
न्यूज डेस्क, 21 जून 2026:
एक समय था जब पिता की पहचान घर के मुखिया और परिवार के पालन-पोषण करने वाले व्यक्ति के रूप में होती थी। उनकी जिम्मेदारी कमाना और बच्चों को अनुशासन में रखना मानी जाती थी। बच्चे पिता का सम्मान तो करते थे, लेकिन उनके सामने खुलकर अपनी बात कहने से बचते थे। पिता का प्यार अक्सर उनके व्यवहार से कम और जिम्मेदारियों से ज्यादा दिखाई देता था। लेकिन समय के साथ यह तस्वीर बदल रही है। आइए हम भी रूबरू होते हैं इस तस्वीर और इसके अलग-अलग रंगों से।
आज के दौर में पिता सिर्फ परिवार का कमाने वाला सदस्य नहीं है, बल्कि बच्चों के जीवन का सक्रिय हिस्सा बन चुका है। वह बच्चों के साथ खेलता है, उन्हें स्कूल छोड़ने जाता है, होमवर्क में मदद करता है, छुट्टियों की योजना बनाता है और जरूरत पड़ने पर रसोई में भी हाथ बंटाता है। बच्चों की देखभाल अब केवल मां की जिम्मेदारी नहीं मानी जाती। नई पीढ़ी के पिता इसे अपना कर्तव्य समझते हैं और इसे किसी मदद की तरह नहीं देखते।
सख्त पिता की छवि से दोस्त पिता तक का सफर
पहले पिता के सामने बच्चे थोड़ा डर महसूस करते थे। उनसे खुलकर बातचीत करने के बजाय मां के जरिए अपनी बातें पहुंचाई जाती थीं। लेकिन आज की पीढ़ी के बच्चे अपने पिता को सिर्फ अभिभावक नहीं, बल्कि दोस्त की तरह देख रहे हैं। आज बच्चे अपने पिता से पढ़ाई, करियर, दोस्ती, तनाव और यहां तक कि निजी परेशानियों पर भी खुलकर बात करते हैं।
सोशल मीडिया पर अक्सर ऐसे वीडियो देखने को मिलते हैं, जिनमें पिता बच्चों के साथ क्रिकेट खेलते, नाचते या उनके साथ समय बिताते नजर आते हैं। इससे बच्चों में पिता के प्रति अपनापन और विश्वास बढ़ा है। मनोविज्ञान से जुड़े विशेषज्ञ भी मानते हैं कि जिन बच्चों को पिता का भावनात्मक साथ मिलता है, उनमें आत्मविश्वास ज्यादा होता है और वे अपने फैसलों को लेकर अधिक सहज रहते हैं।
परिवार को संभालने का तरीका भी बदला
आज का पिता सिर्फ दफ्तर और कारोबार तक सीमित नहीं है। वह वर्क-लाइफ बैलेंस को महत्व दे रहा है। बच्चों के स्कूल कार्यक्रम में पहुंचना, छुट्टी लेकर परिवार के साथ समय बिताना, पत्नी के साथ जिम्मेदारियां बांटना और घर के कामों में भागीदारी करना अब सामान्य बात बनती जा रही है। मिलेनियल और जेन-जी पीढ़ी के पिता अपने बच्चों की परवरिश में बराबरी की भागीदारी निभा रहे हैं।
बच्चे के जन्म के बाद उसकी देखभाल से लेकर डॉक्टर के पास ले जाने और स्कूल की अभिभावक बैठक में शामिल होने तक, पिता हर जिम्मेदारी में साथ दिखाई देते हैं। यही कारण है कि परिवार के भीतर रिश्ते पहले की तुलना में ज्यादा खुले और संवादपूर्ण हुए हैं। बच्चे भी अपने पिता को केवल अनुशासन का प्रतीक नहीं, बल्कि भरोसेमंद साथी के रूप में देखते हैं।
फिल्मों में भी बदली पिता की तस्वीर
सिनेमा हमेशा समाज से प्रेरणा लेता है और समाज भी फिल्मों से प्रभावित होता है। जब असल जिंदगी में पिता की भूमिका बदली, तो फिल्मों ने भी उन्हें नए रूप में दिखाना शुरू किया। और जब फिल्मों में पिता के संघर्ष, प्रेम और संवेदनाओं को जगह मिली, तो समाज ने भी पिता को एक नए नजरिए से देखना शुरू किया। वरना एक समय था जब फिल्मों में पिता का किरदार अक्सर सख्त या परंपरावादी दिखाया जाता था। लेकिन पिछले कुछ वर्षों में फिल्मों ने पिता के भावनात्मक और मानवीय पक्ष को प्रमुखता से दिखाया है।
‘दंगल’ में महावीर सिंह फोगाट के रूप में आमिर खान एक ऐसे पिता की भूमिका निभाते हैं, जो अपनी बेटियों को समाज की रूढ़ियों से लड़ने और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाने का हौसला देते हैं। ‘पिकू’ में अमिताभ बच्चन और दीपिका पादुकोण के रिश्ते के जरिए एक पिता और बेटी की सहज नोकझोंक और गहरे लगाव को दिखाया गया। ‘अंग्रेजी मीडियम’ में इरफान खान अपनी बेटी के सपनों को पूरा करने के लिए हर संघर्ष करने को तैयार दिखाई देते हैं।

‘दृश्यम’ में अजय देवगन का किरदार बताता है कि पिता अपने परिवार की सुरक्षा के लिए किस हद तक जा सकता है। वहीं ‘हे बेबी’ जैसी फिल्में यह दिखाती हैं कि पिता बनने के बाद एक व्यक्ति की सोच और जीवन किस तरह बदल जाता है। हाल के वर्षों में बनी कई फिल्मों और वेब सीरीज में पिता को सिर्फ सहायक पात्र नहीं, बल्कि कहानी के केंद्र में रखा गया है। इससे यह भी पता चलता है कि समाज में पिता की भूमिका को लेकर नजरिया बदल रहा है।

ऐसे में हम ये कह सकते हैं कि नई पीढ़ी के बच्चों के लिए पिता का मतलब सिर्फ जेब खर्च देने वाला या डांट लगाने वाला व्यक्ति नहीं है। वे चाहते हैं कि पिता उनके साथ समय बिताएं, उनकी बातें सुनें और उनके फैसलों में उनका साथ दें।
कई बच्चे अपने पिता को अपना पहला हीरो और सबसे बड़ा प्रेरणास्रोत मानते हैं। कुछ के लिए पिता सबसे अच्छे दोस्त हैं, तो कुछ के लिए मुश्किल समय में सबसे मजबूत सहारा। यही वजह है कि आज के बच्चे पिता के साथ तस्वीरें साझा करते हैं, सोशल मीडिया पर उनके लिए भावुक संदेश लिखते हैं और उनके साथ बिताए गए छोटे-छोटे पलों को यादगार मानते हैं।






