लखनऊ, 13 फरवरी 2026:
यूपी विधानसभा में राज्यपाल के अभिभाषण पर चर्चा के दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शुक्रवार को विपक्ष पर जोरदार हमला बोला। उन्होंने समाजवादी पार्टी के विधायकों के व्यवहार को अशोभनीय करार देते हुए कहा कि जो लोग आज सनातन की बात कर रहे हैं, वही लोग पहले प्रदेश में अराजकता के प्रतीक थे। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्यपाल का अभिभाषण पूर्व निर्धारित होता है। इसके बावजूद मुख्य विपक्षी दल का रवैया शर्मनाक रहा।
मुख्यमंत्री ने नेता प्रतिपक्ष माता प्रसाद पांडेय का नाम लेकर कहा कि मां की उम्र की महिला के साथ सम्मानजनक व्यवहार होना चाहिए था लेकिन विपक्ष का आचरण मर्यादाओं के विपरीत था। बिना नाम लिए उन्होंने सपा विधायकों पर कटाक्ष करते हुए कहा कि उनके ऐसे ही पुराने आचरण से बेटियां और व्यापारी खुद को असुरक्षित महसूस करते थे। योगी ने आरोप लगाया कि सपा और कांग्रेस वंदे मातरम का विरोध करती रही हैं। ऐसे लोगों को भारत की धरती पर रहने का अधिकार नहीं है, उन्हें वहीं जाना चाहिए जहां इसका विरोध होता है। इस बयान के साथ ही सदन में सियासी गर्मी और बढ़ गई।

‘सपा ने अयोध्या और मथुरा के विकास का विरोध किया’
मुख्यमंत्री ने विपक्ष पर तुष्टिकरण की राजनीति का आरोप लगाते हुए कहा कि इसी नीति के चलते सपा ने अयोध्या और मथुरा के विकास का विरोध किया। कांवड़ यात्रा को रोका गया। अयोध्या में दीपोत्सव जैसे आयोजनों का भी विरोध हुआ। उन्होंने कहा कि यूपी देश की आस्था का केंद्र है लेकिन सपा के लोग प्रदेश की सांस्कृतिक चेतना को समझ ही नहीं पाए। योगी ने जोर देकर कहा कि 2017 के बाद प्रदेश की यात्रा कर्फ्यू से कानून के राज, उपद्रव से उत्सव और अविश्वास से आत्मविश्वास की ओर बढ़ी है।
‘2017 से पहले अपराधी समानांतर सरकार चलाते थे’
सरकार की उपलब्धियां गिनाते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि 2017 से पहले अपराधी समानांतर सरकार चलाते थे। माफिया खुलेआम घूमते थे और न बेटियां सुरक्षित थीं, न व्यापारी। अब प्रदेश उपद्रव नहीं, उत्सव का प्रदेश बन चुका है। दंगों की जगह टेम्पल इकॉनॉमी विकसित हो रही है। उन्होंने बताया कि पहले कुंभ में करीब 12 करोड़ श्रद्धालु आते थे जबकि इस बार प्रयागराज में माघ मेले के दौरान ही 21 करोड़ लोगों ने स्नान किया। यह बदलाव कानून-व्यवस्था पर बढ़े भरोसे का नतीजा है।
‘यूपी अब बीमारू राज्य नहीं रहा बल्कि देश की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन चुका’
आर्थिक मोर्चे पर मुख्यमंत्री ने दावा किया कि उत्तर प्रदेश अब बीमारू राज्य नहीं रहा बल्कि देश की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन चुका है। यूपी की अर्थव्यवस्था 36 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गई है। टैक्स चोरी पर सख्ती कर भ्रष्टाचार पर प्रहार किया गया है। बीते नौ वर्षों में कोई नया टैक्स लगाए बिना भी वित्तीय अनुशासन कायम रखा गया। मुख्यमंत्री ने ट्रिपल टी-टेक्नोलॉजी, ट्रस्ट और ट्रांसफॉर्मेशन का जिक्र करते हुए कहा कि साफ नीयत और दृढ़ इच्छाशक्ति से सुशासन का लक्ष्य हासिल हुआ है।

‘पहले सपा-कांग्रेस ने अन्नदाता को बना दिया था कर्जदार’
कृषि क्षेत्र में बदलाव का दावा करते हुए योगी ने कहा कि पहले सपा-कांग्रेस ने अन्नदाता को कर्जदार बना दिया था और निवेशकों को पलायन के लिए मजबूर किया था। अब स्पष्ट कृषि नीति से लागत घटी है और उत्पादन बढ़ा है। प्रदेश के किसानों को सीधे 95 हजार करोड़ रुपये दिए जा चुके हैं। यूपी देश के कुल कृषि उत्पादन में अग्रणी है। दुग्ध उत्पादन में आगे और मत्स्य उत्पादन में भी तेज प्रगति हुई है। कुल कृषि भूमि का 11 फीसदी हिस्सा होने के बावजूद यूपी 21 फीसदी खाद्यान्न उत्पादन कर रहा है।
स्वास्थ्य क्षेत्र पर बोलते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि पहले इंसेफेलाइटिस से हर साल मौतें होती थीं, जिस पर अब नियंत्रण पा लिया गया है। उन्होंने इसके लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विजन को श्रेय दिया और कहा कि उनकी सरकार सिर्फ माफिया का नहीं, मच्छरों का भी इलाज करती है। विधानसभा में योगी के इस आक्रामक भाषण ने सियासी बहस को और तीखा कर दिया है।






