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लखनऊ में इंटरनेशनल साइबर ठगी नेटवर्क का भंडाफोड़! समिट बिल्डिंग से 100 से ज्यादा हिरासत में

घंटों चली कार्रवाई में कंप्यूटर, सर्वर, हार्ड डिस्क समेत कई डिजिटल साक्ष्य बरामद, विदेश से संचालित हो रहा था पूरा नेटवर्क, कई देशों तक जुड़े मिले तार

लखनऊ, 1 जुलाई 2026:

यूपी की राजधानी लखनऊ के गोमतीनगर में विभूतिखंड इलाके में बुधवार को पुलिस ने अंतरराष्ट्रीय साइबर अपराध के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए फर्जी कॉल सेंटर का भंडाफोड़ कर दिया। समिट बिल्डिंग में चल रहे इस कथित साइबर ठगी नेटवर्क पर क्राइम ब्रांच और साइबर सेल की संयुक्त टीम ने छापा मारकर 100 से अधिक लोगों को हिरासत में लिया। शुरुआती जांच में इस गिरोह के तार कई देशों तक जुड़े होने की बात सामने आई है।

सूचना के आधार पर एडीसीपी किरण यादव के नेतृत्व में क्राइम ब्रांच और साइबर सेल की टीम ने समिट बिल्डिंग को चारों ओर से घेरकर दबिश दी। इसके बाद करीब 12 घंटे तक पूछताछ, तलाशी और तकनीकी जांच का अभियान चला। पुलिस ने मौके से बड़ी संख्या में कंप्यूटर, लैपटॉप, मोबाइल फोन, सर्वर, हार्ड डिस्क और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरण जब्त किए हैं। इन उपकरणों में मिले डिजिटल साक्ष्यों की फॉरेंसिक जांच कराई जा रही है।
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पुलिस सूत्रों के अनुसार गिरोह ने समिट बिल्डिंग में किराये पर कार्यालय लेकर कर्मचारियों की भर्ती की थी। यहीं से ऑनलाइन शॉपिंग और ई-कॉमर्स कंपनियों के ग्राहकों को रिफंड दिलाने का झांसा देकर ठगी की जाती थी। शुरुआती जानकारी के मुताबिक नेटवर्क का सरगना विदेश में बैठकर पूरे ऑपरेशन को संचालित कर रहा था। लखनऊ से कॉल सेंटर के जरिए देश-विदेश के लोगों को निशाना बनाया जाता था। इस नेटवर्क में कई युवतियों के भी काम करने की बात सामने आई है।

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जांच में यह भी पता चला है कि फर्जी कॉल सेंटर के माध्यम से विदेशी नागरिकों को तकनीकी सहायता, बैंकिंग सेवाओं और अन्य सुविधाओं के नाम पर झांसा देकर करोड़ों रुपये की साइबर ठगी को अंजाम दिया जा रहा था। पुलिस को आशंका है कि यह संगठित गिरोह लंबे समय से सक्रिय था और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपना नेटवर्क चला रहा था।
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कार्रवाई के दौरान मौके पर ज्वाइंट सीपी बबलू कुमार, डीसीपी पूर्वी डॉ. दीक्षा शर्मा, एसीपी विभूतिखंड सौम्या पांडे समेत कई वरिष्ठ अधिकारी पहुंचे। सूत्रों के मुताबिक हिरासत में लिए गए लोगों की संख्या अधिक होने के कारण उन्हें ले जाने के लिए कई बसें बुलानी पड़ीं। पुलिस लिखापढ़ी पूरी करने के बाद सभी आरोपियों का मेडिकल कराकर आगे की कानूनी कार्रवाई करेगी। जांच एजेंसियां अब जब्त डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर पूरे अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क की परतें खोलने में जुटी हैं।

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