
लखनऊ/अयोध्या, 7 जुलाई 2026:
राम मंदिर के चढ़ावे की कथित चोरी और गबन के आरोपों के बाद श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने सोमवार को अपनी महत्वपूर्ण बैठक में बड़ा प्रशासनिक फैसला लेते हुए महासचिव चंपत राय और सदस्य अनिल मिश्रा का इस्तीफा औपचारिक रूप से स्वीकार कर लिया। इसके साथ ही नए महासचिव की नियुक्ति तक ट्रस्टी कृष्ण मोहन को अंतरिम महासचिव की जिम्मेदारी सौंप दी गई। इस फैसले के बाद कृष्ण मोहन अचानक चर्चा के केंद्र में आ गए हैं। हर कोई जानना चाहता है कि कृष्ण मोहन कौन हैं। आखिर ट्रस्ट ने उन पर इतना बड़ा भरोसा क्यों जताया।

परमाणु ऊर्जा विभाग में वैज्ञानिक के रूप में भी कार्य किया
बता दें कि 73 वर्षीय कृष्ण मोहन उत्तर प्रदेश के हरदोई जिले के शाहाबाद क्षेत्र के सिकंदरपुर के मूल निवासी हैं। वर्तमान में वे राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के पूर्वी उत्तर प्रदेश क्षेत्र के क्षेत्र संघ चालक भी हैं। उनकी पहचान केवल संघ के वरिष्ठ पदाधिकारी के रूप में ही नहीं बल्कि भारतीय वन सेवा (आईएफएस) के पूर्व अधिकारी के तौर पर भी है। वे परमाणु ऊर्जा विभाग में वैज्ञानिक के रूप में भी कार्य कर चुके हैं।
2012 में अपर प्रधान मुख्य वन संरक्षक पद से हुए रिटायर
कृष्ण मोहन ने 1970 के दशक में लखनऊ विश्वविद्यालय से एमएससी की पढ़ाई पूरी की। इसके बाद करीब पांच वर्षों तक परमाणु ऊर्जा विभाग में वैज्ञानिक के रूप में कार्य किया। इसके बाद उनका चयन भारतीय वन सेवा में हुआ और महाराष्ट्र कैडर मिला। उन्होंने महाराष्ट्र वन विभाग में विभिन्न महत्वपूर्ण पदों पर सेवाएं दीं। वर्ष 2012 में अपर प्रधान मुख्य वन संरक्षक (एडिशनल प्रिंसिपल चीफ कंजरवेटर ऑफ फॉरेस्ट) के पद से सेवानिवृत्त हुए।
नागपुर में सेवा के दौरान राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़ाव गहराया
सेवानिवृत्ति के बाद उन्होंने खुद को सामाजिक और राष्ट्रसेवा के कार्यों के लिए समर्पित कर दिया। नागपुर में सेवा के दौरान उनका राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़ाव गहरा हुआ। वर्ष 2014 में नगर संघ चालक, 2017 में जिला संघ चालक, 2020 में प्रांत संघ चालक और 2023 में पूर्वी उत्तर प्रदेश के क्षेत्र संघ चालक बनाए गए। उन्हें बेहद सरल, शांत और अनुशासित व्यक्तित्व का धनी माना जाता है।
ट्रस्टी कामेश्वर चौपाल के निधन के बाद ट्रस्ट में हुए शामिल
राम मंदिर ट्रस्ट में उनकी भूमिका भी लगातार मजबूत होती गई। ट्रस्टी कामेश्वर चौपाल के निधन के बाद उन्हें ट्रस्ट में शामिल किया गया। जनवरी 2024 में रामलला की प्राण प्रतिष्ठा के ऐतिहासिक समारोह में वे अपनी पत्नी के साथ यजमान दंपतियों में शामिल रहे थे। हाल ही में सामने आए चढ़ावा चोरी प्रकरण में पुलिस को तहरीर भी कृष्ण मोहन ने ही दी थी जिसके बाद मामले की जांच शुरू हुई।

विवादों के बीच पारदर्शिता और विश्वास बहाल करने की चुनौती
अब ट्रस्ट के प्रशासनिक और संगठनात्मक कार्यों की जिम्मेदारी अंतरिम महासचिव के रूप में कृष्ण मोहन के कंधों पर होगी। ऐसे समय में जब राम मंदिर ट्रस्ट विवादों के बीच पारदर्शिता और विश्वास बहाल करने की चुनौती से जूझ रहा है तब कृष्ण मोहन की नियुक्ति को संगठनात्मक मजबूती और जवाबदेही की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।






