लखनऊ, 16 जून 2026:
यूपी में गो संरक्षण को नई आर्थिक शक्ति में बदलने की दिशा में बड़ा कदम उठाया जा रहा है। सीएम योगी की मंशा के अनुरूप अब प्रदेश की गोशालाएं निराश्रित गोवंश के संरक्षण केंद्र के साथ रोजगार, उत्पादन, प्राकृतिक खेती और ग्रामीण उद्यमिता के नए हब के रूप में विकसित की जाएंगी। इस महत्वाकांक्षी पहल के तहत उत्तर प्रदेश गो सेवा आयोग ने प्रदेशभर की गोशालाओं की क्षमता का व्यापक मूल्यांकन पूरा कर लिया है।
आयोग द्वारा किए गए सर्वेक्षण में गोशालाओं में उपलब्ध भूमि, गोवंश की संख्या, जल संसाधन, पंचगव्य इकाइयों और स्थानीय बाजार की संभावनाओं का अध्ययन किया गया। इस अध्ययन के आधार पर अब प्रदेश के हर जिले में स्थानीय परिस्थितियों और संसाधनों के अनुरूप एक प्रमुख गो-आधारित उद्योग विकसित करने की तैयारी की जा रही है। इस योजना को एक जनपद-एक नवाचार मॉडल के रूप में लागू किया जाएगा।
उत्तर प्रदेश गो सेवा आयोग के अध्यक्ष श्याम बिहारी गुप्ता के मुताबिक निरीक्षण और मूल्यांकन के बाद हर जिले के लिए अलग-अलग नवाचार मॉडल तैयार किए जा रहे हैं। जिन जिलों में पर्याप्त जैविक संसाधन उपलब्ध हैं वहां बायोगैस उत्पादन को बढ़ावा दिया जाएगा। अन्य जिलों में इको पेंट, जैविक खाद, वर्मी कम्पोस्ट, गोबर आधारित उत्पाद और पंचगव्य उत्पादों के निर्माण को प्राथमिकता दी जाएगी। इससे स्थानीय स्तर पर लघु उद्योग इकाइयों का विकास होगा और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई मजबूती मिलेगी।
योजना का प्रमुख उद्देश्य गोशालाओं को आत्मनिर्भर बनाते हुए उन्हें आय सृजन के स्थायी केंद्रों में बदलना है। इसके तहत महिला स्वयं सहायता समूहों, ग्रामीण युवाओं और किसानों को प्रशिक्षण देकर उत्पादन, प्रसंस्करण और विपणन गतिविधियों से जोड़ा जाएगा। इससे बड़ी संख्या में स्थानीय रोजगार के अवसर पैदा होंगे और युवाओं को अपने ही जिले में स्वरोजगार का नया मंच मिलेगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह मॉडल सफल होने पर गो संरक्षण, प्राकृतिक खेती और ग्रामीण विकास को एक साथ गति मिलेगी। हर जिले की एक विशिष्ट गो-आधारित पहचान विकसित होगी जो स्थानीय संसाधनों को आर्थिक अवसरों में बदलकर ग्रामीण समृद्धि का नया अध्याय लिखेगी।






