
लखनऊ, 24 जून 2026:
सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (सुभासपा) के मुखिया एवं योगी सरकार में कैबिनेट मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव पर एक बार फिर तीखा हमला बोला है। इस बार उन्होंने मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव से जुड़े कथित जमीन विवाद को लेकर अखिलेश यादव के बचाव पर सवाल उठाते हुए गंभीर आरोप लगाए हैं। राजभर ने दावा किया कि अखिलेश यादव की बेचैनी किसी राजनीतिक कारण से नहीं बल्कि कथित निवेश पर संकट की वजह से है।
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर किए गए विस्तृत पोस्ट में राजभर ने लिखा… अखिलेश यादव जी, माननीय मुख्यमंत्री मोहन यादव के संबंध में इतना हल्ला क्यों कर रहे हो? इतना शोर करके छुपाना क्या चाहते हो? आखिर आपकी पीड़ा क्या है और आप क्यों घबरा गए? उन्होंने आरोप लगाया कि अखिलेश यादव ने मध्य प्रदेश कैडर के आईएएस अधिकारी भरत यादव से अपने रिश्तों को छिपाया है।

राजभर ने दावा किया कि भरत यादव, सपा के पूर्व कोषाध्यक्ष एवं वरिष्ठ नेता चंद्रपाल यादव के दामाद हैं। उनके अनुसार भरत यादव राज्य सड़क विकास निगम के चेयरमैन हैं। एक्सप्रेसवे व हाईवे परियोजनाओं की जानकारी होने के कारण कथित तौर पर जमीन निवेश से जुड़े लोगों को फायदा पहुंचाने की स्थिति में हैं। राजभर ने आरोप लगाया कि अखिलेश यादव की प्रतिक्रिया इस बात का संकेत है कि उनके करीबी लोगों का मध्य प्रदेश की जमीनों में बड़ा निवेश है।
कैबिनेट मंत्री ने सैफई परिवार पर भी हमला बोलते हुए कहा कि जमीन खरीद-फरोख्त के मामलों में उनका पुराना इतिहास रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि लखनऊ-आगरा एक्सप्रेसवे के निर्माण के दौरान फिरोजाबाद से इटावा तक बड़े पैमाने पर जमीनें खरीदी गईं और निजी लाभ के लिए एक्सप्रेसवे का रूट सैफई की ओर मोड़ दिया गया। इससे परियोजना की दूरी करीब 30 किलोमीटर बढ़ गई। राजभर ने यह भी आरोप लगाया कि कम कीमत पर खरीदी गई जमीनों के बदले बाद में भारी मुआवजा लिया गया।
राजभर ने अपने पोस्ट में यह भी कहा कि गोमती रिवर फ्रंट परियोजना की रिपोर्ट सामने आने के बाद अखिलेश यादव को अब इस बात का डर सता रहा है कि कहीं मध्य प्रदेश के एक्सप्रेसवे और जमीनों से जुड़े मामलों की भी जांच रिपोर्ट सार्वजनिक न हो जाए। उन्होंने जांच एजेंसियों से मांग की कि मध्य प्रदेश में उत्तर प्रदेश के किन-किन प्रभावशाली लोगों ने निवेश किया है, इसकी निष्पक्ष जांच कराई जाए।

हालांकि, इन आरोपों पर समाजवादी पार्टी या अखिलेश यादव की ओर से फिलहाल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। यह मामला अब दोनों दलों के बीच सियासी टकराव को और तेज करता नजर आ रहा है।






