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अंतरराष्ट्रीय वन दिवस पर अरण्य समागम में पहुंचे योगी, कहा..हरित विकास में यूपी की नई पहचान बनी

विरासत पेड़ों के संरक्षण व जनभागीदारी पर जोर वन्यजीव संघर्ष व वानिकी क्षेत्र में बेहतर कार्य करने वालों को मिला सम्मान, किताबों का विमोचन किया, जुलाई में वन महोत्सव मनाने का ऐलान

लखनऊ, 21 मार्च 2026:

अंतरराष्ट्रीय वन दिवस के मौके पर इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में राष्ट्रीय वानिकी संवाद का उद्घाटन हुआ। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ शामिल हुए। इस दौरान उन्होंने प्रकृति संरक्षण को लेकर लोगों से जुड़ने और इसे जन आंदोलन बनाने पर जोर दिया।

कार्यक्रम में वानिकी क्षेत्र में काम करने वाले लोगों को सम्मानित किया गया और कॉफी टेबल बुक का विमोचन हुआ। मुख्यमंत्री ने वन विभाग की प्रदर्शनी भी देखी। मुख्यमंत्री ने कहा कि आज पूरी दुनिया जलवायु परिवर्तन और पर्यावरण असंतुलन जैसी चुनौतियों से जूझ रही है। ऐसे समय में वनों की अहमियत और बढ़ जाती है। उन्होंने कहा कि भारतीय परंपरा में प्रकृति को मां का दर्जा दिया गया है, इसलिए उसकी रक्षा करना हर व्यक्ति की जिम्मेदारी है।

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उन्होंने कहा कि जब कोई अभियान जन आंदोलन बन जाता है तो उसकी कामयाबी तय हो जाती है। बीते 9 साल में प्रदेश में वनाच्छादन बढ़ाने में जो सफलता मिली है, उसका आधार यही जनभागीदारी रही है। कार्यक्रम की थीम फॉरेस्ट एंड इकोनॉमिक्स रखी गई थी। मुख्यमंत्री ने कहा कि पेड़ों का महत्व हमारी परंपरा में बहुत पहले से बताया गया है। वन, जल और वायु एक-दूसरे से जुड़े हैं और इनका संतुलन ही जीवन को बनाए रखता है।

उन्होंने बताया कि 2017 में वन महोत्सव के दौरान जहां करीब 5.5 करोड़ पौधे लगाए गए थे, वहीं पिछले साल एक ही दिन में 37 करोड़ पौधरोपण हुआ। इस साल भी 35 करोड़ से ज्यादा पौधे लगाने का लक्ष्य रखा गया है, जो बढ़कर 40 से 45 करोड़ तक जा सकता है। बीते 9 साल में कुल 242 करोड़ पौधे लगाए गए हैं और प्रदेश का वनाच्छादन करीब 10 फीसदी तक पहुंचा है।

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रामसर साइट को लेकर उन्होंने कहा कि 2017 में प्रदेश में सिर्फ एक साइट थी, जो अब बढ़कर 11 हो गई है। आगे इसे 100 तक ले जाने की तैयारी है। उन्होंने कहा कि रामसर साइट घोषित होने से इन इलाकों का संरक्षण आसान होता है और अतिक्रमण पर भी रोक लगती है। गंगा, यमुना और सरयू नदियों के किनारे बड़े पैमाने पर पौधरोपण किया गया है। इसके साथ ही हर जिले में एक नदी के पुनर्जीवन का काम पूरा किया गया है। एक्सप्रेसवे और राजमार्गों के किनारे भी पौधे लगाए जा रहे हैं।

दुधवा नेशनल पार्क में इको टूरिज्म को बढ़ावा देने के लिए काम किया गया है और कनेक्टिविटी बेहतर की गई है। प्रदेश में 2,467 ग्रीन इकोनॉमी से जुड़े उद्योग स्थापित किए गए हैं। प्रदेश देश का पहला राज्य है जहां कार्बन क्रेडिट के तहत किसानों को भुगतान किया गया है। मानव-वन्यजीव संघर्ष को आपदा की श्रेणी में रखा गया है, ताकि प्रभावित लोगों को मदद मिल सके।

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डॉल्फिन संरक्षण का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि नमामि गंगे परियोजना के बाद इनकी संख्या बढ़ी है। देश में अब 6,327 डॉल्फिन हैं, जिनमें से 2,397 उत्तर प्रदेश में हैं। सरकार ने सामाजिक वानिकी के लिए 800 करोड़, गौशाला प्रबंधन के लिए 220 करोड़ और क्लीन एयर मैनेजमेंट के लिए 194 करोड़ रुपये का प्रावधान किया है। रानीपुर टाइगर रिजर्व के लिए 50 करोड़ का कॉर्पस फंड दिया गया है और वानिकी विश्वविद्यालय के लिए भी बजट तय किया गया है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि पुराने पेड़ों को विरासत वृक्ष के रूप में संरक्षित किया जाएगा। 100 साल से अधिक पुराने पेड़ों को चिन्हित कर उन्हें बचाने के लिए जागरूकता अभियान चलाए जाएंगे। जुलाई माह में वन महोत्सव मनाया जाएगा।

इस मौके पर वन और पर्यावरण विभाग के मंत्री अरुण कुमार सक्सेना, राज्य मंत्री केपी मलिक, प्रमुख सचिव वी हेकाली झिमोमी, प्रधान मुख्य वन संरक्षक और विभागाध्यक्ष सुनील चौधरी, प्रधान मुख्य वन संरक्षक वन्यजीव अनुराधा वेमुरी, बी प्रभाकर और ललित वर्मा सहित विभाग के कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।

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