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आजादी से पहले फिल्मों में गूंजा था ये पहला होली गीत…महबूब खान ने शुरू किया नया ट्रेंड

1940 में आई फिल्म ‘औरत’ से हुई थी होली गानों की शुरुआत, दो गीतों ने बदली हिंदी सिनेमा की दिशा

एंटरटेनमेंट डेस्क, 3 मार्च 2026:

होली आते ही हिंदी फिल्मों के रंगीन और मस्ती भरे गाने याद आने लगते हैं। आज शायद ही कोई फिल्मी होली बिना गीतों के पूरी मानी जाए। लेकिन फिल्मों में होली का पहला गीत आजादी से पहले आया था। यह सिलसिला 1940 में रिलीज हुई फिल्म औरत से शुरू हुआ था, जिसका निर्देशन मशहूर फिल्मकार महबूब खान ने किया था।

पहली बार पर्दे पर सजी होली

1940 में जब फिल्म औरत रिलीज हुई, तब देश आजाद नहीं हुआ था और सिनेमा ब्लैक एंड व्हाइट दौर में था। इसी फिल्म में पहली बार होली के मौके पर दो गीत फिल्माए गए। यह अपने समय का अनोखा प्रयोग था। फिल्म का पहला होली गीत था ‘आज होली खेलेंगे साजन के संग’। दूसरा गीत था ‘जमुना तट पर होली खेलत श्याम’, इन दोनों गीतों ने दर्शकों का दिल जीत लिया और आगे चलकर होली गीतों का चलन निकल पड़ा।

संगीत और लेखन की मजबूत टीम

फिल्म के इन गीतों को संगीतकार अनिल बिस्वास ने संगीतबद्ध किया था। उन्होंने ही पहला गीत गाया भी था। गीत के बोल सफदर आह ने लिखे थे। उस दौर में सीमित तकनीक के बावजूद इन गीतों की लोकप्रियता ने साबित कर दिया कि त्योहारों की खुशबू सिनेमा को नई जान दे सकती है।

आजादी से पहले बनी थी फिल्म

फिल्म औरत 1940 में रिलीज हुई थी। इसमें सरदार अख्तर, सुरेंद्र, याकूब, कन्हैयालाल और अरुण कुमार आहूजा जैसे कलाकार नजर आए थे। संवाद वजाहत मिर्जा ने लिखे थे। यह फिल्म उस दौर की चर्चित फिल्मों में गिनी जाती है और आज भी हिंदी सिनेमा के इतिहास में खास मुकाम रखती है। यूं कहें तो होली के रंगों को बड़े पर्दे पर सजाने का श्रेय महबूब खान को जाता है।

होली गीतों का बढ़ता सफर

फिल्म औरत के बाद हिंदी सिनेमा में होली गीतों का सिलसिला लगातार आगे बढ़ता गया। बाद के वर्षों में रंग बरसे, होली के दिन, होली खेले रघुवीरा व बलम पिचकारी जैसे कई गीत दर्शकों की प्लेलिस्ट का हिस्सा बने। होली के गीत अब सिर्फ मनोरंजन नहीं रहे, बल्कि कहानी को आगे बढ़ाने और किरदारों की भावनाएं दिखाने का अहम जरिया भी बन गए।

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