न्यूज डेस्क, 15 जून 2026:
ब्रिटिश सरकार ने 16 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर प्रतिबंध लगाने की तैयारी शुरू कर दी है। ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर का कहना है कि बच्चों की सुरक्षा और मानसिक स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए यह फैसला लिया जा रहा है। क्या इस पहल से आने वाले दिनों में भारत में भी बच्चों के लिए सोशल मीडिया के नियम सख्त हो सकते हैं?
अगर यह कानून लागू होता है, तो टिक टॉक, इंस्टाग्राम, यूट्यूब और फेसबुक जैसे कई लोकप्रिय प्लेटफॉर्म बच्चों की पहुंच से बाहर हो सकते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि ब्रिटेन का यह फैसला भारत समेत दुनिया के कई देशों में बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा को लेकर नई बहस को जन्म दे सकता है।
बताया जा रहा है कि ब्रिटेन में टिकटॉक, इंस्टाग्राम, फेसबुक, एक्स (पूर्व में ट्विटर), यूट्यूब, स्नैपचैट, थ्रेड्स, ट्विच, किक और रेडिट जैसे प्लेटफॉर्म्स पर 16 साल से कम उम्र के बच्चों की पहुंच सीमित की जा सकती है। हालांकि व्हाट्सप जैसे मैसेजिंग ऐप्स को फिलहाल इस प्रतिबंध से बाहर रखा है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक सरकार केवल सोशल मीडिया तक सीमित नहीं रहना चाहती। प्रस्तावित नियमों में एआई चैटबॉट्स और कुछ गेमिंग एप्स के फीचर्स पर भी कड़े नियंत्रण लगाए जा सकते हैं। वहीं गेमिंग और लाइव-स्ट्रीमिंग सेवाओं के लिए ऐज वेरिफिकेशन व्यवस्था लागू करने पर भी विचार किया जा रहा है।
विशेषज्ञों का कहना है कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म बच्चों को लंबे समय तक स्क्रीन से जोड़े रखने के लिए डिजाइन किए जाते हैं। ‘इन्फिनिट स्क्रॉल’ जैसे फीचर्स बच्चों की पढ़ाई, नींद, सामाजिक जीवन और मानसिक स्वास्थ्य पर नकारात्मक प्रभाव डाल सकते हैं।
ब्रिटिश सरकार ने इस मुद्दे पर व्यापक जनमत संग्रह जैसा सार्वजनिक परामर्श किया था, जिसमें माता-पिता, बच्चों और तकनीकी कंपनियों समेत विभिन्न वर्गों से करीब 1.16 लाख प्रतिक्रियाएं प्राप्त हुईं। ब्रिटेन की संस्कृति मंत्री लीसा नैंडी ने बताया कि ब्रिटिश सरकार ने इस दिशा में कानूनी प्रक्रिया शुरू कर दी है और अगले साल तक इस कानून लागू करने का लक्ष्य रखा है।

गौरतलब है कि ऑस्ट्रेलिया, कनाडा, ब्राजील और इंडोनेशिया जैसे कई देश भी बच्चों की सोशल मीडिया पहुंच को नियंत्रित करने के लिए इसी तरह के कदम उठा चुके हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि भारत दुनिया के सबसे बड़े इंटरनेट और सोशल मीडिया उपयोगकर्ता देशों में से एक है, जहां करोड़ों बच्चे और किशोर प्रतिदिन विभिन्न डिजिटल प्लेटफॉर्म्स का इस्तेमाल करते हैं।
हाल के वर्षों में भारत में भी बच्चों में बढ़ती स्क्रीन टाइम की आदत, मानसिक स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं और सोशल मीडिया की लत को लेकर चिंताएं बढ़ी हैं। ऐसे में ब्रिटेन के इस फैसले से भारत में बच्चों को ऑनलाइन सुरक्षा को लेकर ठोस कदम उठाये जा सकते हैं।






