Uttarakhand

उत्तराखंड: पहाड़ों में रोजगार की नई कहानी बने ‘होमस्टे’…स्थानीय लोगों को मिला हक, बदल गए ये नियम

उत्तराखंड सरकार की नई होमस्टे नीति से अब केवल स्थानीय निवासियों को सीधा लाभ मिलेगा, जिससे रोजगार बढ़ेगा और पलायन रुकेगा। बाहरी लोगों पर रोक और सब्सिडी व लोन जैसी सुविधाओं से पहाड़ी अर्थव्यवस्था को नई मजबूती मिलने की उम्मीद है

योगेंद्र मलिक

देहरादून, 21 जनवरी 2026:

उत्तराखंड के हिमालयी गांव, जो कभी पलायन और बेरोजगारी से जूझ रहे थे, आज होमस्टे योजना के चलते नई ऊर्जा से भरते नजर आ रहे हैं। राज्य सरकार की इस योजना ने न केवल पर्यटन को बढ़ावा दिया है, बल्कि स्थानीय युवाओं को अपने गांव में ही स्वरोजगार का मजबूत साधन दिया है। कोरोना काल के बाद जब पहाड़ी अर्थव्यवस्था को गहरा झटका लगा था, तब होमस्टे गांवों के पुनर्जीवन का आधार बने।

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पर्यटन के साथ संस्कृति को भी बढ़ावा

होमस्टे केवल रहने की जगह नहीं हैं, बल्कि ये पहाड़ी संस्कृति, खानपान और जीवनशैली का अनुभव कराते हैं। पर्यटक यहां स्थानीय भोजन, लोकगीत, लोकनृत्य और प्राकृतिक जीवन को करीब से देखते हैं। पिथौरागढ़ से चमोली और कुमाऊं से गढ़वाल तक सैकड़ों होमस्टे सक्रिय हैं, जो ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत कर रहे हैं और युवाओं को अपनी माटी से जोड़ रहे हैं।

नई नियमावली से बदले नियम

उत्तराखंड सरकार ने पर्यटन क्षेत्र में बड़ा कदम उठाते हुए उत्तराखंड पर्यटन, यात्रा व्यवसाय, होमस्टे और बेड एंड ब्रेकफास्ट पंजीकरण नियमावली 2026 को मंजूरी दी है। इसके तहत होमस्टे योजना का लाभ अब केवल राज्य के स्थायी निवासियों को मिलेगा। बाहरी लोग अब होमस्टे के नाम पर छोटे गेस्ट हाउस नहीं चला सकेंगे और उन्हें व्यावसायिक बिजली और पानी की दरें चुकानी होंगी।

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शिकायतों के बाद सरकार का सख्त फैसला

पर्यटन सचिव धीरज सिंह गर्ब्याल के अनुसार, बीते वर्ष स्टेकहोल्डर्स की बैठक में यह मुद्दा सामने आया था कि बाहरी लोग होमस्टे के नाम पर सब्सिडी और टैक्स छूट का लाभ ले रहे थे। इससे असली लाभार्थी यानी स्थानीय लोग पीछे रह जाते थे। नई नीति का उद्देश्य इस गड़बड़ी को रोकना और स्थानीय निवासियों को प्राथमिकता देना है।

राज्य में होमस्टे की मौजूदा स्थिति

प्रदेश में फिलहाल छह हजार से अधिक होमस्टे पंजीकृत हैं। नैनीताल जिला इस मामले में सबसे आगे है, जहां 909 होमस्टे संचालित हो रहे हैं। जिले में कुल 995 होटल, रिसोर्ट और टेंट कॉलोनियां भी मौजूद हैं। पिछले पांच वर्षों में 660 नई पर्यटन इकाइयां शुरू हुई हैं, जो पर्यटन क्षेत्र के तेजी से विस्तार को दर्शाता है।

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सब्सिडी और लोन से आसान कारोबार

पर्यटन विभाग युवाओं को आर्थिक मदद भी दे रहा है। वीर चंद्र सिंह गढ़वाली पर्यटन स्वरोजगार योजना के तहत 33 प्रतिशत तक सब्सिडी दी जा रही है। वहीं पंडित दीन दयाल उपाध्याय होमस्टे विकास योजना में 15 लाख रुपये तक का लोन उपलब्ध है, जिसमें 50 प्रतिशत राशि सरकार सब्सिडी के रूप में देती है। इसके अलावा 30 लाख रुपये तक ऋण की सुविधा भी दी जा रही है, जिसमें ब्याज का हिस्सा पर्यटन विभाग वहन करेगा।

बाहरी निवेशकों के लिए बेड एंड ब्रेकफास्ट विकल्प

नई नीति में बाहरी निवेशकों को पूरी तरह बाहर नहीं किया गया है। वे नगर निगम, नगर पालिका और बड़े पर्यटन शहरों में बेड एंड ब्रेकफास्ट के रूप में पंजीकरण करा सकते हैं। इसमें एक से छह कमरे संचालित करने की अनुमति होगी, लेकिन व्यावसायिक दरें और टैक्स लागू होंगे। इससे स्थानीय संस्कृति सुरक्षित रहेगी और निवेश का संतुलन भी बना रहेगा।

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स्थानीय सशक्तिकरण की ओर बढ़ता उत्तराखंड

नई होमस्टे नीति से स्थानीय युवाओं को रोजगार मिलेगा, गांव आबाद होंगे और पलायन पर रोक लगेगी। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे पर्यटन से होने वाली आय सीधे स्थानीय परिवारों तक पहुंचेगी। फिलहाल राज्य के स्थायी निवासी इस फैसले से उत्साहित हैं और होमस्टे को अपने भविष्य का मजबूत आधार मान रहे हैं।

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