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स्वास्थ्य व शिक्षा विभाग में एक साथ की नौकरी… फर्जीवाड़ा साबित, 7 साल की कैद

एक ही मार्कशीट के आधार पर स्वास्थ्य विभाग और शिक्षा विभाग में पाई थी नौकरी, 17 साल चली सुनवाई के बाद कोर्ट का फैसला

बाराबंकी, 11 मार्च 2026:

एक ही समय में दो अलग-अलग सरकारी विभागों से वेतन लेने के मामले में मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी सुधा सिंह की अदालत ने आरोपी जयप्रकाश सिंह को सात साल कारावास की सजा सुनाई है। अदालत ने यह भी कहा कि सरकार चाहे तो आरोपित से वेतन के रूप में ली गई रकम की वसूली कर सकती है।

अभियोजन पक्ष के अनुसार, सतरिख क्षेत्र के नरौली निवासी जयप्रकाश सिंह को प्रतापगढ़ जिले की सांगीपुर पीएचसी में नॉन मेडिकल असिस्टेंट पद पर नियुक्ति मिली थी। इसके बाद उसी शैक्षिक प्रमाणपत्र के आधार पर बाराबंकी जिले में सहायक अध्यापक के पद पर भी नौकरी हासिल कर ली। बाद में वह हरख ब्लॉक के नरौली प्राथमिक विद्यालय में प्रधानाध्यापक के पद तक पहुंच गया।

इस मामले में 20 फरवरी 2009 को आवास विकास कॉलोनी निवासी प्रभात सिंह ने कोतवाली नगर में मुकदमा दर्ज कराया था। शिकायत के बाद जांच में दोनों विभागों से मिले दस्तावेजों में सामने आया कि आरोपित एक ही समय में स्वास्थ्य विभाग और शिक्षा विभाग से वेतन ले रहा था। इसी आधार पर तत्कालीन बेसिक शिक्षा अधिकारी ने 1 अक्टूबर 2008 को उसे निलंबित कर दिया था।

सुनवाई के दौरान जयप्रकाश सिंह ने अदालत में कहा कि उसने प्रतापगढ़ में नॉन मेडिकल असिस्टेंट (NMA) के पद से त्यागपत्र दे दिया था। हालांकि अभियोजन पक्ष ने इसे गलत बताते हुए दोनों विभागों से वेतन मिलने के प्रमाण पेश किए।

अदालत में बाराबंकी के तत्कालीन बेसिक शिक्षा अधिकारी प्रवीणमणि त्रिपाठी और सांगीपुर पीएचसी में 2003 से 2015 तक तैनात रहे मेडिकल ऑफिसर डॉ. सुरेश त्रिपाठी ने गवाही दी। दस्तावेजी साक्ष्यों और गवाहों के आधार पर अदालत ने आरोपित को दोषी मानते हुए सात साल की सजा सुनाई।

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