लखनऊ, 27 जून 2026:
यूपी के सरकारी विद्यालयों में शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने के लिए सरकार भवन और संसाधनों के साथ मजबूत शैक्षणिक नेतृत्व तैयार करने पर जोर दे रही है। इसके तहत एआरपी (अकादमिक रिसोर्स पर्सन), जिला समन्वयक (निपुण), स्टेट रिसोर्स ग्रुप (एसआरजी), ईसीसीई एजुकेटर और विशेष शिक्षकों की नियुक्तियों को मिशन मोड में तेजी से आगे बढ़ाया जा रहा है। अधिकांश जिलों में चयन प्रक्रिया अंतिम चरण में है। कई श्रेणियों में नियुक्तियां पूरी कर विद्यालयों तक अकादमिक सहयोग तंत्र को मजबूत बनाया जा चुका है।
सरकार का मानना है कि शिक्षा व्यवस्था में स्थायी बदलाव प्रशिक्षित, सक्षम और जवाबदेह शैक्षणिक नेतृत्व से ही संभव है। इसी सोच के तहत एआरपी व्यवस्था को शिक्षा सुधार का प्रमुख आधार बनाया गया है। अब एआरपी केवल निरीक्षण तक सीमित नहीं रहेंगे अपितु शिक्षकों को कक्षा शिक्षण में सुधार, सीखने के स्तर का विश्लेषण और विद्यालयों के सतत अकादमिक मार्गदर्शन में सहयोग देंगे।
एआरपी उपलब्धता के मामले में वाराणसी ने 100 प्रतिशत लक्ष्य हासिल कर प्रदेश में पहला स्थान प्राप्त किया है। देवरिया और हाथरस 98 प्रतिशत, बस्ती और कौशाम्बी 95 प्रतिशत, अलीगढ़ तथा सिद्धार्थनगर 94 प्रतिशत और कुशीनगर 93 प्रतिशत उपलब्धता के साथ अग्रणी जिलों में शामिल हैं। अन्य जिलों में भी रिक्त पद तेजी से भरे जा रहे हैं।
बुनियादी साक्षरता और संख्यात्मक दक्षता बढ़ाने के लिए जिला समन्वयक (निपुण) की नियुक्तियों को भी गति दी गई है। 39 जिलों में चयन प्रक्रिया पूरी हो चुकी है। बाकी जिलों में साक्षात्कार, दस्तावेज सत्यापन और अन्य प्रशासनिक प्रक्रियाएं अंतिम चरण में हैं। इनके माध्यम से निपुण भारत मिशन के प्रभावी क्रियान्वयन, शिक्षक प्रशिक्षण, डाटा आधारित निगरानी और सीखने के परिणामों के मूल्यांकन को नई मजबूती मिलेगी।
राज्य स्तर पर शिक्षक प्रशिक्षण और शैक्षणिक नवाचार को बढ़ावा देने के लिए एसआरजी के रिक्त पद भी तेजी से भरे जा रहे हैं। वहीं समावेशी शिक्षा को मजबूत करने के उद्देश्य से विशेष शिक्षकों की उपलब्धता सुनिश्चित की जा रही है जिससे दिव्यांग बच्चों सहित हर विद्यार्थी को समान गुणवत्ता वाली शिक्षा मिल सके।
नई शिक्षा नीति-2020 के अनुरूप प्रारंभिक बाल्यावस्था शिक्षा को मजबूत करने के लिए ईसीसीई एजुकेटर की नियुक्तियां भी तेजी से जारी हैं। कई जिलों में पहले और दूसरे चरण की नियुक्तियां पूरी हो चुकी हैं। अन्य जिलों में तकनीकी मूल्यांकन, मेरिट सूची, दस्तावेज सत्यापन और कार्यादेश की प्रक्रिया चल रही है। इससे आंगनबाड़ी केंद्रों और विद्यालयों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित होगा और बच्चों को शुरुआती स्तर से ही गुणवत्तापूर्ण सीखने का वातावरण मिलेगा।
सरकार का लक्ष्य शिक्षा सुधार को स्थायी संस्थागत परिवर्तन के रूप में लागू करना है। मजबूत मानव संसाधन, सतत प्रशिक्षण, डाटा आधारित अनुश्रवण और जवाबदेह कार्यसंस्कृति के माध्यम से उत्तर प्रदेश सरकारी विद्यालयों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा का नया मॉडल विकसित करने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है।






