लखनऊ, 2 मई 2026:
भारत की 16वीं जनगणना को लेकर यूपी में भी बिगुल बज गया है। यह विशाल प्रशासनिक अभियान दो चरणों में पूरा किया जाएगा। इसमें पहली बार डिजिटल तकनीक का व्यापक इस्तेमाल होगा। प्रदेश की मुख्य प्रधान जनगणना अधिकारी एवं निदेशक शीतल वर्मा ने शनिवार को महानगर स्थित राजकीय अभिलेखागार में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर इसकी जानकारी दी।
उन्होंने बताया कि पहले चरण की शुरुआत 22 मई 2026 से होगी और यह 20 जून तक चलेगा। इसमें मकानों का सूचीकरण और जनगणना का प्रारंभिक कार्य किया जाएगा। वहीं, दूसरे चरण में फरवरी 2027 के दौरान जनसंख्या गणना पूरी की जाएगी। इससे पहले 7 से 21 मई 2026 तक नागरिकों को स्व-गणना (Self Enumeration) का विकल्प भी दिया जाएगा। इसमें लोग ऑनलाइन अपनी जानकारी खुद भर सकेंगे और उन्हें एक विशेष SE ID जारी होगी।
यह जनगणना कई मायनों में खास होगी क्योंकि देश में पहली बार इसे पूरी तरह डिजिटल माध्यम से संपन्न किया जा रहा है। मोबाइल ऐप के जरिए डेटा संग्रह किया जाएगा और 33 सवालों के माध्यम से मकान, सुविधाएं, परिसंपत्तियां और जनसंख्या से जुड़ी जानकारी जुटाई जाएगी।

शीतल वर्मा ने बताया कि भारत में पहली जनगणना 1872 में शुरू हुई थी, जबकि 1881 में पहली बार पूरे देश में एक साथ जनगणना कराई गई। 2027 की जनगणना देश की 16वीं और आजादी के बाद 8वीं जनगणना होगी। यह विकास योजनाओं के लिए सबसे बड़ा डेटा स्रोत साबित होगी।
प्रदेश में इस अभियान के लिए करीब 5.25 लाख कर्मियों की तैनाती की गई है, जिनमें 5 लाख से अधिक प्रगणक और पर्यवेक्षक शामिल हैं। यह कार्य 75 जिलों, 783 नगरीय निकायों, 1.04 लाख गांवों, 350 तहसीलों और करीब 3.9 लाख ब्लॉकों में घर-घर जाकर पूरा किया जाएगा।
जनगणना अधिनियम 1948 के तहत होने वाली इस प्रक्रिया में जुटाई गई सभी जानकारी पूरी तरह गोपनीय रहेगी। इसका उपयोग केवल सरकारी योजनाओं और विकास कार्यों के लिए किया जाएगा। नागरिकों की सुविधा के लिए 1855 टोल फ्री नंबर भी जारी किया गया है। सरकार ने प्रदेशवासियों से अपील की है कि वे इस महाअभियान में सहयोग करें और सही जानकारी देकर विकास की इस मजबूत नींव को सफल बनाएं।






