लखनऊ, 8 मई 2026:
राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) की वर्ष 2024 रिपोर्ट में उत्तर प्रदेश की कानून व्यवस्था की स्थिति कई बड़े राज्यों की तुलना में बेहतर दिखाई दी है। पुलिस महानिदेशक राजीव कृष्ण ने कहा कि किसी भी राज्य में अपराध की वास्तविक स्थिति समझने के लिए क्राइम रेट सबसे अहम और वैज्ञानिक पैमाना माना जाता है। राष्ट्रीय क्राइम रेट 252.3 के मुकाबले उत्तर प्रदेश का क्राइम रेट 180.2 दर्ज किया गया, जो राष्ट्रीय औसत से काफी कम है।
एनसीआरबी रिपोर्ट के मुताबिक देश की करीब 17 फीसदी आबादी उत्तर प्रदेश में रहती है, इसके बावजूद कुल अपराध दर के मामले में प्रदेश 18वें स्थान पर है। हत्या के मामलों में यूपी 29वें, हत्या के प्रयास में 26वें और दुष्कर्म के मामलों में 24वें स्थान पर दर्ज हुआ। वहीं डकैती और फिरौती के लिए अपहरण जैसे मामलों में प्रदेश सबसे निचले पायदान यानी 36वें स्थान पर रहा।

रिपोर्ट में महिलाओं के खिलाफ अपराधों में दोषसिद्धि दर को लेकर उत्तर प्रदेश की स्थिति सबसे मजबूत बताई गई है। राज्य में महिलाओं के खिलाफ अपराध करने वालों को सजा मिलने की दर 76.6 फीसदी रही, जो देश में सबसे ज्यादा है। तुलना में पश्चिम बंगाल में यह दर 1.6 फीसदी, कर्नाटक में 4.8 फीसदी, तेलंगाना में 14.8 फीसदी और केरल में 17 फीसदी दर्ज की गई।
रिपोर्ट के अनुसार महिलाओं की मर्यादा भंग से जुड़े अपराधों की दर उत्तर प्रदेश में 18.6 रही, जबकि तेलंगाना में 52.8 और पश्चिम बंगाल में 39.5 दर्ज की गई। हत्या के मामलों की दर भी यूपी में प्रति लाख आबादी पर 1.3 रही, जो कई राज्यों से कम है।
डीजीपी राजीव कृष्ण ने कहा कि उत्तर प्रदेश पुलिस हर छोटी शिकायत को गंभीरता से लेती है। डिजिटल प्लेटफॉर्म पर आने वाली शिकायतों पर भी कार्रवाई की जाती है और जरूरत पड़ने पर उन्हें एफआईआर में बदला जाता है। उनके मुताबिक ज्यादा पंजीकरण का मतलब अपराध बढ़ना नहीं, बल्कि पुलिस व्यवस्था का ज्यादा सुलभ और पारदर्शी होना है।

रिपोर्ट में महानगरों की चार्जशीट दर का भी जिक्र किया गया है। महिलाओं के खिलाफ अपराधों में कानपुर की चार्जशीट दर 84.4 फीसदी और लखनऊ की 83.7 फीसदी दर्ज हुई। जेलों की स्थिति को लेकर भी यूपी की तस्वीर बेहतर बताई गई है। महिला जेलों में अधिभोग दर 36.7 फीसदी रही, जबकि केंद्रीय जेलों की अधिभोग दर 74.3 फीसदी दर्ज की गई, जो पंजाब और केरल जैसे राज्यों से कम है।
डीजीपी ने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अपराध और अपराधियों के खिलाफ जीरो टॉलरेंस नीति अब जमीन पर असर दिखा रही है। पिछले नौ वर्षों में पुलिसिंग सिस्टम में कई बदलाव किए गए, जिनमें आधुनिक थाने, एंटी रोमियो स्क्वॉड, महिला हेल्प डेस्क, फास्ट ट्रैक कोर्ट और संगठित अपराध के खिलाफ सख्त कार्रवाई शामिल है।






