Uttar Pradesh

कबीर की वाणी से गूंजेगा पूर्वांचल, इन 3 शहरों में सजेगा ‘निर्गुण त्रिधारा भक्ति उत्सव’

27 से 29 जून तक मगहर, गाजीपुर और वाराणसी में संत, विद्वान और लोक कलाकारों का महाकुंभ, कबीर जयंती पर चित्रकला कार्यशाला और राष्ट्रीय संगोष्ठी भी होगी आकर्षण

लखनऊ, 23 जून 2026:

संत कबीर की निर्भीक वाणी, निर्गुण भक्ति और भारतीय लोक-सांस्कृतिक विरासत को नई पीढ़ी तक पहुंचाने के लिए यूपी में 27 से 29 जून तक तीन दिवसीय ‘निर्गुण त्रिधारा भक्ति उत्सव’ का भव्य आयोजन होगा। संत कबीर अकादमी, मगहर के तत्वावधान में आयोजित यह उत्सव मगहर, गाजीपुर और वाराणसी में एक साथ कबीर की विचारधारा, लोकसंगीत, साहित्य और संत परंपरा का अनूठा संगम पेश करेगा।

देशभर के प्रतिष्ठित संत, विद्वान, शोधकर्ता और लोक कलाकार इसमें भाग लेकर कबीर की वाणी को जन-जन तक पहुंचाएंगे। उत्सव का शुभारंभ 27 जून को संत कबीर अकादमी, मगहर में भव्य शोभायात्रा के साथ होगा। इस अवसर पर पद्मश्री कालूराम बामनिया, बेबी सिसोदिया बंजारन सिस्टर्स, देवेन्द्र दास ताना-बाना ग्रुप, ओम प्रकाश पटेल, दिनेश कुमार जांगड़े और प्रीति बामनिया सहित कई ख्यातिप्राप्त कलाकार निर्गुण भक्ति और कबीर गायन की मनमोहक प्रस्तुतियां देंगे।

कार्यक्रम में एमएलसी सुभाष यदुवंश, विधायक अंकुर राज तिवारी, अनिल कुमार त्रिपाठी और गणेश चंद्र चौहान अतिथि के रूप में मौजूद रहेंगे।उत्सव का दूसरा पड़ाव 28 जून को कबीर मठ बेलसड़ी, गाजीपुर में होगा, जहां पद्मश्री भेरूसिंह चौहान सहित विभिन्न राज्यों से आए कलाकार कबीर वाणी और निर्गुण भक्ति पर आधारित सांस्कृतिक प्रस्तुतियां देंगे।

वहीं 28 और 29 जून को वाराणसी स्थित संत कबीर की प्राचीन प्राकट्य स्थली लहरतारा में ‘कबीर की विरासत : काशी से मगहर तक’ विषय पर राष्ट्रीय संगोष्ठी आयोजित होगी। इसमें देश के प्रतिष्ठित शिक्षाविद, साहित्यकार, इतिहासकार और शोधकर्ता कबीर के दर्शन, साहित्य और सामाजिक योगदान पर अपने विचार रखेंगे।

29 जून को लहरतारा में आयोजित विशेष समारोह उत्सव का मुख्य आकर्षण रहेगा। संत समाज के प्रमुख धर्माचार्यों और विद्वानों के आशीर्वचन के साथ शाम को निर्गुण सांस्कृतिक संध्या आयोजित होगी। इसमें पद्मश्री प्रहलाद सिंह टिपान्या की विशेष प्रस्तुति के अलावा जय पाण्डेय, देवेन्द्र दास, बेबी सिसोदिया बंजारन सिस्टर्स, प्रीति बामनिया और दिनेश कुमार जांगड़े कबीर की अमर वाणी को सुरों में पिरोएंगे।

पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह के मुताबिक संत कबीर का संदेश आज भी समानता, मानवता, प्रेम और सामाजिक समरसता का मार्ग दिखाता है। उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजन संत परंपरा और लोक कलाओं के संरक्षण को नई ऊर्जा देने के साथ कलाकारों, विद्वानों और संत समाज को साझा मंच उपलब्ध कराते हुए सांस्कृतिक चेतना और भाईचारे की भावना को भी मजबूत करते हैं।

कबीर जयंती समारोह के तहत 23 से 27 जून तक संत कबीर अकादमी, मगहर में ‘कबीर चित्रकला कार्यशाला’ भी आयोजित की जा रही है। दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय के सहयोग से होने वाली इस कार्यशाला में कलाकार संत कबीर के जीवन, दर्शन और विचारों को चित्रों के माध्यम से साकार करेंगे।

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