Uttarakhand

मुक्तेश्वर में खेत बचाओ अभियान का शुभारंभ… राज्यपाल ने गांवों को विज्ञान से जोड़ने पर दिया जोर

राज्यपाल गुरमीत सिंह ने कार्यक्रम में पशुधन आधारित आजीविका को बताया ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़, 100 मॉडल पशुपालक गांव विकसित करने का दिया सुझाव

राजकिशोर तिवारी

नैनीताल, 16 जून 2026:

उत्तराखण्ड के राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (सेनि.) ने मंगलवार को नैनीताल जनपद के मुक्तेश्वर स्थित भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) के भारतीय पशु चिकित्सा अनुसंधान संस्थान (आईवीआरआई) में आयोजित कार्यक्रम के दौरान ‘खेत बचाओ अभियान’ का शुभारंभ किया।

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इस अवसर पर उन्होंने वैज्ञानिकों से अनुसंधान को प्रयोगशालाओं तक सीमित न रखकर गांवों और किसानों तक पहुंचाने का आह्वान किया। मुख्य अतिथि के रूप में संबोधित करते हुए राज्यपाल ने कहा कि वैज्ञानिक उपलब्धियां तभी सार्थक हैं जब उनका लाभ किसानों, पशुपालकों और ग्रामीण समुदायों तक पहुंचे।

उन्होंने आईवीआरआई को विज्ञान, सेवा और राष्ट्र निर्माण का महत्वपूर्ण केंद्र बताया और पशु स्वास्थ्य, रोग नियंत्रण, जैव सुरक्षा और पशुधन विकास के क्षेत्र में संस्थान के योगदान की सराहना की। राज्यपाल ने कहा कि उत्तराखण्ड के पर्वतीय क्षेत्रों में पशुधन ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ है और महिलाओं की आजीविका व आत्मनिर्भरता का प्रमुख आधार भी है।

राज्यपाल ने वैज्ञानिकों से ‘लैब टू लैंड’ की अवधारणा को और प्रभावी बनाने का आह्वान करते हुए कहा कि अनुसंधान का लाभ दूरस्थ गांवों और सीमांत पशुपालकों तक पहुंचना चाहिए। उन्होंने विज्ञान आधारित डेयरी, बकरी पालन, कुक्कुट पालन और मधुमक्खी पालन जैसी गतिविधियों को आधुनिक तकनीक से जोड़कर युवाओं के लिए स्वरोजगार के अवसर बढ़ाने पर भी जोर दिया।

कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई), टेली-वेटरिनरी सेवाओं और डिजिटल तकनीकों के बारे में बताते हुए राज्यपाल ने कहा कि युवा वैज्ञानिक एवं विद्यार्थी इनके माध्यम से दूरस्थ क्षेत्रों के पशुपालकों तक विशेषज्ञ सेवाएं पंहुचा सकते हैं। इसके साथ ही उन्होंने आईवीआरआई से आगामी वर्षों में उत्तराखण्ड में कम से कम 100 मॉडल पशुपालक गांव विकसित करने की दिशा में कार्य करने का आग्रह किया।

राज्यपाल ने संस्थान की विभिन्न प्रयोगशालाओं, पुस्तकालय और प्राकृतिक कोल्ड स्टोरेज कक्ष का भी निरीक्षण किया। कार्यक्रम में संस्थान के निदेशक डॉ. राघवेंद्र भट्टा, संयुक्त निदेशक डॉ. एस.के. सिंह, डॉ. शेर सिंह सहित संस्थान के अधिकारी एवं कृषक मौजूद रहे

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