Uttar Pradesh

International Women’s Day: बेटियां अब रात की पाली में भी निडर… महिला दिवस पर CM योगी की ‘पाती’, सुरक्षा से स्वावलंबन तक गिनाईं उपलब्धियां

विशेष चिट्ठी में मुख्यमंत्री ने महिलाओं की सुरक्षा, सम्मान और आत्मनिर्भरता को सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता बताते हुए पिछले वर्षों में हुए बदलावों और योजनाओं का किया उल्लेख

लखनऊ, 8 मार्च 2026:

अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ ने प्रदेशवासियों के नाम एक विशेष चिट्ठी साझा की। ‘योगी की पाती’ शीर्षक से लिखे इस संदेश में उन्होंने महिलाओं की सुरक्षा, सम्मान और आत्मनिर्भरता को सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता बताते हुए पिछले वर्षों में हुए बदलावों और योजनाओं का उल्लेख किया।

मुख्यमंत्री ने अपने पत्र की शुरुआत करते हुए कहा कि सशक्त समाज के निर्माण में महिलाओं की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण है। सरकार आधी आबादी की सुरक्षा, गरिमा तथा आत्मनिर्भरता के लिए पूरी प्रतिबद्धता के साथ काम कर रही है। उन्होंने प्रदेशवासियों को 2017 से पहले की स्थिति याद दिलाते हुए लिखा कि उस समय शाम होते ही बेटियां घर से बाहर निकलने में घबराती थीं और स्कूल-कॉलेज जाने में भी डर लगता था। महिलाओं के साथ अपराध की घटनाएं आम थीं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि आज स्थिति बदली है और बेटियां अब रात की पाली में भी निडर होकर काम कर रही हैं। उनके अनुसार यह परिवर्तन स्पष्ट नीति और साफ नीयत का परिणाम है। सरकार द्वारा चलाए गए ‘मिशन शक्ति’ और ‘एंटी रोमियो’ जैसे अभियानों ने महिलाओं के विरुद्ध अपराध करने वालों के मन में भय पैदा किया है।

उन्होंने महिला कल्याण से जुड़ी विभिन्न योजनाओं का उल्लेख करते हुए बताया कि मुख्यमंत्री कन्या सुमंगला योजना बेटियों के जन्म से लेकर शिक्षा तक हर चरण में सहयोग कर रही है। वहीं मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना के माध्यम से गरीब परिवारों की बेटियों का विवाह सम्मान के साथ संभव हो पा रहा है।

मुख्यमंत्री ने यह भी बताया कि पुष्टाहार योजना के जरिए गर्भवती और धात्री महिलाओं को बेहतर पोषण दिया जा रहा है। इससे आने वाली पीढ़ियों के स्वास्थ्य में सकारात्मक बदलाव देखने को मिल रहा है। निराश्रित महिलाओं की पेंशन राशि को 1,000 रुपये से बढ़ाकर 1,500 रुपये किए जाने का भी उन्होंने उल्लेख किया।

अपने संदेश में उन्होंने कहा कि इन प्रयासों का ही परिणाम है कि छात्राओं के ड्रॉपआउट रेट में उल्लेखनीय कमी आई है। मातृ और शिशु मृत्यु दर में भी बड़ी गिरावट दर्ज की गई है। शिक्षा से लेकर रोजगार और उद्यमिता तक बेटियों को समान अवसर मिल रहे हैं। मुख्यमंत्री ने स्वयं सहायता समूहों की भूमिका का जिक्र करते हुए बताया कि प्रदेश के सभी विकास खंडों में इनका विस्तार हो चुका है। लगभग 40 हजार बीसी सखियां हजारों करोड़ रुपये के वित्तीय लेनदेन को आत्मविश्वास के साथ संभाल रही हैं।

उन्होंने कहा कि ‘लखपति दीदी’, ‘ड्रोन दीदी’, ‘स्वास्थ्य सखी’ और ‘सूर्य सखी’ जैसी पहलें महिलाओं को आर्थिक रूप से मजबूत बना रही हैं। पत्र के अंत में मुख्यमंत्री ने नारी सम्मान को समाज की सर्वोच्च प्राथमिकता बताते हुए लिखा कि प्रदेश की बेटियों को अब न डरने की जरूरत है और न ही छोटे सपने देखने की। उन्होंने सभी प्रदेशवासियों को अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं दीं।

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