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वट सावित्री व्रत : पति की लंबी उम्र की कामना से ऐसे जुड़ा पवित्र ‘वट वृक्ष’, जानें इसका महत्व

अखंड सौभाग्य, अटूट दांपत्य और प्रेम का प्रतीक है वट सावित्री व्रत, घर में होता है सुख-समृद्धि का वास

न्यूज डेस्क, 9 मई 2026:

16 मई को पड़ने वाला वट सावित्री व्रत सुहागिन महिलाओं के लिए बेहद खास माना जाता है। हिंदू धर्म में इस व्रत को पति की लंबी उम्र, अखंड सौभाग्य और सुखी वैवाहिक जीवन का प्रतीक माना जाता है। मान्यता है कि जो महिलाएं श्रद्धा और विधि-विधान से यह व्रत रखती हैं उनके पति पर आने वाले संकट टल जाते हैं और यमराज स्वयं उनकी रक्षा करते हैं। यही वजह है कि हर साल ज्येष्ठ अमावस्या के दिन महिलाएं निर्जला व्रत रखकर वट यानी बरगद की पूजा करती हैं।

क्यों है इतना महत्व वट वृक्ष (बरगद) का!

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार वट वृक्ष में त्रिदेवों का वास माना गया है। इसकी जड़ों में ब्रह्मा, तने में भगवान विष्णु और शाखाओं में भगवान शिव का वास बताया गया है वहीं नीचे की ओर झुकी शाखाओं को माता सावित्री का स्वरूप माना जाता है। इस कारण वट वृक्ष की पूजा को बेहद शुभ और फलदायी माना जाता है। मान्यता है कि इसकी पूजा करने से घर में सुख-समृद्धि आती है, संतान सुख की प्राप्ति होती है और दांपत्य जीवन में प्रेम बना रहता है।

वट सावित्री की पौराणिक कथा

वट सावित्री व्रत से जुड़ी पौराणिक कथा भी बेहद प्रेरणादायक मानी जाती है। कथा के अनुसार ज्येष्ठ अमावस्या के दिन सत्यवान की मृत्यु हो गई थी । कहते है कि सत्यवान अपनी पत्नी सावित्री संग जंगल में बरगद के पेड़ पर लकड़ियां काट रहे थे। उस समय उनको मूर्छा आने से वो उस वट वृक्ष से नीचे गिर गए और जब यमराज उनके प्राण लेकर जाने लगे तब उनकी पत्नी सावित्री अपने पतिव्रत, तप और अटूट प्रेम के बल पर यमराज के पीछे-पीछे चल पड़ीं। सावित्री की निष्ठा और समर्पण से प्रसन्न होकर यमराज ने सत्यवान को दोबारा उस वट वृक्ष के नीचे जीवनदान दिया जहां सत्यवान का शरीर पड़ा था। इसलिए इस व्रत में बरगद की पूजा की जाती है।

Vat Savitri Vrat Importance of the Banyan Tree (1)

ऐसे पूरा करें व्रत, घर में आएगी सुख-समृद्धि

इस दिन सुहागिन महिलाएं सुबह स्नान के बाद व्रत का संकल्प लेती हैं और पूरे दिन निर्जला उपवास रखती हैं फिर बरगद के पेड़ के नीचे जाकर पूजा-अर्चना करती हैं, पेड़ के चारों ओर कच्चा धागा बांधती हैं और सावित्री-सत्यवान की कथा सुनती हैं। पूजा के बाद पति की लंबी उम्र और परिवार की खुशहाली की कामना की जाती है। मान्यता है कि श्रद्धा से किया गया यह व्रत वैवाहिक जीवन में सुख-शांति और समृद्धि लेकर आता है।

नोट: यह जानकारी धार्मिक मान्यताओं और परंपराओं पर आधारित है। किसी भी मान्यता या उपाय को अपनाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें।

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