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लखनऊ में वकीलों पर कार्रवाई से गरमाई सियासत… अखिलेश ने भाजपा पर लगाए ये आरोप

अतिक्रमण विरोधी अभियान के दौरान वकीलों के चैंबर तोड़े जाने और कथित लाठीचार्ज पर सपा प्रमुख का हमला, कहा- अधिवक्ताओं पर डंडा चलाकर सरकार ने न्याय व्यवस्था का अपमान किया

लखनऊ, 18 मई 2026:

यूपी की राजधानी लखनऊ में रविवार को अतिक्रमण हटाने के दौरान वकीलों के चैंबर पर बुलडोजर कार्रवाई और उसके बाद हुए कथित लाठीचार्ज का मामला अब सियासी रंग ले चुका है। सपा मुखिया अखिलेश यादव ने इस मुद्दे को लेकर भाजपा सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर एक तस्वीर साझा करते हुए सरकार पर धार्मिक और लोकतांत्रिक मूल्यों के अपमान का आरोप लगाया।

अखिलेश यादव ने अपने पोस्ट में लिखा कि ‘श्रीरामचरितमानस’ भारतीय संस्कृति और मर्यादा का प्रतीक है, लेकिन भाजपा सरकार ने लखनऊ में जिस तरह उसका अपमान और तिरस्कार किया है, वह अक्षम्य है। उन्होंने भाजपा को अधर्मी बताते हुए कहा कि भाजपा नेताओं का असली धर्म सिर्फ पैसा है।क्षजनता अब इस राजनीति को हमेशा के लिए हटाने का मन बना चुकी है। उन्होंने यहां तक कहा कि भाजपाई प्रभु राम के भी सगे नहीं हैं।

सपा प्रमुख ने इससे पहले रविवार को भी इस कार्रवाई की कड़ी निंदा की थी। उन्होंने कहा कि वकीलों के लिए कोई वैकल्पिक व्यवस्था किए बिना उनके चैंबर तोड़ना और फिर अधिवक्ताओं पर लाठीचार्ज करना बेहद शर्मनाक है। अखिलेश ने सवाल उठाया कि जब अधिवक्ता ही अन्याय का शिकार होंगे तो आम नागरिक को न्याय कैसे मिलेगा।

उन्होंने भाजपा सरकार पर दोहरे मापदंड अपनाने का आरोप लगाते हुए कहा कि भाजपा में शामिल भ्रष्टाचारियों को छोड़कर बाकी सब कुछ अवैध नजर आता है। अखिलेश यादव ने चेतावनी भरे अंदाज में कहा कि अब प्रदेश के वकील भाजपा नेताओं और उनके सहयोगियों की संपत्तियों के नक्शे निकलवाकर वैध-अवैध निर्माणों की जांच कराएंगे और जरूरत पड़ी तो अदालत में याचिकाएं भी दाखिल करेंगे।

सपा प्रमुख ने आजादी की लड़ाई का जिक्र करते हुए कहा कि जिन अधिवक्ताओं ने अंग्रेजी हुकूमत को चुनौती देकर देश को आजाद कराया वे औपनिवेशिक मानसिकता वाली ताकतों से डरने वाले नहीं हैं। उन्होंने घायल वकीलों के मुफ्त इलाज, मुआवजे और सम्मानजनक पुनर्वास की मांग भी उठाई।

इस पूरे घटनाक्रम ने लखनऊ की सियासत को गर्मा दिया है। विपक्ष इसे बुलडोजर राजनीति और लोकतांत्रिक संस्थाओं पर हमला बता रहा है जबकि अब निगाहें सरकार की अगली प्रतिक्रिया पर टिक गई हैं।

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