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अमेरिकी टैरिफ में बड़ी कटौती से UP के निर्यात को नई उड़ान : कालीन से दवा तक खुले वैश्विक दरवाजे

प्रदेश के टेक्सटाइल, रेशम व हैंडलूम सेक्टर, कार्पेट, लेदर, होम डेकोर, कृषि प्रसंस्करण और औद्योगिक विनिर्माण जैसे उन क्षेत्रों के लिए बड़ी राहत की उम्मीद

लखनऊ, 8 फरवरी 2026:

भारत और अमेरिका के बीच प्रस्तावित द्विपक्षीय व्यापार समझौते के तहत जारी टैरिफ ज्वाइंट स्टेटमेंट ने यूपी की निर्यात आधारित अर्थव्यवस्था के लिए नए अवसरों का खाका खींचा है। भारतीय उत्पादों पर अमेरिकी टैरिफ को औसतन 50 प्रतिशत से घटाकर 18 प्रतिशत और कई श्रेणियों में शून्य किए जाने का प्रस्ताव ऐसे समय सामने आया है जब राज्य सरकार श्रम-प्रधान उद्योगों, एमएसएमई और क्लस्टर आधारित विनिर्माण को वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं से जोड़ने की रणनीति पर आगे बढ़ रही है।

इस व्यवस्था का सीधा असर टेक्सटाइल, कार्पेट, लेदर, होम डेकोर, कृषि-प्रसंस्करण और औद्योगिक विनिर्माण जैसे क्षेत्रों पर पड़ेगा। इनमें उत्तर प्रदेश की राष्ट्रीय हिस्सेदारी मजबूत है। भदोही-मिर्जापुर कार्पेट बेल्ट हस्तनिर्मित कालीनों के लिए दुनिया भर में पहचाना जाता है। यह ऊंचे अमेरिकी टैरिफ के कारण कीमतों की प्रतिस्पर्धा में पिछड़ रहा था। टैरिफ घटने से कालीनों की लागत संरचना सुधरने और निर्यात ऑर्डर में स्थिरता आने की उम्मीद है।

इसी तरह वाराणसी के रेशम और हैंडलूम सेक्टर को चुनिंदा श्रेणियों में शून्य शुल्क का लाभ मिलने से अमेरिकी बाजार में बेहतर पहुंच मिल सकती है। पूर्वी उत्तर प्रदेश के पावरलूम और रेडीमेड गारमेंट क्लस्टर्स के लिए भी यह राहत चीन, वियतनाम और बांग्लादेश जैसे देशों के मुकाबले तुलनात्मक बढ़त देने वाली मानी जा रही है।

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लेदर और फुटवियर उद्योग के लिए यह घोषणा खास मायने रखती है। कानपुर के लेदर उत्पाद और आगरा के निर्यात उन्मुख फुटवियर क्लस्टर लंबे समय से ऊंचे शुल्क के चलते दबाव में थे। टैरिफ में कटौती से एमएसएमई इकाइयों की सीधे निर्यात करने की क्षमता बढ़ने और बिचौलियों पर निर्भरता घटने की संभावना है। इससे मूल्यवर्धन का बड़ा हिस्सा स्थानीय स्तर पर ही रह सकेगा।

होम डेकोर और हस्तशिल्प से जुड़े मेरठ, सहारनपुर, मुरादाबाद, बुलंदशहर और गौतमबुद्धनगर जैसे क्षेत्रों के लिए भी यह नीति राहत लेकर आई है। लकड़ी का फर्नीचर, कुशन, कंफर्टर और सजावटी वस्तुओं पर शुल्क घटने से अमेरिकी बाजार में कीमतें अधिक प्रतिस्पर्धी बन सकती हैं। श्रम प्रधान स्वरूप के कारण इस सेक्टर में निर्यात बढ़ने पर रोजगार सृजन की संभावनाएं भी बढ़ेंगी।

कृषि और प्रोसेस्ड फूड उत्पादों पर शून्य शुल्क का प्रस्ताव उत्तर प्रदेश के फूड प्रोसेसिंग क्लस्टर्स, मेगा फूड पार्कों और एफपीओ के लिए संरचनात्मक अवसर बन सकता है। आम, सब्जियां, मसाले और रेडी-टू-ईट उत्पाद अब मूल्यवर्धन के साथ सीधे निर्यात श्रृंखला में जुड़ सकते हैं।

फार्मास्यूटिकल्स, जेनेरिक दवाएं, एपीआई, मशीनरी और ऑटो कंपोनेंट्स पर न्यूनतम या शून्य अतिरिक्त शुल्क से नोएडा-ग्रेटर नोएडा, गाजियाबाद और लखनऊ के औद्योगिक क्लस्टर्स को अमेरिकी बाजार में नई पहचान मिलने की संभावना है। साथ ही सेमीकंडक्टर इनपुट्स और डेटा सेंटर हार्डवेयर को लेकर तकनीकी सहयोग की प्रतिबद्धता से नोएडा और यमुना एक्सप्रेसवे क्षेत्र में आईटी व डेटा सेंटर निवेश को गति मिल सकती है।

ज्वाइंट स्टेटमेंट में कृषि, डेयरी, पोल्ट्री और जीएम फूड जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में घरेलू हितों की सुरक्षा का स्पष्ट आश्वासन भी दिया गया है। कुल मिलाकर, यह टैरिफ ढांचा उत्तर प्रदेश के लिए निर्यात, निवेश और रोजगार के मोर्चे पर दीर्घकालिक अवसरों की नई खिड़की खोलता नजर आ रहा है।

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