि अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट पहुंचीं। उनका स्वागत राज्यपाल आनंदीबेन पटेल और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने किया। इस मौके पर उनके साथ उनकी नातिन आद्याश्री और नित्याश्री भी थीं। स्वागत समारोह में उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य, ब्रजेश पाठक मौजूद रहे।

एयरपोर्ट से मंदिर तक के मार्ग पर लगभग 20 सांस्कृतिक मंच लगाए गए, जहां 250 कलाकारों ने रामायण और भक्ति गीतों पर आधारित प्रस्तुतियां दीं। छोटे मंचों पर 7-7 और बड़े मंचों पर 15 कलाकारों का दल मौजूद रहा। उन्होंने जगतगुरू आद्य शंकराचार्य द्वार से रामनगरी में प्रवेश किया।

राष्ट्रपति ने राम मंदिर पहुंचकर पहले परिसर का जायजा लिया। उसके बाद उन्होंने तमिलनाडु से आए राम यंत्र की स्थापना की और मंदिर के द्वितीय तल पर स्थित राम दरबार में रामलला के दर्शन किए। उन्होंने आरती उतारकर आशीर्वाद लिया। मंदिर परिसर में स्थित दुर्गा माता मंदिर में भी पूजा-अर्चना की।
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने कहा कि प्रभु श्रीराम ने जिस अयोध्या नगरी में जन्म लिया उसकी पवित्र धूलि का स्पर्श प्राप्त करना ही मैं अपना परम सौभाग्य मानती हूं। स्वयं प्रभु श्रीराम ने अपनी इस जन्मभूमि को स्वर्ग से भी श्रेष्ठ बताया था। स परम पवित्र श्रीराम जन्मभूमि मंदिर का भूमिपूजन, यहां रामलला के दिव्य विग्रह की प्राण प्रतिष्ठा, राम दरबार का भक्तजनों के लिए खोला जाना तथा मंदिर के शिखर पर धर्म-ध्वजारोहण की तिथियां हमारे इतिहास और संस्कृति की स्वर्णिम तिथियां हैं। हम सभी एक समावेशी समाज और विकसित राष्ट्र के निर्माण की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। प्रभु श्रीराम के आशीर्वाद से वर्ष 2047 या शायद उससे पहले ही हम उन लक्ष्यों को प्राप्त कर लेंगे।राम-राज्य के आदर्शों पर चलते हुए हम सब नैतिकता और धर्माचरण पर आधारित राष्ट्र का निर्माण कर सकेंगे। हमारे देश का पुनर्जागरण आर्थिक, सामाजिक, राजनैतिक और सांस्कृतिक, इन सभी आयामों पर हो रहा है। देव-भक्ति और देश-भक्ति, दोनों का मार्ग एक ही है।

सीएम योगी आदित्यनाथ ने कहा कि आज श्रीराम जन्मभूमि के इस यज्ञ की पूर्णाहुति के कार्यक्रम से जुड़कर न केवल आप, न केवल हम, न केवल उत्तर प्रदेशवासी, बल्कि देश और दुनिया में जहां कहीं भी सनातन धर्मावलंबी हैं, उन सभी के मन में अपार आनंद की अनुभूति हो रही होगी। जो आस्था 500 वर्षों तक निरंतर बनी रही, तमाम विप्लवों को झेलते हुए भी कभी रुकी नहीं, कभी डिगी नहीं, कभी झुकी नहीं, आज वही आस्था अयोध्या के इस दिव्य स्वरूप में साकार रूप में हमारे सामने है। अब अयोध्या के बारे में हम यह कह सकते हैं, जिसके विषय में प्रभु श्रीराम ने स्वयं अपनी वाणी में कहा है ‘अवधपुरी सम प्रिय नहिं सोऊ, यह प्रसंग जानइ कोउ कोऊ। जन्मभूमि मम पुरी सुहावनि, उत्तर दिसि बह सरजू पावनि।’
दुनिया के अंदर किसी देश के पास इतनी आबादी नहीं है,जितने हमारे यहां उत्तर प्रदेश में श्री राम जन्मभूमि में, काशी विश्वनाथ धाम में, प्रयागराज महाकुम्भ में, मथुरा-वृंदावन में दर्शन करने के लिए लोग आए हैं। वर्तमान में विश्व के अनेक भागों में युद्ध चल रहे हैं, अव्यवस्था और असुरक्षा का वातावरण है। जबकि यहां श्री अयोध्या धाम में हम सभी भयमुक्त होकर राष्ट्रपति के अभिवादन व श्रीराम यंत्र स्थापना के अवसर का सहभागी बनते हुए ‘राम राज्य’ की अनुभूति कर रहे हैं। भारत इसलिए बना है क्योंकि हमारे ऋषि-मुनियों की तपस्या, अन्नदाता किसानों के परिश्रम, कारीगरों की उद्यमिता और भारत की आस्था ने सदैव ‘एक भारत, श्रेष्ठ भारत’ की भावना को बनाए रखा है।

सीएम ने कहा कि जो उत्तर प्रदेश या देश की सत्ता में रहते थे, अपनी सत्ता को बचाने के लिए नोएडा नहीं जाते थे, वह ‘उनके’ लिए अंधविश्वास और रूढ़िवादी नहीं था, श्री राम जन्मभूमि मंदिर की बात करना, काशी में श्री काशी विश्वनाथ धाम के निर्माण की बात करना और श्रीकृष्ण कन्हैया के मथुरा- वृंदावन की बात करना उनके लिए अंधविश्वास का पर्याय था।
मां अमृतानंदमयी ने कहा कि भगवान राम का जीवन त्याग, आदर्श और धर्म का प्रतीक है। उन्होंने बताया कि राम ने बेटे, भाई और पति के रूप में अपने कर्तव्यों का पालन किया। राम यंत्र उनके जीवन के ज्ञान और आदर्श का प्रतीक है। राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने कहा कि राम मंदिर अब राष्ट्र मंदिर बन चुका है। उन्होंने बताया कि यह गौरवशाली पल करोड़ों राम भक्तों के संघर्ष और बलिदान के कारण संभव हो सका है। अयोध्या आज वैश्विक चेतना का केंद्र बन चुकी है।

राम मंदिर ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष स्वामी गोविंद देव गिरी महाराज ने कहा कि राम यंत्र की स्थापना और मंदिर का पूर्ण निर्माण 500 वर्षों की प्रतीक्षा का फल है। उन्होंने उन सभी राम भक्तों का जिक्र किया, जिन्होंने 1984 से राम मंदिर आंदोलन में योगदान दिया। कार्यक्रम में राम मंदिर निर्माण में शामिल लोग और श्रद्धालु विशेष रूप से आमंत्रित थे। सभी ने इस ऐतिहासिक पल का हिस्सा बनकर अपनी श्रद्धा प्रकट की।






