न्यूज डेस्क, 31 मई 2026:
पश्चिम एशिया में चार महीनों से जारी संघर्ष एक बार फिर खतरनाक मोड़ लेता दिख रहा है।अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कम करने तथा युद्धविराम को स्थायी बनाने की तमाम कूटनीतिक कोशिशों के बावजूद हालात तेजी से बदल रहे हैं। दक्षिणी ईरान में अमेरिकी सैन्य कार्रवाई और उसके बाद ईरान द्वारा अमेरिकी ड्रोन मार गिराने के दावे ने क्षेत्र में तनाव को और बढ़ा दिया है।
ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (आईआरजीसी) ने रविवार को दावा किया कि उसकी वायु रक्षा इकाइयों ने अमेरिकी एमक्यू-1 ड्रोन को मार गिराया है। आईआरजीसी के अनुसार यह ड्रोन ईरान के क्षेत्रीय जलक्षेत्र में प्रवेश कर गया था। इसके बाद उसे तत्काल निशाना बनाया गया। संगठन ने यह भी कहा कि यदि अमेरिका युद्धविराम का उल्लंघन करता है तो ईरान के पास जवाबी कार्रवाई का वैध और निश्चित अधिकार सुरक्षित है।
आईआरजीसी ने इससे पहले अमेरिकी एमक्यू-9 ड्रोन को मार गिराने का दावा भी किया था। स्थानीय मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक ईरानी बलों ने एक ऐसे लड़ाकू विमान पर भी फायरिंग की जो कथित तौर पर देश के हवाई क्षेत्र में घुस आया था। हालांकि इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।
दूसरी ओर अमेरिकी सेंट्रल कमांड (सेंटकॉम) ने दक्षिणी ईरान में हाल ही में की गई सैन्य कार्रवाई को आत्मरक्षा का कदम बताया है। सेंटकॉम के प्रवक्ता टिम हॉकिन्स ने कहा कि अमेरिकी बलों ने मिसाइल लॉन्च साइटों और बारूदी सुरंगें बिछाने की कोशिश कर रही नौकाओं को निशाना बनाया। उनके मुताबिक यह कार्रवाई क्षेत्र में तैनात अमेरिकी सैनिकों और हितों की सुरक्षा के लिए आवश्यक थी।
सैन्य गतिविधियों के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का बयान भी चर्चा का विषय बना हुआ है। ट्रंप ने कहा कि अमेरिका और ईरान एक बहुत अच्छे समझौते के करीब हैं लेकिन यदि वॉशिंगटन को अपनी अपेक्षाओं के अनुरूप परिणाम नहीं मिला तो वह दूसरे तरीके से इस मुद्दे को समाप्त करेगा।
लारा ट्रंप को दिए एक साक्षात्कार में ट्रंप ने कहा कि जल्दबाजी में किया गया समझौता टिकाऊ नहीं होता। उन्होंने दावा किया कि अमेरिका धीरे-धीरे अपने लक्ष्यों की ओर बढ़ रहा है और वर्तमान परिस्थितियों में उसके पास मजबूत स्थिति है। ट्रंप ने यह भी कहा कि यदि कूटनीतिक प्रयास विफल होते हैं तो सैन्य विकल्प को भी नजरअंदाज नहीं किया जाएगा।
ट्रंप ने ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि तेहरान भले ही परमाणु हथियार विकसित न करने की बात कर रहा हो लेकिन भविष्य में ऐसे हथियारों की खरीद की संभावना को लेकर भी स्पष्ट प्रतिबंध जरूरी है। लगातार बढ़ती सैन्य गतिविधियों और तीखे बयानों के बीच पश्चिम एशिया में शांति की उम्मीदें फिलहाल कमजोर पड़ती नजर आ रही हैं। दुनिया की निगाहें अब इस बात पर टिकी हैं कि क्या दोनों पक्ष बातचीत के रास्ते आगे बढ़ेंगे या क्षेत्र एक और बड़े टकराव की ओर बढ़ेगा।






