लखनऊ, 22 फरवरी 2026:
लखनऊ विश्वविद्यालय कैंपस स्थित ऐतिहासिक लाल बारादरी के दरवाजे बंद किए जाने और फेंसिंग लगाने के विरोध में रविवार को छात्र संगठनों ने प्रदर्शन किया। समाजवादी छात्र सभा, एनएसयूआई और आइसा से जुड़े छात्र मौके पर पहुंचे और विश्वविद्यालय प्रशासन के फैसले को लेकर नारेबाजी शुरू कर दी।
जानकारी के मुताबिक पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के तहत रविवार को लाल बारादरी परिसर में फेंसिंग के लिए खुदाई का काम शुरू किया गया। पहले से तैनात पुलिस बल ने बैरिकेडिंग कर क्षेत्र को घेर लिया था लेकिन प्रदर्शनकारी छात्रों ने बैरिकेडिंग गिरा दी और नारे लगाते हुए इमारत के पास पहुंच गए। इसी दौरान कुछ छात्रों ने परिसर में नमाज अदा की। नमाज के वक्त किसी टकराव से बचने के लिए अन्य छात्रों ने मानव शृंखला बनाकर उन्हें घेरे रखा और नमाज पूरी होने के बाद यह घेरा हटा लिया गया।

प्रदर्शन कर रहे छात्रों का आरोप है कि विश्वविद्यालय प्रशासन ने बिना किसी पूर्व सूचना के लाल बारादरी के एक दरवाजे को सील कर दिया और दीवार खड़ी कर दी। उनका कहना है कि यह स्थल भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण द्वारा संरक्षित है। इसलिए उसकी अनुमति के बिना किसी भी तरह का निर्माण या फेंसिंग नहीं की जा सकती। कुछ छात्रों ने यह आशंका जताई कि प्रशासन किसी विशेष समुदाय की एंट्री रोकने के उद्देश्य से पूरे परिसर को सील करने की कोशिश कर रहा है।
दूसरी तरफ विश्वविद्यालय प्रशासन ने आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि लाल बारादरी की हालत जर्जर हो चुकी है। सुरक्षा के लिहाज से फेंसिंग जरूरी है। कुल सचिव के अनुसार निर्माण अधीक्षक को फेंसिंग कराने के निर्देश दिए गए थे। किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए पहले से ही हसनगंज पुलिस को सूचना देकर पर्याप्त पुलिस बल तैनात कराया गया। उन्होंने साफ किया कि निर्माण कार्य में बाधा डालने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। हंगामे के बाद कैंसस में तनाव का माहौल पैदा हो गया। हालांकि कुछ देर बाद स्थिति नियंत्रित हो गई।






