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जनेश्वर मिश्र को नमन, भाजपा पर गरजे अखिलेश- शंकराचार्य के अपमान पर साधु-संतों के साथ खड़ी सपा

सपा मुखिया ने कहा कि शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद के पक्ष में सभी सनातनी खड़े लेकिन भाजपा अधर्म के रास्ते पर चल रही, किसी को स्नान से रोकना सबसे बड़ा अधर्म

लखनऊ, 22 जनवरी 2026:

समाजवादी चिंतक एवं छोटे लोहिया के नाम से चर्चित जनेश्वर मिश्र की पुण्यतिथि पर गुरुवार को उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की गई। लखनऊ के गोमतीनगर स्थित जनेश्वर मिश्र पार्क में उनकी प्रतिमा पर सपा मुखिया अखिलेश यादव, राष्ट्रीय महासचिव शिवपाल सिंह यादव सहित पार्टी के कई नेताओं ने पुष्प अर्पित किए। इस मौके पर अखिलेश यादव के स्वागत में बड़ी संख्या में सपा कार्यकर्ता भी पार्क पहुंचे और जनेश्वर मिश्र को श्रद्धा सुमन अर्पित किए।

इसके बाद अखिलेश यादव ने मीडिया से बातचीत में शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद से जुड़े मामले को लेकर भारतीय जनता पार्टी पर जोरदार हमला बोला। उन्होंने कहा कि किसी को स्नान से रोकना सबसे बड़ा अधर्म है। शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद के पक्ष में सभी सनातनी खड़े हैं लेकिन भाजपा अधर्म के रास्ते पर चल रही है। उन्होंने कहा कि शंकराचार्य का सम्मान और प्रतिष्ठा बनाए रखते हुए सरकार को आगे बढ़ना चाहिए। अखिलेश यादव ने तीखी टिप्पणी करते हुए कहा कि गोमती नदी से ज्यादा गंदी अब भाजपा हो गई है। उन्होंने यह भी कहा कि साधु-संतों के अपमान के खिलाफ समाजवादी पार्टी पूरी मजबूती से खड़ी रहेगी।

अखिलेश यादव ने अधिकारियों पर दबाव का आरोप लगाते हुए कहा कि जो अधिकारी नोटिस भेज रहे हैं, वे भी पाप का भागीदार नहीं बनना चाहते लेकिन वे मजबूरी में काम कर रहे हैं। उन्होंने डिप्टी सीएम पर भी निशाना साधते हुए कहा कि उन्हें शंकराचार्य के चरणों में लोट जाना चाहिए और ऐसे समय में बाटी-चोखा नहीं खाना चाहिए।

अपने संबोधन में अखिलेश यादव ने कहा कि जनेश्वर मिश्र ने समाजवादी आंदोलन की जो विरासत दी है उसे समाजवादी पार्टी पूरी जिम्मेदारी के साथ आगे बढ़ा रही है। उन्होंने भाजपा पर पूंजीवाद और सांप्रदायिकता को बढ़ावा देने का आरोप लगाया। कहा कि भाजपा का रास्ता पूंजीवाद का रास्ता है जबकि सपा PDA (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) की लड़ाई लड़ रही है।

नोएडा में एक इंजीनियर की मौत जिक्र करते हुए अखिलेश यादव ने सवाल उठाया कि अधिकारियों की मौजूदगी के बावजूद उसकी जान क्यों नहीं बचाई जा सकी। उन्होंने मांग की कि ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए ठोस कदम उठाए जाएं। साथ ही उन्होंने कहा कि जज के तबादले से जुड़े मामले में सुप्रीम कोर्ट संज्ञान लेगा।

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