बिजनेस डेस्क, 10 मार्च 2026:
अमेरिका-इजराइल और ईरान के बीच चल रहे युद्ध के बीच राहत भरी खबरों और कच्चे तेल की कीमतों में आई गिरावट का असर मंगलवार को भारतीय शेयर बाजार पर सकारात्मक रूप में देखने को मिला। सप्ताह की शुरुआत में भारी गिरावट झेलने के बाद मंगलवार को बाजार मजबूती के साथ हरे निशान पर खुला और निवेशकों के सेंटीमेंट में सुधार नजर आया।
शुरुआती कारोबार में 30 शेयरों वाला सेंसेक्स 655.92 अंक यानी 0.85 प्रतिशत की बढ़त के साथ 78,222.08 अंक पर पहुंच गया। वहीं 50 शेयरों वाला निफ्टी भी 189.15 अंक यानी 0.79 प्रतिशत चढ़कर 24,217.20 अंक पर कारोबार करता दिखाई दिया। बाजार में यह उछाल ऐसे समय आया है जब सोमवार को घरेलू शेयर बाजार में बड़ी गिरावट दर्ज की गई थी।
दरअसल सोमवार को बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी थी। इसके चलते सेंसेक्स 1,352.74 अंक यानी 1.71 प्रतिशत टूटकर 77,566.16 अंक पर बंद हुआ था, जबकि निफ्टी 422.40 अंक यानी 1.73 प्रतिशत गिरकर 24,028.05 अंक पर आ गया था। वैश्विक बाजारों में जोखिम से बचने की प्रवृत्ति और ऊर्जा कीमतों में अस्थिरता ने बाजार का माहौल कमजोर कर दिया था।

हालांकि मंगलवार को हालात कुछ बदलते नजर आए। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बयान के बाद वैश्विक बाजारों में राहत का माहौल बना। ट्रंप ने मीडिया से बातचीत में संकेत दिया कि अमेरिका और ईरान के बीच चल रहा सैन्य अभियान लगभग समाप्ति की ओर है जिससे निवेशकों की चिंता कुछ कम हुई है।
हालांकि उन्होंने चेतावनी भी दी कि यदि ईरान होर्मुज जलडमरूमध्य के जरिए तेल आपूर्ति को बाधित करने की कोशिश करता है तो अमेरिका उसकी कड़ी प्रतिक्रिया देगा। यह समुद्री मार्ग वैश्विक तेल आपूर्ति का लगभग 20 प्रतिशत संभालता है। इसलिए ऊर्जा बाजार के लिए इसे बेहद अहम माना जाता है।
इसी बीच कच्चे तेल के बाजार में भी भारी उतार-चढ़ाव देखने को मिला। सोमवार को कच्चे तेल की कीमत करीब 30 प्रतिशत उछलकर 119 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर पहुंच गई थी लेकिन बाद में इसमें तेज गिरावट आई और कीमत करीब 84 डॉलर तक आ गई। मंगलवार को कारोबार की शुरुआत में ब्रेंट क्रूड की कीमतों में करीब 10 प्रतिशत तक गिरावट दर्ज की गई और यह 90 डॉलर प्रति बैरल से नीचे आ गया।
विशेषज्ञों का मानना है कि तेल कीमतों में नरमी और वैश्विक तनाव कम होने के संकेत से आने वाले दिनों में शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव के बीच निवेशकों का भरोसा धीरे-धीरे मजबूत हो सकता है।






