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लखनऊ को मिला क्षेत्रीय मौसम विज्ञान केंद्र का दर्जा, सीएम ने कहा… अब अलर्ट बचा रहे जान-माल

क्षेत्रीय मौसम विज्ञान केंद्र बनने से यूपी और उत्तराखंड की निगरानी होगी और मजबूत, सीएम ने आपदाओं में जनहानि घटने का श्रेय अर्ली वार्निंग सिस्टम को दिया, केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने कहा, 12 साल में मौसम पूर्वानुमान ढांचे में हुआ बड़ा विस्तार

लखनऊ, 8 जून 2026:

लखनऊ के इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में सोमवार को मौसम विज्ञान केंद्र को क्षेत्रीय मौसम विज्ञान केंद्र का दर्जा मिल गया। इस अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि एक समय ऐसा था जब मौसम विभाग की भविष्यवाणियों पर लोगों का भरोसा नहीं बन पाता था, लेकिन अब तकनीक और बेहतर निगरानी तंत्र की वजह से आंधी, बारिश और अन्य मौसम संबंधी घटनाओं का अलर्ट कई घंटे पहले लोगों के मोबाइल फोन तक पहुंच रहा है। इससे जान-माल का नुकसान नहीं हो रहा है।

12 साल पहले वाले हालात अब बदल चुके

मुख्यमंत्री ने कहा कि करीब 12 साल पहले मौसम की जानकारी अक्सर वास्तविक स्थिति से मेल नहीं खाती थी। यदि बारिश का पूर्वानुमान जारी होता तो बारिश नहीं होती थी, लेकिन अब हालात बदल चुके हैं। उन्होंने इसके लिए केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह और केंद्र सरकार की पहल की सराहना की। मुख्यमंत्री ने कहा कि आज आंधी और बारिश जैसी घटनाओं की सूचना करीब तीन घंटे पहले लोगों तक पहुंच रही है, जिससे जान-माल की सुरक्षा में मदद मिल रही है।

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मुख्यमंत्री ने 13 मई को प्रदेश में आई आपदा का जिक्र करते हुए कहा कि उस घटना में 100 से अधिक लोगों की मौत हुई थी। इसके बाद अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक की गई। जांच में सामने आया कि कई स्थानों पर स्थानीय स्तर पर आवश्यक सावधानियां नहीं बरती गई थीं। उन्होंने कहा कि तकनीक के साथ-साथ जनजागरूकता भी उतनी ही जरूरी है।

Lucknow Upgraded to Regional Meteorological Centre Achievements (1)

अर्ली वार्निंग सिस्टम से घटी जनहानि

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि प्रदेश में अर्ली वार्निंग सिस्टम को लगातार मजबूत किया गया है। उन्होंने सहारनपुर की एक घटना का उल्लेख करते हुए बताया कि मंदिर में कीर्तन के दौरान मौसम विभाग का अलर्ट मिला था, जिसके बाद लोगों को वहां से हटाया गया। इससे बड़ी जनहानि टल गई। उन्होंने कहा कि मिर्जापुर, सोनभद्र और चंदौली जैसे जिलों में मौसम संबंधी घटनाओं से हर साल 100 से 150 लोगों की मौत हो जाती थी। अब यह संख्या घटकर दर्जनभर के आसपास रह गई है। उन्होंने कहा कि अधिकांश घटनाओं को सावधानी बरतकर रोका जा सकता है, लेकिन कई बार लोग चेतावनी के बावजूद जोखिम उठाते हैं।

मौसम बदल रहा, खाद्यान्न संकट की आशंका

मुख्यमंत्री ने कहा कि जलवायु परिवर्तन का असर साफ दिखाई दे रहा है। मौसम के चक्र में बदलाव आया है और लगभग हर मौसम अपने तय समय से करीब एक महीने पीछे खिसकता महसूस हो रहा है। उन्होंने आशंका जताई कि यदि यह क्रम जारी रहा तो भविष्य में खाद्यान्न उत्पादन पर असर पड़ सकता है। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश देश की सबसे बड़ी आबादी वाला राज्य है। देश की लगभग 11 प्रतिशत कृषि भूमि यहां है और प्रदेश अकेले देश के करीब 21 प्रतिशत खाद्यान्न उत्पादन में योगदान देता है। ऐसे में किसानों तक सटीक मौसम जानकारी पहुंचना बेहद जरूरी है।

अपना सेटेलाइट होने के प्रयास जारी

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार चाहती है कि प्रदेश के पास अपना उपग्रह भी हो, जिससे मौसम संबंधी सूचनाएं और अधिक सटीकता के साथ प्राप्त की जा सकें। उन्होंने बताया कि इस संबंध में भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन से भी चर्चा की गई थी। मुख्यमंत्री ने कहा कि बिजली गिरने और प्राकृतिक आपदाओं से होने वाली मौतों को देखते हुए राज्य सरकार लगातार राहत और सहायता योजनाओं को मजबूत कर रही है। मुख्यमंत्री कृषक दुर्घटना बीमा योजना का दायरा बढ़ाते हुए अब केवल किसानों ही नहीं, बल्कि बंटाईदारों और उनके परिवारों को भी इसमें शामिल किया गया है।

Lucknow Upgraded to Regional Meteorological Centre Achievements (2)

लखनऊ केंद्र से यूपी और उत्तराखंड की होगी निगरानी

केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि अब तक देश में सात क्षेत्रीय मौसम विज्ञान केंद्र थे, जिनका संचालन मुख्य रूप से दिल्ली से होता था। बढ़ती जरूरतों को देखते हुए व्यवस्था का विस्तार किया गया है। नए ढांचे के तहत जम्मू स्थित केंद्र जम्मू, लद्दाख और हिमाचल प्रदेश की निगरानी करेगा, जबकि लखनऊ स्थित क्षेत्रीय मौसम विज्ञान केंद्र उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के मौसम पूर्वानुमान और निगरानी की जिम्मेदारी संभालेगा। डॉ. सिंह ने कहा कि भविष्य की जरूरतों को देखते हुए लगभग 40 से 50 हजार वर्ग मीटर भूमि पर नए कार्यालय और मुख्यालय के विकास की योजना है। इसके साथ ही पांच नए मौसम रडार भी स्थापित किए जाएंगे।

12 साल में मौसम निगरानी नेटवर्क का बड़ा विस्तार

डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि वर्ष 2014 में उत्तर प्रदेश में केवल एक डॉप्लर मौसम रडार था, जबकि उत्तराखंड में एक भी रडार उपलब्ध नहीं था। आज दोनों राज्यों में कई रडार स्थापित हो चुके हैं और प्रयागराज, बरेली तथा देवरिया समेत कई स्थानों पर नए रडार लगाने का काम चल रहा है। देश में पहले केवल 17 मौसम रडार थे, जिनकी संख्या अब बढ़कर 50 हो चुकी है। अगले दो वर्षों में यह संख्या 100 तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है। इससे मौसम की पल-पल की जानकारी उपलब्ध कराई जा सकेगी।

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि वर्ष 2014 में उत्तर प्रदेश में 59 ऑटोमेटिक वेदर स्टेशन थे, जो अब 107 हो चुके हैं। ऑटोमेटिक रेन गेज की संख्या 132 से बढ़कर 140 हो गई है। एयरपोर्ट ऑब्जर्वेटरी तीन से बढ़कर 11 हो चुकी हैं। लाइटनिंग डिटेक्शन नेटवर्क के तहत प्रदेश में सात केंद्र स्थापित किए गए हैं, जबकि पहले ऐसी कोई व्यवस्था नहीं थी।

क्षेत्रीय केंद्र बनने से बढ़ेगा दायरा

मौसम विज्ञान केंद्र को क्षेत्रीय केंद्र का दर्जा मिलने के बाद लखनऊ की भूमिका और जिम्मेदारियां बढ़ जाएंगी। इससे मौसम पूर्वानुमान, आपदा प्रबंधन, कृषि, विमानन और पर्यटन क्षेत्रों से जुड़ी सेवाओं को अधिक सटीक और प्रभावी बनाया जा सकेगा। उत्तर प्रदेश के साथ उत्तराखंड को भी इसका सीधा लाभ मिलेगा।

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