
पंकज
काकोरी (लखनऊ), 24 जून 2026ः
यूपी की राजधानी लखनऊ के मोहान रोड पर शकुंतला मिश्र पुनर्वास विश्वविद्यालय परिसर में संचालित बैंक ऑफ बड़ौदा का गेट बंद कर खाताधारकों ने प्रदर्शन किया। उन्होंने बैंक अधिकारियों और कर्मचारियों को अंदर ही बंद कर दिया। प्रदर्शनकारियों ने बैंक मैनेजर की गिरफ्तारी और कथित रूप से हड़पी गई करोड़ों रुपये की धनराशि वापस दिलाने की मांग की।
प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि बैंक कर्मचारियों ने फर्जी एफडी बनाकर, अंगूठे के निशान, जमा पर्चियों का दुरुपयोग कर और चेकों के माध्यम से अवैध निकासी कर उनकी जमा पूंजी हड़प ली। कई मामलों में असली दस्तावेजों के स्थान पर फर्जी दस्तावेज दिए गए और खातों से बिना जानकारी के रकम निकाल ली गई। सूचना पर पहुंची पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को समझाने का प्रयास किया, लेकिन वे बैंक का कामकाज ठप कर अपनी मांगों पर अड़े रहे।
शाम को बैंक बंद होने के बाद कर्मचारियों के अनुरोध पर पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को शांत कराया। प्रदर्शनकारियों ने कहा यदि बैंक के उच्च अधिकारी मौके पर पहुंचकर समस्या का समाधान नहीं करते हैं तो गुरुवार को बैंक का संचालन पूरी तरह बंद कराया जाएगा। इंस्पेक्टर सुरेश सिंह ने बताया कि मामले के मुख्य आरोपी शिवा राव, दीपक, विकास, उसकी मां और पत्नी को पहले ही गिरफ्तार कर जेल भेजा जा चुका है।
उन्होंने बताया कि विवेचना के दौरान तत्कालीन बैंक मैनेजर हिमांशु कुकरैती की भूमिका सामने आने पर उन्हें भी आरोपी बनाते हुए न्यायालय में चार्जशीट दाखिल की गई है। गिरफ्तारी के प्रयास किए गए थे, लेकिन आरोपी ने न्यायालय से गिरफ्तारी पर स्टे ले लिया है। इंस्पेक्टर के अनुसार अब तक 72 खाताधारकों के करीब ढाई करोड़ रुपये वापस कराए जा चुके हैं।
उन्होंने बताया कि 130 प्रभावित खाताधारकों में से करीब 60 लोगों का पैसा अभी वापस नहीं मिल सका है। वहीं, पीड़ितों का आरोप है कि बैंक प्रबंधन ने कई बार भुगतान का आश्वासन दिया, लेकिन तय समयसीमा बीत जाने के बाद भी अधिकतर लोगों को उनकी जमा राशि नहीं मिली।






