लखनऊ, 2 मार्च 2026:
उत्तर प्रदेश में पिछले करीब नौ वर्षों में पर्व-त्योहारों का रंग-रूप काफी बदल गया है। पहले जहां आयोजन सीमित दायरे में होते थे, वहीं अब बेहतर सुरक्षा व्यवस्था, प्रशासनिक तैयारी और लगातार बढ़ते सांस्कृतिक कार्यक्रमों ने इन्हें आर्थिक गतिविधियों का बड़ा जरिया बना दिया है। सरकार की कोशिशों के चलते प्रदेश में फेस्टिवल इकॉनमी का दायरा बढ़ा है और इसका सीधा फायदा स्थानीय बाजारों, कारीगरों और सेवा क्षेत्र को मिल रहा है।
सुरक्षा के माहौल से बढ़ा भरोसा, बाजार हुए गुलजार
राज्य में त्योहारों के दौरान खास सुरक्षा प्लान लागू किए जाते हैं। संवेदनशील इलाकों में अतिरिक्त पुलिस और पीएसी तैनात रहती है, ड्रोन निगरानी और सीसीटीवी से बाजारों पर नजर रखी जाती है। ट्रैफिक डायवर्जन और अतिरिक्त सार्वजनिक परिवहन की व्यवस्था से लोगों की आवाजाही आसान हुई है। व्यापारिक संगठनों के मुताबिक इसी भरोसे का असर है कि होली, दीपावली और नवरात्र के समय कई बाजारों में सामान्य दिनों की तुलना में 30 से 50 प्रतिशत तक ज्यादा भीड़ दर्ज की गई।
खुदरा कारोबार में आया उछाल
त्योहारों के मौसम में कपड़ा, इलेक्ट्रॉनिक्स, ऑटोमोबाइल, सर्राफा, मिठाई और सजावटी सामान की बिक्री तेजी से बढ़ी है। व्यापारियों का कहना है कि बेहतर माहौल और व्यवस्थित आयोजन के कारण ग्राहक खुलकर खरीदारी कर रहे हैं। कई शहरों में त्योहारों के दौरान कारोबार सामान्य दिनों से कई गुना ज्यादा दर्ज किया गया।
पर्यटन और सेवा क्षेत्र को मिला बड़ा सहारा
धार्मिक आयोजनों के विस्तार का असर पर्यटन पर भी साफ दिख रहा है। अयोध्या, वाराणसी, प्रयागराज और मथुरा जैसे शहरों में बड़े आयोजनों के दौरान होटल लगभग फुल रहे। टैक्सी, ई-रिक्शा, टूर ऑपरेटर और खानपान कारोबारियों की आमदनी में भी इजाफा हुआ। प्रशासन का कहना है कि सुरक्षित और व्यवस्थित आयोजनों से श्रद्धालुओं और पर्यटकों की संख्या लगातार बढ़ रही है।
कारीगरों और महिलाओं को मिला सीधा फायदा
दीपोत्सव जैसे आयोजनों में लाखों दीयों की मांग से कुम्हारों को बड़े ऑर्डर मिले। देव दीपावली और मेलों में हस्तशिल्प व पूजा सामग्री की बिक्री बढ़ी। नवरात्र और दुर्गा पूजा के दौरान मूर्तिकारों, पंडाल बनाने वालों और लाइटिंग से जुड़े कामगारों को खूब काम मिला। महिला स्वयं सहायता समूहों ने भी त्योहारों को कमाई का जरिया बनाया। दीये, मोमबत्ती, हर्बल गुलाल, प्रसाद पैकिंग और पारंपरिक खाद्य उत्पादों की बिक्री से ग्रामीण समूहों की आय बढ़ी और उनके सामान को शहरों में बाजार मिला।
पारंपरिक आयोजनों को भी मिले अवसर
प्रदेश में कई पुराने धार्मिक आयोजन अब बड़े स्तर पर होने लगे हैं। दीपोत्सव, देव दीपावली, रंगभरी एकादशी, कृष्ण जन्मोत्सव, कांवड़ यात्रा और गणेश महोत्सव जैसे कार्यक्रमों में बेहतर व्यवस्थाएं की गई हैं। इन्हें पर्यटन कैलेंडर से जोड़ने और बुनियादी सुविधाएं बढ़ाने से बाहर से आने वाले लोगों की संख्या में इजाफा हुआ है।
जनप्रतिनिधियों की सक्रिय भूमिका
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में सांसद, विधायक और स्थानीय प्रतिनिधि आयोजन समितियों के साथ मिलकर तैयारियों की समीक्षा कर रहे हैं। सड़क, रोशनी, सफाई, पेयजल और बैरिकेडिंग जैसी व्यवस्थाओं पर पहले से काम होने लगा है, जिससे अव्यवस्था कम हुई और आयोजन ज्यादा व्यवस्थित हुए।
मौसमी रोजगार का बड़ा जरिया बने त्योहार
आर्थिक जानकार मानते हैं कि अब त्योहार केवल धार्मिक या सांस्कृतिक कार्यक्रम नहीं रहे, बल्कि मौसमी आर्थिक उछाल का अहम हिस्सा बन चुके हैं। टेंट हाउस, साउंड सिस्टम, सजावट, सुरक्षा सेवाएं और अस्थायी श्रम बाजार में बड़े पैमाने पर काम मिलता है। होटल, परिवहन और खानपान क्षेत्र को भी सीधा फायदा होता है।






