लखनऊ, 21 मई 2026:
उत्तर प्रदेश में गो संरक्षण को अब सिर्फ गोशालाओं तक सीमित रखने के बजाय उसे ग्रामीण अर्थव्यवस्था, रोजगार, जैविक खेती और पंचगव्य आधारित चिकित्सा से जोड़ने की बड़ी तैयारी शुरू हो गई है। योगी सरकार प्रदेशभर में गांव-गांव गोपैथी सेंटर खोलने की योजना पर काम कर रही है। इसके जरिए पंचगव्य आधारित उपचार पद्धति को नई पहचान देने के साथ ग्रामीण इलाकों में स्वरोजगार का मजबूत नेटवर्क तैयार करने की कोशिश है।
सरकार की योजना के मुताबिक गोशालाओं को आधुनिक सुविधाओं से जोड़ा जाएगा, ताकि वे सिर्फ संरक्षण केंद्र न रहकर स्थानीय उत्पादन और ग्रामीण उद्योगों के केंद्र बन सकें। पंचगव्य आधारित उत्पादों का निर्माण गांव स्तर पर कराया जाएगा। इनमें मंजन, मरहम, अर्क समेत कई उत्पाद शामिल होंगे। इससे स्थानीय स्तर पर उत्पादन, बिक्री और रोजगार का नया ढांचा तैयार होने की उम्मीद जताई जा रही है।
प्रदेश में पंचगव्य आधारित चिकित्सा मॉडल को आयुष और वैज्ञानिक अध्ययन से जोड़ने की दिशा में भी काम चल रहा है। आयुर्वेदिक परंपराओं में पंचगव्य का इस्तेमाल लंबे समय से होता रहा है। इसमें गाय से मिलने वाले पांच प्रमुख तत्व दूध, दही, घी, गोमूत्र और गोबर का उपयोग अलग-अलग औषधीय मिश्रणों और उत्पादों में किया जाता है।

पंचगव्य थेरेपी को लेकर मधुमेह, माइग्रेन, लकवा, हृदय रोग, त्वचा संबंधी दिक्कतों, पाचन विकार और श्वसन समस्याओं में इसकी सहायक भूमिका पर अध्ययन किए जा रहे हैं। हालांकि विशेषज्ञ इसे मुख्यधारा इलाज के पूरक मॉडल के तौर पर देखने की बात कह रहे हैं। कई क्षेत्रों में इसके वैज्ञानिक और क्लीनिकल रिसर्च की प्रक्रिया भी आगे बढ़ाई जा रही है।
सरकार की योजना में ग्रामीण युवाओं, महिलाओं और किसानों को सीधे जोड़ने पर खास फोकस है। पंचगव्य आधारित उत्पादों की उपलब्धता और विपणन के लिए भी अलग व्यवस्था विकसित की जा रही है, ताकि गांव स्तर पर छोटे उद्योगों को बढ़ावा मिल सके।
उत्तर प्रदेश गो सेवा आयोग के अध्यक्ष श्याम बिहारी गुप्ता ने कहा कि प्रदेश में बड़े स्तर पर यह मॉडल लागू किया जा रहा है। उनका कहना है कि आने वाले समय में उत्तर प्रदेश देश का सबसे बड़ा गोपैथी केंद्र बन सकता है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में गो संरक्षण को ग्रामीण विकास, वैज्ञानिक कृषि और रोजगार से जोड़कर नया मॉडल तैयार किया जा रहा है।






