लखनऊ, 11 जून 2026:
लखनऊ विश्वविद्यालय में फीस बढ़ोतरी और छात्रों के निष्कासन के खिलाफ चल रहा आंदोलन और तेज होता जा रहा है। धरने का गुरुवार को दसवां दिन रहा। इसी बीच विश्वविद्यालय प्रशासन ने एक और छात्र के खिलाफ सख्त कार्रवाई करते हुए उसे निष्कासित कर दिया। इस कदम के बाद छात्रों और प्रशासन के बीच टकराव और गहरा गया है।
विश्वविद्यालय प्रशासन ने बीए-एलएलबी चौथे सेमेस्टर के छात्र सत्यम यादव को निष्कासित करते हुए उसके खिलाफ प्रवेश प्रतिबंध लगाया है। कुलसचिव डॉ. भावना मिश्रा की ओर से जारी आदेश में कहा गया है कि डीन स्टूडेंट वेलफेयर और प्रॉक्टोरियल बोर्ड की जांच रिपोर्ट के आधार पर छात्र पर विश्वविद्यालय की मर्यादाओं के विपरीत आचरण करने, अनधिकृत रूप से छात्रावास और परिसर में प्रवेश करने तथा प्रशासनिक कार्यों में बाधा उत्पन्न करने के आरोप सही पाए गए हैं।
उधर, सरस्वती प्रतिमा के पास धरने पर बैठे छात्रों का प्रदर्शन लगातार दसवें दिन भी जारी रहा। गुरुवार को कांग्रेस का एक प्रतिनिधिमंडल आंदोलित छात्रों के समर्थन में विश्वविद्यालय पहुंचा और कुलसचिव डॉ. भावना मिश्रा से मुलाकात कर मामले में हस्तक्षेप की मांग की। प्रतिनिधिमंडल ने छात्र नेताओं के खिलाफ की गई अनुशासनात्मक कार्रवाई वापस लेने तथा बढ़ी हुई फीस पर पुनर्विचार करने की मांग उठाई।

कांग्रेस नेताओं ने कहा कि फीस वृद्धि और निष्कासन की कार्रवाई से छात्रों में व्यापक असंतोष है, जिससे विश्वविद्यालय का शैक्षणिक माहौल प्रभावित हो रहा है। उन्होंने प्रशासन से संवाद के जरिए समाधान निकालने और छात्रों की जायज मांगों पर गंभीरता से विचार करने की अपील की।
कुलसचिव से मिलने वाले प्रतिनिधिमंडल में पूर्व विधायक श्याम किशोर शुक्ला, कांग्रेस नेता एवं प्रवक्ता अंशु अवस्थी, सुरेंद्र यादव, कुलदीप दिवाकर, संजय सिंह, अंकित तिवारी, अमित राय, श्रवण गुप्ता, अब्दुल्ला आजम, आर्यन मिश्रा और शमी खान शामिल रहे।
आंदोलनकारी छात्रों को छात्रसंघ के पूर्व पदाधिकारियों, विभिन्न महाविद्यालयों के छात्रों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और विपक्षी दलों के नेताओं का लगातार समर्थन मिल रहा है। गत दिनों धरनास्थल पर पहुंचे छात्रसंघ के पूर्व अध्यक्ष रमेश श्रीवास्तव समेत कई पूर्व पदाधिकारियों ने छात्रों की मांगों को जायज बताते हुए आंदोलन को समर्थन दिया।
बढ़ते राजनीतिक समर्थन और प्रशासन की सख्त कार्रवाई के बीच लखनऊ विश्वविद्यालय का यह आंदोलन अब प्रदेश की राजनीति और छात्र संगठनों के लिए भी चर्चा का बड़ा विषय बनता जा रहा है।






