Uttarakhand

धामी का लेखकों से संवाद, खुद खरीदीं 50 किताबें, दान अभियान में देंगे, बसेंगे साहित्य ग्राम

संवाद में उत्तराखंड के विकास से लेकर संस्कृति बचाने तक पर चर्चा, नई पीढ़ी में पढ़ने-लिखने की आदत बढ़ाने पर जोर, अप्रकाशित साहित्य सहेजा जाएगा

देहरादून, 27 जुलाई 2026:

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने रविवार को मुख्यमंत्री कैंप कार्यालय स्थित मुख्य सेवक सदन में प्रदेशभर से आए लेखकों से संवाद किया। इस दौरान लेखकों ने अपनी लिखी किताबें मुख्यमंत्री को भेंट कीं। धामी ने भी एक-एक लेखक से मुलाकात कर उनके लेखन, साहित्यिक काम और मौजूदा रचनाओं पर बातचीत की।

रुद्रप्रयाग के लिए धामी ने खुद खरीदीं 50 किताबें

कार्यक्रम में रुद्रप्रयाग के 1000 पुस्तक दान अभियान का मुद्दा खास तौर पर सामने आया। हरेला पर्व के मौके पर चल रहे इस अभियान में मुख्यमंत्री ने खुद 50 किताबें खरीदकर रुद्रप्रयाग के सार्वजनिक पुस्तकालय को देने की घोषणा की। यह पहल रुद्रप्रयाग जिला प्रशासन की ओर से एक पुस्तक, एक वृक्ष, एक उज्ज्वल भविष्य थीम पर की गई है।

ये भी पढ़ें:

अभियान का मकसद सार्वजनिक पुस्तकालय के लिए ज्यादा से ज्यादा किताबें जुटाना है, ताकि युवाओं और दूसरे पाठकों को पढ़ने के लिए बेहतर सामग्री मिल सके।

किताबों को बताया ज्ञान और सोच की ताकत

धामी ने इस अभियान की तारीफ करते हुए कहा कि किताबें सिर्फ पढ़ने की चीज नहीं हैं, बल्कि ज्ञान, संस्कार और सकारात्मक सोच को मजबूत करने का जरिया भी हैं। उन्होंने कहा कि पुस्तक दान की संस्कृति को बढ़ावा देने से युवाओं में पढ़ने की आदत को मजबूत किया जा सकता है।

साहित्य समाज को दिशा देने का काम करता है

मुख्यमंत्री ने कहा कि साहित्यकार समाज की तस्वीर सामने रखने के साथ उसे सही दिशा देने का काम भी करते हैं। उत्तराखंड के विकास, सांस्कृतिक विरासत को बचाने और सामाजिक चेतना बढ़ाने में लेखकों की भूमिका अहम है। सरकार प्रदेश में साहित्य के लिए बेहतर माहौल बनाने और साहित्यकारों को प्रोत्साहित करने पर काम कर रही है।
cm-dhami-interacts-with-writers-buys-books-announces-sahitya-gram (2)

उत्तराखंड की साहित्यिक विरासत पर जोर

धामी ने कहा कि उत्तराखंड महर्षि वेदव्यास समेत कई ऋषि-मुनियों की तपोभूमि रहा है। इस भूमि ने देश को ऐसे साहित्यकार दिए हैं, जिन्होंने भारतीय साहित्य को नई पहचान दी। उन्होंने नई पीढ़ी में पढ़ने और लिखने की संस्कृति विकसित करने के लिए सामूहिक कोशिश की जरूरत बताई।

पुराने और अप्रकाशित साहित्य को सहेजने की तैयारी

मुख्यमंत्री ने बताया कि उत्तराखंड भाषा संस्थान के जरिए प्रदेश में मौजूद पुराने, बिखरे और अब तक प्रकाशित नहीं हुए साहित्य को जुटाने, सुरक्षित रखने और प्रकाशित करने का काम किया जा रहा है। इसके साथ ही राज्य में साहित्यिक पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए दो साहित्य ग्राम विकसित करने की योजना पर भी काम चल रहा है।

साहित्यकारों के लिए सम्मान की शुरुआत

धामी ने कहा कि साहित्यकारों को सम्मान और प्रोत्साहन देने के लिए वर्ष 2022 में उत्तराखण्ड साहित्य गौरव सम्मान शुरू किया गया। इसके बाद वर्ष 2025 में दीर्घकालीन साहित्य सेवी सम्मान की शुरुआत की गई। सरकार का फोकस साहित्य से जुड़े लोगों को मंच देने के साथ उनकी रचनाओं को ज्यादा पाठकों तक पहुंचाने पर भी है।
cm-dhami-interacts-with-writers-buys-books-announces-sahitya-gram (3)

संवाद में कई वरिष्ठ चेहरे रहे मौजूद

कार्यक्रम में मीडिया सलाहकार समिति के अध्यक्ष प्रो गोविंद सिंह, पूर्व मुख्य सचिव राधा रतूड़ी, पूर्व पुलिस महानिदेशक अनिल रतूड़ी, सचिव रणवीर सिंह चौहान, जिलाधिकारी नैनीताल ललित मोहन रयाल समेत कई साहित्यकार मौजूद रहे। इनमें प्रो सुधा रानी पांडे, आलोक लाल, बुद्धिनाथ मिश्रा, प्रेम कुमार साहिल, शिव मोहन सिंह, राम मोहन सिंह, नेहा नेगी, कुलभूषण केन, अनमोल जैन, रूपा सोनी, अमर खरबंदा, शीशपाल गुसाईं, रमाकांत, दिवेश जोशी, प्रभा पंत और रूबी गुप्ता शामिल रहे।

ये भी पढ़ें  पर्यटन विकास के लिए बनाएं पांच साल का रोडमैप, फेस्टिवल-कार्निवाल पर रहे फोकस

Anand Sharma

आनंद शर्मा 30 वर्ष से अधिक समय से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। ‘राष्ट्रीय सहारा’ व ‘हिंदुस्तान’ दैनिक समाचार पत्र में फील्ड रिपोर्टिंग के साथ सम्पादन का काम भी चलता रहा। जिला स्तर पर संवाददाता और ब्यूरो प्रमुख के रूप में लंबे समय तक सक्रिय रहे। इस दौरान विख्यात… More »

प्रातिक्रिया दे

आपका ईमेल पता प्रकाशित नहीं किया जाएगा. आवश्यक फ़ील्ड चिह्नित हैं *

Back to top button