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यूपी : राजकीय पक्षी सारस के संरक्षण को अहम कदम…मैनपुरी-इटावा में बनेगा ‘सारस सर्किट’

इको टूरिज्म को बढ़ावा देने की तैयारी, वेटलैंड क्षेत्रों में पर्यटन सुविधाएं विकसित होंगी, स्थानीय लोगों को मिलेगा रोजगार का मौका

लखनऊ, 6 मार्च 2026:

प्रदेश सरकार राजकीय पक्षी सारस के संरक्षण और इको टूरिज्म को बढ़ावा देने के लिए मैनपुरी और इटावा जिलों में सारस सर्किट विकसित करने जा रही है। इस योजना के तहत दोनों जिलों के प्रमुख वेटलैंड क्षेत्रों को पर्यटन और पक्षी संरक्षण के लिहाज से तैयार किया जाएगा।

सारस सर्किट के अंतर्गत मैनपुरी जिले के किर्थुआ, सहस, कुर्रा जरावां, सौज और समन वेटलैंड के साथ इटावा जिले के सरसई नावर और परौली रामायण वेटलैंड क्षेत्र को शामिल किया गया है। इन इलाकों में सारस पक्षियों के संरक्षण के साथ इको टूरिज्म की गतिविधियां भी शुरू की जाएंगी, जिससे स्थानीय पर्यटन को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।

वन विभाग और यूपी इको टूरिज्म विकास बोर्ड इस परियोजना पर काम कर रहे हैं। योजना का मकसद वेटलैंड्स और सारस पक्षियों की सुरक्षा के साथ स्थानीय लोगों के लिए आय और रोजगार के अवसर तैयार करना भी है।

टूरिस्ट सुविधाएं बढ़ाने की योजना

सारस पक्षी दुनिया में लंबी उड़ान के लिए जाना जाता है और उत्तर प्रदेश का राजकीय पक्षी भी है। इसका मुख्य आवास मैनपुरी, इटावा, एटा और अलीगढ़ के वेटलैंड क्षेत्रों में पाया जाता है। इसी वजह से सरकार इन क्षेत्रों को ध्यान में रखते हुए सारस सर्किट विकसित कर रही है।

परियोजना के तहत वेटलैंड्स के आसपास प्रवेश द्वार, व्यू प्वाइंट, डेक, बोटिंग स्पॉट और बटरफ्लाई गार्डन बनाए जाएंगे। इसके साथ ही सोलर लाइटिंग, इंटरप्रिटेशन सेंटर और पार्किंग जैसी सुविधाएं भी विकसित की जाएंगी। पर्यटकों के लिए सूचना केंद्र, ईको टॉयलेट ब्लॉक, इंटरैक्टिव साइनेज, फूड कियोस्क और ओडीओपी उत्पादों व स्मृति चिन्ह की दुकानों की भी व्यवस्था की जाएगी। इससे आने वाले पर्यटक सारस के प्राकृतिक आवास को करीब से देख और समझ सकेंगे।

पर्यावरण संरक्षण को भी मिलेगा बढ़ावा

यह पहल सिर्फ सारस पक्षी ही नहीं बल्कि ग्रे हेरॉन, ओपन बिल्ड स्टॉर्क जैसे अन्य पक्षियों के संरक्षण में भी मददगार होगी। वेटलैंड क्षेत्रों के संरक्षण से भूजल स्तर को बेहतर बनाए रखने और पर्यावरण संतुलन को मजबूत करने में भी सहारा मिलेगा।

इको टूरिज्म गतिविधियों के शुरू होने से स्थानीय समुदाय को रोजगार के नए मौके मिलेंगे। साथ ही यहां आने वाले पर्यटकों और स्थानीय लोगों में प्रकृति और पर्यावरण के प्रति जागरूकता भी बढ़ेगी। सरकार का मानना है कि सारस सर्किट के विकास से क्षेत्र की जैव विविधता को सुरक्षित रखने और सतत विकास की दिशा में भी सकारात्मक असर दिखाई देगा।

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