न्यूज डेस्क, 20 जून 2026:
21 जून को अंतरराष्ट्रीय योग दिवस मनाया जाएगा। बदलती जीवनशैली, काम का दबाव, घर और नौकरी की जिम्मेदारियों के बीच महिलाओं का स्वास्थ्य अक्सर प्रभावित होता है। ऐसे में योग न सिर्फ शरीर को फिट रखने का जरिया है, बल्कि तनाव कम करने और मानसिक शांति पाने का भी आसान उपाय है। कुछ योगासन ऐसे हैं, जिनका नियमित अभ्यास महिलाओं के लिए खास तौर पर फायदेमंद माना जाता है।

महिलाएं काम में सक्रिय और घर में समर्पित होकर अपनी दिनचर्या को पूरा करतीं है। भोर की किरण से और रात में सबके सोने तक वो एक्टिव रहतीं है। जीवन के कई टुकड़ों को एक साथ जोड़ने वाली कड़ी बनकर महिलाओं को भी तनावग्रस्त होना पड़ता है। उम्र के साथ शरीर मे होने वाले बदलाव भी ख्याल रखना पड़ता है। वे अपने आस-पास के सभी लोगों की देखभाल करती हैं, परंतु उनकी देखभाल कौन करेगा इसका जवाब योग में छिपा है। हालांकि योग में तमाम आसन उनके बेहद काम के हैं। ऐसे में हम यहां कुछ आसनों का जिक्र कर रहे हैं।

विपरीतकरणी आसन- मिलती है थकान और तनाव से राहत
विपरीतकरणी आसन शरीर में रक्त संचार को बेहतर बनाने में मदद करता है। लंबे समय तक खड़े रहने या लगातार काम करने के बाद पैरों, घुटनों और पीठ में होने वाली परेशानी में इससे राहत मिल सकती है। यह प्रजनन अंगों के स्वास्थ्य के लिए भी फायदेमंद माना जाता है। साथ ही मन को शांत रखने में मदद करता है।
भद्रासन- मासिक धर्म की परेशानी कम करने में मददगार
भद्रासन महिलाओं के लिए बेहद उपयोगी माना जाता है। यह कूल्हों और जांघों की मांसपेशियों को मजबूत बनाता है। मासिक धर्म के दौरान होने वाले दर्द में राहत देने के साथ तनाव कम करने में भी मदद करता है। गर्भावस्था के दौरान भी यह आसन शरीर को लचीला बनाए रखने में सहायक माना जाता है।
पर्यंकासन- पेट की चर्बी और तनाव दोनों पर करता है काम
पर्यंकासन पेट और कमर की मांसपेशियों को आराम पहुंचाता है। इससे पाचन तंत्र बेहतर होता है और पेट के आसपास जमा अतिरिक्त चर्बी कम करने में मदद मिलती है। मासिक धर्म के दौरान होने वाली तकलीफ में भी यह आसन राहत देने वाला माना जाता है।
मत्स्यासन- बढ़ाता है रोग प्रतिरोधक क्षमता
मत्स्यासन शरीर के मेटाबॉलिज्म को बेहतर बनाने में मदद करता है। इससे मांसपेशियों और जोड़ों के दर्द में आराम मिलता है। महिलाओं के प्रजनन अंगों में रक्त संचार बढ़ाने के कारण यह आसन खास लाभकारी माना जाता है। इसके नियमित अभ्यास से मानसिक शांति और सुकून का अनुभव भी होता है।
नटप्रार्थनासन- बढ़ती है एकाग्रता और संतुलन
नटप्रार्थनासन पैरों और पीठ के निचले हिस्से की मांसपेशियों को मजबूत बनाता है। यह शरीर का संतुलन बेहतर करता है और मानसिक रूप से स्थिर रहने में मदद करता है। नियमित अभ्यास से ध्यान केंद्रित करने की क्षमता भी बढ़ती है।
हस्तपादांगुष्ठासन- मजबूत होती हैं मांसपेशियां
हस्तपादांगुष्ठासन जांघों, कूल्हों, पीठ और हाथों की मांसपेशियों को मजबूत बनाता है। यह पाचन तंत्र को सक्रिय करने के साथ शरीर के संतुलन को भी बेहतर करता है। मासिक धर्म से जुड़ी कुछ परेशानियों में भी यह लाभदायक माना जाता है।
उत्कटासन- वजन घटाने और जोड़ों को मजबूत करने में सहायक
उत्कटासन पैरों, श्रोणि और कोर मसल्स को मजबूत बनाने में मदद करता है। इससे शरीर का संतुलन बेहतर होता है और जोड़ों व पीठ दर्द में राहत मिल सकती है। कूल्हों के आसपास जमा अतिरिक्त चर्बी कम करने में भी यह आसन मददगार माना जाता है।
धनुर्वक्रासन- मजबूत होती है रीढ़ और पाचन तंत्र
धनुर्वक्रासन पूरे शरीर की मांसपेशियों को सक्रिय करता है। इससे रीढ़ मजबूत होती है और पाचन शक्ति बेहतर होती है। यह पेट और प्रजनन अंगों में रक्त संचार बढ़ाने में मदद करता है। इसके नियमित अभ्यास से शरीर में ऊर्जा और स्फूर्ति बनी रहती है।





