लखनऊ, 10 मई 2026:
2027 विधानसभा चुनाव से पहले भाजपा ने उत्तर प्रदेश की सियासत में जातीय समीकरण साधने के लिए बड़ा दांव चला है। योगी आदित्यनाथ मंत्रिमंडल के विस्तार में फतेहपुर की खागा सीट से विधायक कृष्णा पासवान को मंत्री बनाकर पार्टी ने दलित और महिला दोनों वर्गों को साधने की कोशिश की है।
कृष्णा पासवान प्रदेश की उन चुनिंदा नेताओं में हैं, जिनकी पकड़ संगठन के साथ-साथ जमीनी राजनीति पर भी मजबूत मानी जाती है। पासवान समाज में उनकी अच्छी पैठ है, खासकर मध्य यूपी और बुंदेलखंड के उन इलाकों में जहां यह बिरादरी कई सीटों पर चुनावी नतीजों को प्रभावित करती है।
भाजपा पिछले कुछ वर्षों से गैर-जाटव दलित समुदाय को अपने साथ मजबूती से जोड़ने की रणनीति पर काम कर रही है। कृष्णा पासवान को मंत्री बनाकर पार्टी ने साफ संकेत दिया है कि 2027 के चुनाव में वह सामाजिक संतुलन के हर मोर्चे पर अपनी पकड़ मजबूत रखना चाहती है।
कृष्णा पासवान का राजनीतिक सफर भी संघर्ष से भरा रहा है। आंगनबाड़ी कार्यकर्ता के रूप में काम करने से शुरुआत करने वाली कृष्णा ने 1995 में भाजपा का दामन थामा था। पंचायत राजनीति से आगे बढ़ते हुए उन्होंने संगठन में कई अहम जिम्मेदारियां निभाईं और विधानसभा चुनावों में लगातार अपनी पकड़ मजबूत की।
खागा सीट से वह लगातार चौथी बार विधायक चुनी गई हैं। संगठन में प्रदेश उपाध्यक्ष, क्षेत्रीय संयोजक और विधानमंडल दल की सचेतक जैसी जिम्मेदारियां संभाल चुकी कृष्णा पासवान को अब मंत्री बनाकर भाजपा ने उनके लंबे राजनीतिक अनुभव पर भरोसा जताया है।






