Barabanki City

पुणे में बैठे साइबर फ्रॉड को सप्लाई करते थे बैंक अकाउंट…ऐसे फंसाते थे शिकार, तीन युवक गिरफ्तार

सरकारी योजनाओं के फायदे का लालच देकर खुलवाए जाते थे खाते, पासबुक-एटीएम लेकर करते थे खेल, देवा, सतरिख व लक्ष्मण पुरी के रहने वाले आरोपी, मास्टरमाइंड की तलाश तेज

बाराबंकी, 7 अप्रैल 2026:

बाराबंकी में पुलिस ने ऐसे गिरोह का पर्दाफाश किया है जो लोगों को सरकारी योजना का झांसा देकर उनके बैंक खाते खुलवाता था और फिर उन्हें साइबर अपराधियों तक पहुंचा देता था। शहर कोतवाली पुलिस ने इस मामले में तीन युवकों को गिरफ्तार किया है। जांच में अब तक 16 खातों के गलत इस्तेमाल की पुष्टि हुई है, जबकि गिरोह का सरगना महाराष्ट्र के पुणे में बताया जा रहा है।

मामले की शुरुआत शहर कोतवाली क्षेत्र के गोकुलपुर सैनी गांव के रहने वाले चंद्रदीप की शिकायत से हुई। उनका कहना था कि लक्ष्मण पुरी कॉलोनी निवासी वैभव सिंह, देवा के मजीबपुर निवासी आलोक शर्मा और सतरिख क्षेत्र के करखा गांव के अभिषेक कुमार ने सरकारी योजना का फायदा दिलाने की बात कहकर उनका बैंक खाता खुलवाया। इसके बाद पासबुक, एटीएम कार्ड और जरूरी दस्तावेज अपने पास रख लिए।

कुछ समय बाद खाते में लाखों का संदिग्ध लेनदेन शुरू हुआ तो ठगी का पता चला। शिकायत पर पुलिस की जांच में सामने आया कि आरोपी पहले लोगों को लालच देकर खाते खुलवाते थे, फिर उनमें फर्जी मोबाइल नंबर लिंक कर देते थे। बाद में इन खातों को साइबर ठगों को सौंप दिया जाता था, जहां इन्हें म्यूल अकाउंट की तरह इस्तेमाल किया जाता था।

पूछताछ में यह भी सामने आया कि तीनों आरोपी टेलीग्राम एप के जरिए पुणे में बैठे एक शख्स के संपर्क में थे। हर खाते के बदले उन्हें करीब 15 हजार रुपये मिलते थे। पुलिस ने तीनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है और अब इस नेटवर्क के सरगना तक पहुंचने के लिए महाराष्ट्र में टीमें लगा दी गई हैं।

पता चला कि मोबाइल पर गेम खेलते समय युवकों ने साइबर प्रॉब्लम पर कमेंट किया था, इसी बहाने फ्रॉड ने उनसे संपर्क साधा। शुरुआत में खुद को मददगार बताकर बातचीत शुरू की और धीरे-धीरे उनका भरोसा जीत लिया। कुछ दिनों बाद ठगों ने असली खेल शुरू किया। युवकों को घर बैठे कमाई का झांसा देकर बिना मेहनत मोटी रकम कमाने के सपने दिखाए गए। भरोसे में आकर इन युवकों ने बातों पर यकीन किया और लोगों को फंसाकर अकाउंट खुलवाने शुरू कर दिए। दरअसल साइबर क्राइम की रकम के लिए प्रयोग होने वाले खातों को म्यूल अकाउंट कहा जाता है। इसी म्यूल अकाउंट को खुलवाने का काम ये लोग करते थे।

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