Uttarakhand

देहरादून बनेगा देश की लोक कला का सबसे बड़ा मंच, 11 से शुरू होगा राष्ट्रीय महोत्सव, धामी करेंगे आगाज

उत्तराखंड को पहली बार मिला मेजबानी का अवसर, 11 से 15 जुलाई तक परेड ग्राउंड में चलेगा राष्ट्रीय स्तर का लोक संवर्धन पर्व, जुटेंगे कई राज्यों के अल्पसंख्यक कारीगर, हस्तशिल्प, Handloom, Traditional Food और Cultural Program होंगे आकर्षण, आयोजन को लेकर तैयारियां तेज, अधिकारियों को समय पर सभी इंतजाम पूरे करने के निर्देश

देहरादून, 9 जुलाई 2026:

देहरादून इस सप्ताह देश के सबसे बड़े पारंपरिक शिल्प और सांस्कृतिक आयोजनों में से एक का गवाह बनने जा रहा है। राजधानी के परेड ग्राउंड में 11 से 15 जुलाई तक राष्ट्रीय स्तर का लोक संवर्धन पर्व आयोजित होगा। पहली बार उत्तराखंड में होने जा रहा यह आयोजन देशभर के अल्पसंख्यक समुदाय के कारीगरों को एक मंच पर लाएगा, जहां वे अपनी पारंपरिक कला, हस्तशिल्प, हथकरघा उत्पाद, स्थानीय व्यंजन और सांस्कृतिक विरासत का प्रदर्शन करेंगे।

यह पांच दिवसीय आयोजन केंद्रीय अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय की प्रधानमंत्री विकास योजना के तहत उत्तराखंड अल्पसंख्यक कल्याण एवं वक्फ विकास निगम की ओर से कराया जा रहा है। राष्ट्रीय स्तर पर आयोजित होने वाली इस श्रृंखला का यह छठा संस्करण है, जबकि उत्तराखंड को पहली बार इसकी मेजबानी का मौका मिला है।

कार्यक्रम का उद्घाटन मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और प्रदेश के अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री खजान दास करेंगे। आयोजन को सफल बनाने के लिए तैयारियां अंतिम दौर में पहुंच गई हैं। गुरुवार को मंत्री खजान दास ने यमुना कॉलोनी स्थित सरकारी आवास पर अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक की।

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बैठक में अलग-अलग विभागों की तैयारियों का जायजा लिया गया और सभी व्यवस्थाएं तय समय के भीतर पूरी करने के निर्देश दिए गए। बैठक में साफ कहा गया कि आयोजन में बड़ी संख्या में लोगों के आने की संभावना है। ऐसे में सुरक्षा, यातायात, पार्किंग, बिजली, पेयजल, साफ-सफाई, स्टॉल व्यवस्था और अन्य जरूरी इंतजामों में किसी तरह की कमी नहीं रहनी चाहिए। सभी विभागों को आपसी तालमेल के साथ काम करने को कहा गया।

लोक संवर्धन पर्व में उत्तराखंड के अलावा देश के कई राज्यों से अल्पसंख्यक समुदाय के कारीगर हिस्सा लेंगे। यहां पारंपरिक हस्तशिल्प, Handloom उत्पाद, लकड़ी और धातु की कलाकृतियां, हाथ से तैयार किए गए सजावटी सामान, कपड़े, घरेलू उपयोग की वस्तुएं और कई तरह के स्वदेशी उत्पाद प्रदर्शित किए जाएंगे। कारीगरों को अपने उत्पाद सीधे ग्राहकों तक पहुंचाने का मौका मिलेगा, जिससे उन्हें नया बाजार मिलने की उम्मीद है।

आयोजन का एक बड़ा आकर्षण विभिन्न राज्यों के पारंपरिक व्यंजन भी होंगे। अलग-अलग प्रदेशों के Food Stall पर स्थानीय स्वाद का अनुभव लेने का मौका मिलेगा। इसके साथ ही हर दिन सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित होंगे, जिनमें लोक संगीत, लोक नृत्य और पारंपरिक प्रस्तुतियां दर्शकों को देश की विविध संस्कृति से रूबरू कराएंगी।

आयोजकों का मानना है कि यह आयोजन केवल उत्पादों की प्रदर्शनी तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि देश की सांस्कृतिक विविधता को एक मंच पर लाने का भी काम करेगा। इससे स्थानीय लोगों के साथ-साथ देहरादून आने वाले पर्यटकों को भी अलग-अलग राज्यों की कला और संस्कृति को करीब से देखने का अवसर मिलेगा।

इस राष्ट्रीय श्रृंखला के पहले पांच आयोजन दिल्ली के राजघाट, दिल्ली हाट आईएनए, जम्मू-कश्मीर और कोच्चि में हो चुके हैं। उन आयोजनों को अच्छा प्रतिसाद मिला था। अब पहली बार उत्तराखंड को मेजबानी मिलने से राज्य के कारीगरों और स्थानीय हस्तशिल्प को भी राष्ट्रीय पहचान मिलने की उम्मीद बढ़ी है।

विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे आयोजन स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी मजबूती देते हैं। इससे छोटे कारीगरों को नए ग्राहक मिलते हैं, पर्यटन को बढ़ावा मिलता है और स्थानीय कारोबार में भी रौनक आती है। यही वजह है कि प्रशासन भी आयोजन को लेकर पूरी गंभीरता से तैयारियों में जुटा हुआ है।

समीक्षा बैठक में उत्तराखंड अल्पसंख्यक कल्याण विभाग के विशेष सचिव मधुकर पराग धकाते, वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष शादाब शम्स, बलजीत सिंह सोनी समेत कई अधिकारी मौजूद रहे। सभी अधिकारियों ने अपने-अपने विभाग की तैयारियों की जानकारी दी और समय पर व्यवस्थाएं पूरी करने का भरोसा दिया।

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