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10 मिनट डिलीवरी का वादा खत्म… क्विक कॉमर्स की रफ्तार पर कितना होगा असर, क्या अब भी मिलेगा सुपर फास्ट सामान?

10 मिनट डिलीवरी के दावे पर रोक के बाद क्विक कॉमर्स सेक्टर नए दौर में प्रवेश कर रहा है, जहां फोकस स्पीड से ज्यादा सेफ्टी और भरोसेमंद सर्विस पर होगा। लेकिन एक्सपर्ट्स मानते हैं कि क्विक कॉमर्स की तेज डिलीवरी की पहचान बनी रहेगी

बिजनेस डेस्क, 14 जनवरी 2026:

भारत सरकार ने क्विक कॉमर्स इंडस्ट्री को लेकर मंगलवार को एक अहम कदम उठाया, जिसके बाद पूरी इंडस्ट्री एक नए मोड पर पहुंच गई है। लंबे समय से गिग वर्कर्स की हडताल और सोशल मीडिया पर उठ रहे सवालों के बीच सरकार ने 10 मिनट में डिलीवरी के दावे पर रोक लगा दी। श्रम और रोजगार मंत्री मनसुख मंडाविया ने Blinkit, Zepto और Swiggy Instamart जैसी कंपनियों से अपने विज्ञापनों और ब्रांडिंग से 10 मिनट डिलीवरी का दावा हटाने को कहा है।

यह फैसला केंद्रीय मंत्री और ई कॉमर्स कंपनियों के सीनियर अधिकारियों के साथ हुई बैठकों के बाद लिया गया। इन बैठकों में राइडर्स की सुरक्षा, डिलीवरी का समय और काम करने की स्थिति जैसे मुद्दों पर चर्चा हुई। इसके तुरंत बाद Eternal की स्वामित्व वाली Blinkit ने अपने ऐप और मार्केटिंग से 10 मिनट डिलीवरी की टैगलाइन हटा दी। कंपनी ने अब अपने संदेश को बदलकर आपके दरवाजे पर 30,000 से ज्यादा प्रोडक्ट डिलीवर कर दिया है। उम्मीद है कि आने वाले समय में अन्य प्लेटफॉर्म भी ऐसा ही कदम उठाएंगे।

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सरकार का यह कदम अचानक नहीं है। इसके पीछे गिग वर्कर्स की लंबी मांग रही है। 25 और 31 दिसंबर को देशभर में डिलीवरी पार्टनर्स ने हडताल की थी, जो क्विक कॉमर्स के लिए सबसे व्यस्त दिन माने जाते हैं। उनकी मांग थी कि 10 मिनट में डिलीवरी की मजबूरी खत्म की जाए और पुराना भुगतान सिस्टम वापस लाया जाए। राइडर्स का कहना है कि बहुत तेज डिलीवरी का दबाव असुरक्षित राइडिंग, ऐप के एल्गोरिदम का तनाव और कमाई की अनिश्चितता बढ़ाता है।

कंपनियों ने 10 मिनट डिलीवरी को एक मजबूत मार्केटिंग टूल के तौर पर इस्तेमाल किया। हालांकि उनका दावा रहा है कि राइडर्स पर किसी तय समय में ऑर्डर पहुंचाने का दबाव नहीं होता और डिलीवरी टाइम हालात के हिसाब से बदलता रहता है। लेकिन जमीनी हकीकत इससे अलग दिखती है, जहां राइडर्स जल्दी के चक्कर में जोखिम उठाते नजर आते हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, कंपनी अधिकारियों का मानना है कि टैगलाइन हटाने से रोज के ऑपरेशन पर खास असर नहीं पड़ेगा और घनी आबादी वाले इलाकों में आज भी 4 से 5 मिनट में डिलीवरी संभव है।

ब्रोकरेज फर्म Elara Capital का मानना है कि यह बदलाव ज्यादा दिखावे से जुड़ा है, न कि पूरे बिजनेस मॉडल में किसी बड़े बदलाव का संकेत। Elara Capital के एग्जीक्यूटिव वाइस प्रेसिडेंट करण तौरानी के मुताबिक, 10 मिनट का नारा कोविड के बाद ग्राहकों को आकर्षित करने का जरिया था। क्विक कॉमर्स अब मेट्रो शहरों में रोजमर्रा की आदत बन चुका है और आमतौर पर डिलीवरी 20 से 30 मिनट में हो जाती है, जो पारंपरिक ई कॉमर्स से काफी तेज है।

तेज डिलीवरी की प्रतिस्पर्धा आगे भी कम होने की संभावना नहीं है, क्योंकि Amazon और Flipkart जैसी बड़ी कंपनियां भी स्पीड पर जोर दे रही हैं। हालांकि अब फोकस सिर्फ मिनटों की गिनती पर नहीं, बल्कि भरोसेमंद सर्विस, बेहतर प्रोडक्ट और क्वालिटी पर जा सकता है। Goldman Sachs के अनुमान के अनुसार, भारत की क्विक कॉमर्स इंडस्ट्री FY25 में 6 बिलियन डॉलर की थी, जो FY30 तक 47 बिलियन डॉलर तक पहुंच सकती है। विशेषज्ञों का मानना है कि 10 मिनट के वादे से पीछे हटना इस सेक्टर के और परिपक्व होने का संकेत है, जहां आगे की सफलता जिम्मेदार और स्थिर विकास पर निर्भर करेगी।

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